क्यों इस मौसम में मामूली बुखार पर भी टेस्ट जरूर कराएं, चिकनगुनिया हो सकता है...

चिकनगुनिया वायरस के लक्षण शऱीर में धीरे धीरे नजर आते हैं. आमतौर ब्लड टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है, चिकनगुनिया होने पर क्या करें या क्या ना करें

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 12:51 PM IST
क्यों इस मौसम में मामूली बुखार पर भी टेस्ट जरूर कराएं,  चिकनगुनिया हो सकता है...
ये है चिकनगुनिया का कारक
News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 12:51 PM IST
बरसात का मौसम जहां उमस के बीच सुकून लेकर आता है, वहीं बहुत सी बीमारियां भी. इसी मौसम में देशभर में चिकनगुनिया, डेंगू, जीका जैसी वायरस से फैलने वाली बीमारियां बढती हैं तो बदलता मौसम फ्लू, बुखार, खांसी भी लेकर आता है. इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली बीमारी चिकनगुनिया से बचकर रहें. ऐसा आप कर सकते हैं, ये हम आपको यहां बताएंगे.

चिकनगुनिया वायरस से होने वाली बीमारी है. ये वायरस मच्छरों के जरिए फैलते हैं. दो तरह के मच्छर चिकनगुनिया फैलाते हैं- मादा एडीज एजिप्टाई और मादा एडीज अल्बोपिक्टस. इन्हीं दोनों प्रजातियों की मादा मच्छर डेंगू और जीका वायरस फैलाने के लिए भी जिम्मेदार होती हैं.

दोनों ही मच्छर दिन की रोशनी में इंसानों को काटते हैं-या तो सुबह तड़के या देर दोपहर में. चिकनगुनिया बीमारी मच्छर के जरिए ही फैलती है, इंसानों के संक्रमण से नहीं.

चिकनगुनिया संक्रमण का एक पूरा साइकिल है. मच्छर काटने के बाद ये बीमारी तुरंत लक्षण नहीं दिखाती बल्कि इसका असर दो से लेकर 12 दिनों में नजर आता है.

बीमारियों के इस मौसम में डेंगू और चिकनगुनिया से कैसे संभलें

'चिकनगुनिया' का चिकन से कोई लेना-देना नहीं
चिकनगुनिया बीमारी का चिकन से कोई लेना देना नहीं है. दरअसल ये शब्द एक अफ़्रीकी भाषा 'माकोंडे' से लिया गया है, जिसका मतलब है 'वो जो मुड़ रहा है'. इस बुखार में जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है. ऐंठन आने लगती है. चिकनगुनिया का पहला केस 1952 में अफ्रीका के तंजानिया में पाया गया था, जिसके बाद ये तेजी से दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में पहुंच गया.
Loading...

चिकनगुनिया के लक्षण:

  • जोड़ों में तेज दर्द होता है. कई बार तो व्यक्ति का चलना-फिरना दूभर हो जाता है.

  • बहुत तेज बुखार आता है, जो  104 डिग्री के ऊपर भी चला जाता है.

  • पूरे शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं जिनमें खुजली और जलन दोनों होते हैं.




  • हालांकि चिकनगुनिया जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने से जोड़ों में विकार हमेशा के लिए हो सकता है.

  • वैसे तो इसका असर एकाध हफ्ते में खत्म हो जाता है लेकिन अधिकतर लोगों को जोड़ों में जकड़न और दर्द महीनों तक रहता है.

  • चिकनगुनिया किसी को भी हो सकता है लेकिन नवजात शिशु, गर्भवती औरतों, बूढ़ों और हाई-ब्लडप्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को होने की सम्भावना अधिक होती है.


कैसे बरतें सावधानी 

  • इसके लिए जरूरी है कि जैसे ही अड़ोस-पड़ोस में चिकनगुनिया के फैलने की खबर सुनें, तुरंत अपना भी ब्लड टेस्ट करवा लें. ब्लड-टेस्ट से ही इस बीमारी का पता लगाना संभव है.

  • बारिश के मौसम में किसी भी तरह के बुखार और सर्दी-जुकाम को हल्के में ना लें. तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.


डॉक्टरों ने ढूंढा डेंगू-चिकनगुनिया का इलाज, इस बैक्टीरिया से करेंगे ठीक

ऐसे करें बचाव

चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए अभी तक कोई वैक्सीन या दवाई नहीं बनी है. जोड़ों के दर्द से आराम के लिए डॉक्टर पेनकिलर ही देते हैं. इसीलिए जरूरी है कि जितना हो सके, इस बीमारी से बचने की कोशिश करें.

  • जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया, चिकनगुनिया के मच्छर दिन के समय काटते हैं, इस दौरान भी मोस्किटो रिपेलेंट लगाए रखें.

  • घर से बाहर निकलें तो पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें.

  • अपने घर और घर के आस-पास कहीं भी पानी जमा ना होने दें. याद रखें, ये मच्छर साफ पानी में भी पनपते हैं. इसीलिए कहीं भी पानी का ठहराव ना होने दें.

  • मच्छरदानी का प्रयोग करें.

  • सेब, केले, भुना चिकन और मछली जिनमें ओमेगा-3 होता है, संतरे और नीबू खूब खाइए.  

  • अपने एसी और फ्रिज की ट्रे भी निरंतर साफ करें.


चिकनगुनिया हो जाए तो क्या करें: 

  • वैसे तो चिकनगुनिया के लिए कोई दवाई या वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है, लेकिन फिर भी आप अपने डॉक्टर से बात करें.

  • खूब पानी पिएं, जिससे जोड़ों में मूवमेंट बना रहे.

  • आराम करें. जितना हो सके सोयें और दिमाग को रिलैक्स रखें.

  • घबराएं नहीं, बस खुद को अपने आस-पड़ोस को सुरक्षित रखें.


आज़ादी के इस अधिनियम के साथ भारत के बंटवारे पर लगी थी मुहर
First published: July 18, 2019, 12:50 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...