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फोन बताएगा, आपके आसपास खड़ा शख्स कोरोना वायरस संदिग्ध है या नहीं

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 3:59 PM IST
फोन बताएगा, आपके आसपास खड़ा शख्स कोरोना वायरस संदिग्ध है या नहीं
एप बताता है कि आपके आसपास कौन सा शख्स कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ चुका है

ये छोटा-सा मुल्क कोरोना की जांच (coronavirus test) के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट की तर्ज पर किट तैयार कर रहा है, जिसकी कीमत सिर्फ 75 रुपए होगी.

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  • Last Updated: March 23, 2020, 3:59 PM IST
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हर देश अपने-अपने स्तर पर Covid-19 से जंग जीतने की कोशिश कर रहा है. इसमें टेस्ट किट तैयार करने, क्वेरेंटाइन होने से लेकर कई और तरीके हैं. कई लोग तकनीक की मदद से भी इसका संक्रमण फैलने से रोक रहे हैं. जानते हैं, कोरोना वायरस से संक्रमित कौन सा देश बचाव के लिए क्या रहा है.

साउथ कोरिया
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस देश अपने नागरिकों के लिए सबसे बेहतर कोशिशें की हैं. International Vaccine Institute के डायरेक्टर जनरल Jerome Kim ने इस बारे में बताया कि कैसे साउथ कोरिया अपने यहां कोरोना संक्रमण पर इतनी तेजी से नियंत्रण पा सका है. इसकी एक वजह ये है कि वहां पर बायोटेक इंडस्ट्रूी काफी बेहतर ढंग से काम कर रही है, जिसका नेतृत्व कई वैज्ञानिक मिलकर कर रहे हैं. कोरोना वायरस का जीन सिक्वेंस सामने आने के बाद दवा खोजने की जगह वहां पर वैज्ञानिकों ने टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी. इनके अनुसार ही बायोटेक कंपनियों ने टेस्ट किट तैयार कीं और अब ये देश एक रोज में लगभग 20 हजार या उससे भी ज्यादा की आबादी का कोरोना वायरस टेस्ट कर सकता है.

जगह-जगह टेस्ट सेंटर खोले गए हैं, जहां लोग खुद पहुंच सकते हैं. अस्पतालों में फोन-बूथ की तरह जांच सेंटर खोले गए हैं, जहां से मेडिकल स्टाफ एक प्लास्टर पैनल की आड़ से संदिग्धों की जांच करता है. यहां पर negative air pressure रखा गया है ताकि कमरे से बाहर हवा का कोई भी पार्टिकल न जा सके. इससे संक्रमण फैलने का डर बहुत कम हो जाता है. जांच की पूरी प्रक्रिया मुफ्त है. और जैसे ही किसी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होती है, तुरंत आइसोलेशन और इलाज शुरू हो जाता है.



देश की सरकार खुद मान रही है कि उसके पास जांच के लिए बहुत कम टेस्ट किट हैं


फिलीपींस
यहां अबतक 380 लोग कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. लेकिन जांच के यहां के तरीके को दुनियाभर के एक्सपर्ट नकार रहे हैं. यहां पर टेस्ट किट बहुत कम संख्या में हैं और यहां तक कि मरीज की देखभाल के लिए अस्पताल के पास personal protective equipment (PPE) भी नहीं हैं. लेकिन नेताओं की तरफ से आ रहे बयान इन मुसीबतों को गहरा रहे हैं. 16 मार्च को प्रेसिडेंट Rodrigo Duterte ने देश के मुख्य शहर Luzon के लॉकडाउन का आदेश दिया. इसके बाद से नेता आपस में ही उलझ रहे हैं कि लॉकडाउन हो या नहीं. इस दौरान कौन बाहर निकले, कौन नहीं. फूड इंडस्ट्री या ट्रांसपोर्ट भी काम करेगा या नहीं, इसपर विवाद हैं. इधर देश की सरकार खुद मान रही है कि उसके पास जांच के लिए बहुत कम टेस्ट किट हैं.

इटली
इस देश में मौत के आंकड़े चीन से भी आगे जा चुके हैं. संक्रमण लगातार बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि देश ने बीमारी को हल्के में लिया, जिसके कारण ये हो रहा है. 20 फरवरी को यहां पहला कोरोना पॉजिटिव केस आया. 23 फरवरी को एक साथ 130 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले. इसके बाद देश के 11 शहरों को सील कर दिया गया और मिलिट्री तैनात हो गई. एक्शन तो लिया गया लेकिन तब भी सरकार वायरस के हमले के लिए तैयार नहीं थी. उसी रात पीएम Conte ने जनता से कहा कि हम पहला देश हैं जो इस हद तक नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं. मिलान शहर, में एक कैंपेन शुरू हो गया- “Milan Doesn’t Stop”. साथ ही वहां का कैथेड्रल Duomo सैलानियों के लिए खुलवा दिया गया. लोग घूमने-फिरने लगे. इधर अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी. आखिरकार 8 मार्च को, जब पीएम ने इटली के उत्तरी हिस्से में लॉकडाउन की घोषणा की, तब तक 7,375 लोग कोरोना पॉजिटिव थे. तब जाकर इसे नेशनल इमरजेंसी घोषित किया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी है और संक्रमण काफी फैल चुका था.

देश के 11 शहरों को सील कर दिया गया और मिलिट्री तैनात हो गई


निकारागुआ
दक्षिण अमेरिका में अब भी कोरोना वायरस का संक्रमण कम है लेकिन यहां पर फिलहाल उसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. जैसे निकारागुआ में ही 14 मार्च को वाइस-प्रेसिडेंट Rosario Murillo ने एक आयोजन किया, जिसमें बहुत से लोग शामिल हुए. इल रैली को नाम दिया गया- “Love in the Time of Covid-19”. इस दौरान बहुत से लोग नाच-गा रहे थे. बड़ी संख्या में लोगों का जमा होना इस वायरस का संक्रमण फैलने का सबसे आसान तरीका है. इस देश में अबतक अपने यहां किसी कोरोना मरीज की पुष्टि नहीं की है.

सेनेगल
इस अफ्रीकन देश ने साल 2014 में इबोला को झेला है इसलिए वो कोरोना के लिए लगभग पूरी तरह से तैयार है. यहां पर Pasteur Institute नामक नामी रिसर्च लैब है जो WHO के साथ मिलकर काम करता है. बता दें कि यलो फीवर की वैक्सीन सबसे पहले यहीं बनाई गई थी. अब यही लैब एक ब्रिटिश बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि Covid-19 की जांच के लिए ऐसी किट बन सके जो 10 मिनट में सही नतीजा दे. Washington Post में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 3 महीने में ये किट तैयार हो जाएगी और बहुत कम कीमत पर मार्केट मे होगी.

इस देश ने किसी भी महामारी से निपटने के लिए अपने को पूरी तरह से तैयार कर लिया है


हांगकांग
यहां 356 से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं. वहीं पालतू कुत्तों में भी इस वायरस का संक्रमण इसी देश में देखने में आया है. हालांकि Agriculture, Fisheries, and Conservation Department (AFCD) के स्पोक्सपर्सन का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिल सका है कि Covid-19 जानवरों से इंसानों में फैलती है. इसके बावजूद कुत्ते-बिल्ली पालने वालों को अब के हालातों में थोड़ा ध्यान देना होगा. हाइजीन प्रैक्टिस करनी होगी और उन्हें किसी भी संक्रमित के पास जाने से रोकना होगा.

सिंगापुर
17 साल पहले यहां सार्स का प्रकोप फैला था. इसके बाद से इस देश ने किसी भी महामारी से निपटने के लिए अपने को पूरी तरह से तैयार कर लिया. Communicable diseases division की डिप्टी डायरेक्टर Lalitha Kurupatham कहती हैं कि जिस वक्त सबकुछ ठीक रहता है, उस समय हम खुद को किसी महामारी या इमरजेंसी के लिए तैयार कर रहे होते हैं. यही वजह है कि चीन में कोरोना के शुरुआती मामले आने के साथ ही सिंगापुर ने चीन से आवाजाही बिल्कुल बंद कर दी. स्कूल-कॉलेज, रेस्त्रां, सिनेमाघर या किसी भी पब्लिक प्लेस में एंट्री के समय ही फीवर चेक किया जा रहा है. यहां पर दूसरे देशों से अलग स्कूल खुले हुए हैं लेकिन लंच टाइम में बच्चों को अपनी ही जगह पर बैठे हुए खाना-पीना है.

इस देश के पास serology test की एक तकनीक भी है, जिसकी मदद से ये जांच सकते हैं कि किसी बीमारी के लिए किसके शरीर में एंटीबॉडीज हैं, यानी कौन बीमारी से लड़ सकता है या कौन शिकार हो सकता है. इसके अलावा यहां स्मार्टफोन पर एक एप आ चुका है, जो बताता है कि आपके आसपास कौन सा शख्स कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ चुका है. इस एप का नाम है- TraceTogether

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First published: March 23, 2020, 3:58 PM IST
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