ये चीनी कंपनी पटेल की प्रतिमा में लगाएगी 22,500 टन कांसा

लौह पुरुष सरदार पटेल को समर्पित इस प्रतिमा की घोषणा आठ साल पहले 07 अक्टूबर 2010 को हुई थी. दिसंबर 2013 से इसकी प्रक्रिया शुरू हुई. इस प्रतिमा में एक चीनी कंपनी हजारों टन कांसे की प्लेटों से इसका बाहरी अावरण बना रही है.

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 12:35 PM IST
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गुजरात में 31 अक्टूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन करेंगे, तो ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. इसकी ऊंचाई स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी होगी. देश के लौह पुरुष सरदार पटेल को समर्पित इस प्रतिमा की घोषणा आठ साल पहले 07 अक्टूबर 2010 को हुई थी. दिसंबर 2013 से इसकी प्रक्रिया शुरू हुई. इस प्रतिमा में एक चीनी कंपनी हजारों टन कांसे की प्लेटों से इसका बाहरी अावरण बना रही है.

अब माना जा रहा है कि दिनरात जुटे हुए हजारों मजदूर और इंजीनियर 25 अक्टूबर को इस पूरा कर देंगे. सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के शीर्ष नेताओं में एक रहे हैं, जिनका ना केवल देश की आजादी  की लड़ाई में अहम योगदान था बल्कि आजादी के बाद जब वो देश के पहले गृह मंत्री बने तो देश की 500 से ज्यादा रियासतों का एकीकरण भी किया. जानते हैं कैसी होगी ये प्रतिमा और इसके बनाने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी.

ऊंचाई - 182 मीटर (597 फुट). ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. फिलहाल चीन की स्प्रिंग टैंपल बुद्ध दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. ये वैरोचन बुद्ध की एक सबसे विशालकाय बुद्ध प्रतिमा है, जो कि हेनान के जाओकुन कस्बे (लुशान काउन्टी) में, चीन में है. यह बुद्ध प्रतिमा 128 मीटर ऊंची (420 फुट) है, जिसमें 20 मीटर (66 फुट) ऊँचा कमल-सिंहासन भी शामिल है.

स्थान - ये प्रतिमा वडोदरा से 2.5 किलोमीटर दूर साधुबेत नामक जगह पर नर्मदा बांध पर स्थित है. अहमदाबाद से ये जगह 200 किमी दूर है.

कौन सी संस्था इसे बना रही है - सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट, जिसे गुजरात सरकार ने बनाया है.

जब सरदार पटेल की ऊंची प्रतिमा का निर्माण शुरू हुआ (सौजन्य-www.statueofunity.in)


लागत - 2989 करोड़. 27 अक्टूबर 2014 में लार्सन एंड टुब्रो ने 2989 करोड़ में इसकी बोली लगाते हुए इस प्रोजेक्ट को बनाने का अधिकार हासिल किया. इसमें एलएंडटी ने डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और मेंटनेस की पेशकश की थी

कब से काम शुरू हुआ - 31 अक्टूबर 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में इसकी आधारशिला रखी. 31 अक्टूबर 2014 से इस पर काम शुरू हुआ. पहले 15 महीने प्लानिंग पर खर्च हुए.

क्या इसमें वही लोहा इस्तेमाल होगा, जो देशभर से इकट्ठा हुआ था - गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि पटेल की मूर्ति के लिए देशभर के गांवों से लोहा इकट्ठा किया जाएगा, जिससे ये मूर्ति गढ़ी जाएगी. देशभर के छह लाख गांवों से करीब 5000 मीट्रिक टन लोहा इकट्ठा हुआ. लेकिन ये खबरें आईं कि ये लोहा अब प्रतिमा में इस्तेमाल नहीं होकर उसके आसपास जो काम होंगे, उसमें लगाया जाएगा.

31 अक्टूबर को इस मूर्ति के उद्घाटन के बाद ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी (सौजन्य-www.statueofunity.in)


कितने मजदूर लगातार काम में जुटे हैं - करीब 2500 मजदूर और इंजीनियर काम में लगे हैं. इसमें काफी चीनी मजदूर और एक्सपर्ट भी हैं.

क्या चीनी कंपनियां भी इससे जुड़ी हैं - न्यूज एजेंसी एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी) के अनुसार कई सौ चीनी मजदूर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. ये लोग समूची प्रतिमा में हजारों टन कांस्य प्लेटों को लगाने का काम करेंगे. करीब पांच हजार कांसे की प्लेटें प्रतिमा के बाहरी आवरण के तौर पर लगाई जा रही हैं. प्रतिमा का कांट्रैक्ट मिलने के बाद एलएंडटी ने टीक्यू आर्ट फाउंड्री की कंपनी नानचांग स्थित जिंगशी तोकीन समूची प्रतिमा में लगने वाली कांस्य शीट के लिए ठेका दे दिया.

इसके निर्माण में किसने पैसा लगाया - हाल ही आई कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (सीएजी) की रिपोर्ट में कहा गया कि स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के लिए कई पब्लिक सेक्टर्स ने पैसा लगाया है. इसमें ओएनजीसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन, इंडियन ऑयल कारपोरेशन और ऑयल इंडिया ने पैसा लगाया है. सीएजी ने इन कंपनियों की खिंचाई भी की कि उन्होंने इसमें क्यों पैसा लगाया. साथ ही इस प्रोजेक्ट पर गुजरात सरकार के साथ केंद्र सरकार ने भी बजट के जरिए धन आवंटित किया है.

सरदार पटेल की इस ऊंची प्रतिमा के इर्द गिर्द 12 किमी लंबी झील और कई भवन तैयार किए जाएंगे (सौजन्य-www.statueofunity.in)


कौन सी तकनीक इस्तेमाल की गई
इसमें अत्याधुनिक आर्ट टैक्नॉलॉजी मसलन लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग टैक्नॉलॉजी एंड टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया गया. ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मूर्ति के अंदर सीमेंट और कंक्रीट का जुड़ाव तरीके से हो पाया है कि नहीं. प्रतिमा का विकास चार चरण में किया गया है. इसके प्रोडक्शन की हर मिनट की जांच के लिए इसमें थ्री डाइमेंशन स्कैनिंग टैक्निक और कंप्युटर न्यूमेरिकल कंट्रोल प्रोडक्शन तकनीक का सहारा लिया गया.

किस सामग्री का कितना इस्तेमाल
- 75 हजार क्यूबिक कंक्रीट
- 18500 टन स्टील की छड़ें
- 22500 टन कांस्य शीट्स
- 22500 मीट्रिक टन सीमेंट

कौन है डिजाइनर - इस प्रतिमा के डिजाइनर जाने माने शिल्पकार राम वी सूतर हैं. उनका नोएडा में एक बड़ा स्टूडियो है. वो देश की कई बड़ी प्रतिमाओं पर काम कर चुके हैं.

आर्किटैक्ट - इस पूरे प्रोजेक्ट के आर्किटैक्ट जोसेफ मेना हैं. वो दुनियाभर में आर्किटैक्ट के तौर पर बड़ी पहचान रखते हैं.

'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. (AP Photo/Ajit Solanki)


विरोध - साधु बेत नामक इस स्थान का मूल नाम वार्ता बावा टेकरी है. यहां के स्थानीय लोगों ने लंबे समय तक इस प्रोजेक्ट के लिए उनकी जमीनों के अधिग्रहण का विरोध किया. पर्यावरणविदों ने इसलिए इसका विरोध किया, क्योंकि मंत्रालय से इसका क्लीयरेंस नहीं लिया गया था. यहां के करीब गांव कवाडिया, कोठी, वाघोडिया, लिंबडी, नावागाम और गोरा यहां के करीब गांव हैं. जब इस प्रोजेक्ट के लिए 927 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही थी, तो उसमें इन गांवों के लोगों की जमीनें भी आईं. हालांकि बाद में गुजरात सरकार ने उनकी मांगें मान लीं.

जब 2014-15 के बजट में प्रतिमा के लिए धन आवंटिक किया गया तो कई सियासी पार्टियों ने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा, शिक्षा और कृषि योजनाओं को अनदेखा कर इस प्रोजेक्ट को धन दिया जा रहा है.
प्रतिमा के निर्माण में चीनी कंपनियों को सलंग्न करने का भी विरोध हुआ. ये विरोध कांग्रेस की ओर से हुआ.

खास बातें
- ये भूकंपरोधी है. बड़े से बड़े तूफान का सामना कर सकती है.

- दावा है कि जब ये मूर्ति बनकर तैयार हो जाएगी तो हर साल 15 हजार प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन करेगी.
- इसके आसपास कई और इमारतें और सुविधाएं तैयार की जा रही हैं.

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सरदार पटेल की ये प्रतिमा अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी होगी. (AP Photo/Ajit Solanki)


- स्टैच्यू के मूल ढांचे को कंक्रीट और स्‍टील से बनाया गया है. इसकी बाहर सतरह कांस्य की होगी.
- प्रतिमा के पैरों और धोती के लिए तांबे के उच्‍च गुणवत्ता वाले पैनल चीन से आएंगे और प्रतिमा स्‍थल पर लगाए जाएंगे।
- प्रतिमा का स्‍टील फ्रेमवर्क बनाने का ठेका मलेशिया स्थित कंपनी एवरसेनडाई को दिया गया है, जो दुबई के मशहूर बुर्ज खलीफा और बुर्ज अल-अरब जैसी इमारतें बना चुके हैं
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