पीएम नरेंद्र मोदी की थाईलैंड यात्रा के दौरान 16 देशों के बीच होगा ये अहम करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की 3 दिवसीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की 3 दिवसीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) शिखर सम्मेलन के कार्यक्रम में शामिल होंगे. क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में शामिल 16 देशों में विश्व जनसंख्या की कुल 54 फीसदी जनसंख्या रहती है.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 1:44 PM IST
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) अपनी तीन दिवसीय थाईलैंड (Thailand) यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) शिखर सम्मेलन के कार्यक्रम में शामिल होंगे. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी अपनी यात्रा के पहले दिन थाईलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय को बैंकाक के नेशनल इंडोर स्टेडियम में संबोधित करेंगे. साथ ही इस दौरान पीएम मोदी गुरू नानक देव जी की 550वीं जयंती पर स्मृति सिक्का और तिरुक्कुरल का थाई अनुवाद जारी करेंगे. 3 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी थाई प्रयुत चान-ओ-चा के साथ भारत-आसियान की 16वें शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे.

विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर सिंह ने पत्रकारों से कहा कि आसियान से संबंधित शिखर सम्मेलन हमारे विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. प्रधानमंत्री मोदी में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में सातवीं बार और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 6वीं बार शामिल हो रहे हैं. उन्होंने  कहा कि पिछले साल जनवरी में भारत ने भारत-आसियान शिखर सम्मेलन 25वीं जयंती का आयोजन किया था. जिसमें आसियान के 10 बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया था. तब भारत-आसियान के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत और गहना बनाने को लेकर सहमति बनी थी.

प्रधानमंत्री मोदी में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में सातवीं बार और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 6वीं बार शामिल हो रहे हैं.




आसियान देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा संबंध
पीएम मोदी के इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा संबंधों को मजबूत बनाना है. इसके अतिरिक्त आरसीईपी समझौते पर पीएम मोदी का विशेष जोर रहेगा. गौरतलब है कि 3 नवंबर को बैंकाक में 16 एशियाई देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर मीटिंग हो रही है. मीटिंग में रीजनल क्रॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) को लेकर एक अहम घोषणा होना है.

बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब से भारत के आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों को नया आयाम देने के लिए वहां की दो दिवसीय यात्रा की है. इस दौरान सऊदी अरब ने भारत में 100 अरब डॉलर निवेश करने की इच्छा जाहिर की है. दरअसल भारत ने अब अपनी विदेश नीति में पड़ोसी देशों की तरह तरजीह देने का नीति पर चल रहा है. थाईलैंड की यह यात्रा मोदी की उसी नीति का ही हिस्सा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सऊदी अरब की यात्रा की है.


रीजनल क्रॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप
बता दें कि रीजनल क्रॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP)में 10 आसियान देशों (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस और वियतनाम) के अतिरिक्त  छह एफटीए के देश शामिल हैं. इन देशों में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आते हैं.

दरअसल आरसीईपी में 16 एशियाई देशों के बीच मुक्त व्यापार को लेकर समझौता होने वाला है. जिसके जरिए सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाया जा सकेगा. इस मीटिंग में सदस्य देशों के बीच व्यापारिक टैक्स और आर्थिक छूट को लेकर समझौता किया जायेगा. जिसके बाद सदस्य दोनों के बीच सुगमता से व्यापार को बढ़ाया जा सकेगा.

आरसीईपी समझौते पर पीएम मोदी का विशेष जोर रहेगा.


आरसीईपी देशों में विश्व की 54 फीसदी जनसंख्या
गौरतलब है कि आरसीईपी के अंतर्गत आने वाले 16 देशों में विश्व की जनसंख्या का 54 प्रतिशत लोग रहते हैं. साथ ही दुनिया में होने वाले कुल निर्यात का 25 प्रतिशत इन्हीं देशों से किया जाता है. इन 16 एशियाई देशों में विश्व की कुल जीडीपी का 58 प्रतिशत हिस्सा आता है. रीजनल क्रॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप में मुक्त व्यापार समझौता दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता होगा. समझौता होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार वाला क्षेत्र बन जाएगा.

आरसीईपी के अंतर्गत आने वाले 16 देशों में विश्व की जनसंख्या का 54 प्रतिशत लोग रहते हैं.


बता दें कि सदस्य देशों के बीच कुल 25 मामलों को लेकर सहमति होनी है, जिसमें से 21 मामलों पर पहले से ही सहमति बन चुकी है, केवल निवेश, ई कॉमर्स जैसे मुद्दों पर सहमति कायम होनी बाकी है. आरसीईपी में शामिल क्षेत्रों में काम कर रही भारत की कंपनियों को एक बड़ा बाजार मिल सकेगा. इससे भारत में इन देशों से आने वाले उत्पादों पर टैक्स कम होगा और ग्राहकों को कम कीमत पर ये सामान उपलब्ध हो सकेंगे.

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