जानें 'स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी' के बारे में सबकुछ और किस चीनी कंपनी ने बनाई हैं इसकी प्लेटें?

लौह पुरुष सरदार पटेल को समर्पित इस प्रतिमा की घोषणा आठ साल पहले 07 अक्टूबर 2010 को हुई थी. दिसंबर 2013 से इसकी प्रक्रिया शुरू हुई. अब ये तैयार है

News18Hindi
Updated: October 30, 2018, 8:22 AM IST
News18Hindi
Updated: October 30, 2018, 8:22 AM IST
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनकर तैयार है. 31 अक्टूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन करेंगे, तो ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. इसकी ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी होगी. देश के लौह पुरुष सरदार पटेल को समर्पित इस प्रतिमा की घोषणा आठ साल पहले 07 अक्टूबर 2010 को हुई थी. दिसंबर 2013 से इसके बनने की प्रक्रिया शुरू हुई. इस प्रतिमा के लिए एक चीनी कंपनी ने हजारों टन कांसे की प्लेटों से इसका बाहरी अावरण बनाया है.

इस मूर्ति का काम पूरा हो चुका है. सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के शीर्ष नेताओं में रहे हैं, जिनका न केवल देश की आजादी  की लड़ाई में अहम योगदान था बल्कि आजादी के बाद जब वो देश के पहले गृह मंत्री बने तो देश की 562 रियासतों का एकीकरण किया. जानते हैं कैसी होगी ये प्रतिमा और इसके बनाने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी.

ऊंचाई - 182 मीटर (597 फुट). ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. फिलहाल चीन की स्प्रिंग टैंपल बुद्ध दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. ये वैरोचन बुद्ध की एक सबसे विशालकाय बुद्ध प्रतिमा है, जो कि हेनान के जाओकुन कस्बे (लुशान काउन्टी) में, चीन में है. यह बुद्ध प्रतिमा 128 मीटर ऊंची (420 फुट) है, जिसमें 20 मीटर (66 फुट) ऊँचा कमल-सिंहासन भी शामिल है.

स्थान - ये प्रतिमा वडोदरा से 2.5 किलोमीटर दूर साधुबेत नामक जगह पर नर्मदा बांध पर स्थित है. अहमदाबाद से ये जगह 200 किमी दूर है.

कौन सी संस्था इसे बना रही है - सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट, जिसे गुजरात सरकार ने बनाया है.

जब सरदार पटेल की ऊंची प्रतिमा का निर्माण शुरू हुआ (सौजन्य-www.statueofunity.in)


लागत - 2989 करोड़. 27 अक्टूबर 2014 में लार्सन एंड टुब्रो ने 2989 करोड़ में इसकी बोली लगाते हुए इस प्रोजेक्ट को बनाने का अधिकार हासिल किया. इसमें एलएंडटी ने डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और मेंटनेस की पेशकश की थी.
Loading...

कब से काम शुरू हुआ - 31 अक्टूबर 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में इसकी आधारशिला रखी. 31 अक्टूबर 2014 से इस पर काम शुरू हुआ. पहले 15 महीने प्लानिंग पर खर्च हुए.

क्या इसमें वही लोहा इस्तेमाल होगा, जो देशभर से इकट्ठा हुआ था - गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि पटेल की मूर्ति के लिए देशभर के गांवों से लोहा इकट्ठा किया जाएगा, जिससे ये मूर्ति गढ़ी जाएगी. देशभर के छह लाख गांवों से करीब 5000 मीट्रिक टन लोहा इकट्ठा हुआ. लेकिन ये खबरें आईं कि ये लोहा अब प्रतिमा में इस्तेमाल नहीं होकर उसके आसपास जो काम होंगे, उसमें लगाया जाएगा.

31 अक्टूबर को इस मूर्ति के उद्घाटन के बाद ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी (सौजन्य-www.statueofunity.in)


कितने मजदूरों ने लगातार काम किया - करीब 2500 मजदूरों और 200 इंजीनियरों ने. इसमें चीनी मजदूर और एक्सपर्ट भी हैं.

क्या चीनी कंपनियां भी इससे जुड़ी हैं - न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार कई सौ चीनी मजदूरों ने प्रोजेक्ट पर काम किया. उन्होंने समूची प्रतिमा में हजारों टन कांस्य प्लेटों को लगाने का काम किया. करीब पांच हजार कांसे की प्लेटें प्रतिमा के बाहरी आवरण के तौर पर लगाई गई हैं. प्रतिमा का कांट्रैक्ट मिलने के बाद एलएंडटी ने टीक्यू आर्ट फाउंड्री की कंपनी नानचांग स्थित जिंगशी तोकीन को समूची प्रतिमा के लिए कांस्य शीट बनाने का ठेका दिया था. नानचांग में ये कंपनी 50 हजार स्क्वायर फीट में फैली है. इसके पास एक हजार के आसपास कर्मचारी हैं.



सरदार पटेल की इस ऊंची प्रतिमा के इर्द गिर्द 12 किमी लंबी झील और कई भवन तैयार किए जाएंगे (सौजन्य-www.statueofunity.in)

कौन सी तकनीक इस्तेमाल की गई
इसमें अत्याधुनिक आर्ट टैक्नॉलॉजी मसलन लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग टैक्नॉलॉजी एंड टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया गया. ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मूर्ति के अंदर सीमेंट और कंक्रीट का जुड़ाव तरीके से हो पाया है कि नहीं. प्रतिमा का विकास चार चरण में किया गया है. इसके प्रोडक्शन की हर मिनट की जांच के लिए इसमें थ्री डाइमेंशन स्कैनिंग टैक्निक और कंप्युटर न्यूमेरिकल कंट्रोल प्रोडक्शन तकनीक का सहारा लिया गया.

किस सामग्री का कितना इस्तेमाल
- 75 हजार क्यूबिक कंक्रीट
- 18500 टन स्टील की छड़ें
- 22500 टन कांस्य शीट्स
- 22500 मीट्रिक टन सीमेंट

कौन है डिजाइनर - इस प्रतिमा के डिजाइनर जाने माने शिल्पकार राम वी सूतर हैं. उनका नोएडा में एक बड़ा स्टूडियो है. वो देश की कई बड़ी प्रतिमाओं पर काम कर चुके हैं.

आर्किटैक्ट - इस पूरे प्रोजेक्ट के आर्किटैक्ट जोसेफ मेना हैं. वो दुनियाभर में आर्किटैक्ट के तौर पर बड़ी पहचान रखते हैं.

'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. (AP Photo/Ajit Solanki)


खास बातें
- ये भूकंपरोधी है. बड़े से बड़े तूफान का सामना कर सकती है.

- दावा है कि जब ये मूर्ति बनकर तैयार हो जाएगी तो हर साल 15 हजार प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन करेगी.
- इसके आसपास कई और इमारतें और सुविधाएं तैयार की जा रही हैं. इसमें होटल, विजिटिंग सेंटर और मेमोरियल गार्डन होगा.

indian politician statue, Karnataka Legislative Assembly election, 2018, 2019 sabha election, ambedkar, Dr BR Ambedkar statue politics in india, dalit politics in india, भारतीय राजनीतिक प्रतिमा, कर्नाटक विधान सभा चुनाव, 2018, 201 9, लोक सभा चुनाव, भारत में दलित राजनीति, बीआर आंबेडकर प्रतिमा राजनीति,
सरदार पटेल की ये प्रतिमा अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी होगी. (AP Photo/Ajit Solanki)


- स्टैच्यू के मूल ढांचे को कंक्रीट और स्‍टील से बनाया गया है. इसकी बाहर सतह कांस्य की है.
- प्रतिमा के पैरों और धोती के लिए तांबे के उच्‍च गुणवत्ता वाले पैनल चीन से आए. फि प्रतिमा स्‍थल पर इन्हें लगाया गया.
- प्रतिमा का स्‍टील फ्रेमवर्क बनाने का ठेका मलेशिया स्थित कंपनी एवरसेनडाई को दिया गया, जिसने  दुबई के मशहूर बुर्ज खलीफा और बुर्ज अल-अरब जैसी इमारतें बनाई हैं.

 
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर