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अयोध्या राम मंदिर के शिल्पकार ये हैं चंद्रकांत भाई, जानिए क्यों हैं विख्यात

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Updated: November 10, 2019, 11:18 AM IST
अयोध्या राम मंदिर के शिल्पकार ये हैं चंद्रकांत भाई, जानिए क्यों हैं विख्यात
अयोध्या में राम मंदिर के मॉडल को चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने बनाया है.

चंद्रकांत भाई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जिन्हें पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है. गुजरात के विख्यात सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा थे.

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अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद (Ram Janmabhoomi dispute) से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) का फैसला आ गया है. कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम लला विराजमान को सौंप दिया है. जिसके बाद से यहां राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है. राम मंदिर का मॉडल देश के जान माने मंदिर आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने तैयार किया है. राम मंदिर का मॉडल अयोध्या में कार्यसेवकपुरम में रखा गया है. इसी मॉडल के अनुरूप ही प्रस्तावित राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा. चंद्रकांत भाई के अनुसार अयोध्या में भव्य राम मंदिर 106 खंभे वाला एक दो मंजिला मंदिर होगा. जिसके गर्भगृह में प्रभुराम विराजमान होंगे.  आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने कहा है कि मंदिर निर्माण में कम से कम तीन साल का समय लगेगा.

अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जिन्हें पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है. गुजरात के विख्यात सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा थे. चंद्रकांत भाई के पिता भी देश के जाने माने आर्किटेक्ट रहे हैं. उन्होंने ही उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर के मरम्मत का कार्य किया था. चंद्रकांत भाई के परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी देश के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में अपना योगदान दे रही है.

अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जिन्हें पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है.


मंदिर निर्माण की शैलियों का विकास

गौरतलब है कि भारत में मंदिर निर्माण कला विश्व की प्राचीन सभ्यताओं की समकालीन है. भारत में भौगोलिक और सांस्कृतिक प्रभावों के अनुरूप मंदिरों के निर्माण से संबंधित दो मूल स्थापत्य शैलियों का विकास हुआ हैं. इसके साथ ही इन दोनों शैलियों से प्रभावित एक तीसरी बेसर शैली का भी मघ्य भारत में विकास हुआ है.

अयोध्या के कार्यसेवकपुरम में रखे राम मंदिर मॉडल के अनुरूप ही मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है.


इन दोनों प्रमुख शैलियों नागर और द्रविड़ का प्रभाव पूरे देश की मंदिरों के निर्माण में देखा जा सकता है. नागर शैली जहां उत्तर भारत के मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुआ है, तो वहीं दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली में मंदिरों का निर्माण किया गया.
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मंदिर निर्माण की शैलियों का विकास पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ
उपरोक्त दोनों ही मंदिर निर्माण शैलियों से जुड़े कारीगर और आर्किटेक्ट समुदायों ने अपनी संबंधित शैलियों का पीढ़ी दर पीढ़ी विकास किया. उत्तर भारत में सोमपुरा नागर शैली के मंदिरों के निर्माण और डिजाइन से जुडा हुआ है. अधिकांस सोमपुरा परिवार मंदिरों के निर्माण के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है.

पद्म श्री प्रभाशंकर भाई औघड़ भाई का परिवार नागर शैली के मंदिर का प्रमुख निर्माणकर्ता और डिजाइनर है. सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण, स्वतंत्र भारत की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित परियोजना के रूप में जाना जाता है. जिसे सोमनाथ महा मेरू प्रसाद के नाम से जाना जाता है, के काम को इसी परिवार ने अंजाम दिया था.

गुजरात के सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रकांत भाई के दादा प्रभाशंकर भाई ने किया था.


सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के नायक चंद्रकांत भाई के दादा प्रभाशंकर सोमपुरा ही थे. प्रभाशंकर भाई वास्तव में नागर शैली के एक विद्वान के रूप में जाने जाते थे और बाद में उन्होंने जो कुछ भी जाना, सीखा और अभ्यास किया. उसे अब क्लासिक्स के रूप में जाना जाता है.

नागर शैली की धरोहर है सोमपुरा परिवार
पद्मश्री पी. ओ. सोमपुरा की विरासत नागर शैली की धरोहर साबित हुआ है. जिसको उनके बेटे और शिष्यों द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है.  चंद्रकांत भाई इसी प्रसिद्ध परिवार की तीसरी पीढ़ी है. साथ ही उनके बाद की चौथी पीढ़ी भी देश के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में अपना योगदान दे रही है.

प्रस्तावित राम मंदिर की भूमि


चंद्रकांत सोमपुरा को 1997 में सर्वश्रेष्ठ आर्किटेक्ट घोषित किया गया था. उनके द्वारा लंदन में निर्मित अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है. सोमपुरा परिवार ने गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर के साथ-साथ सिंगापुर,पिट्सबर्ग और अमेरिका में मंदिर निर्माण के कई परियोजनाओं में शामिल रहा है.

आर्किटेक्ट का नही लिए कोई प्रशिक्षण
आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई ने वास्तुकला में कोई व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है. इंटरमीडिएट के बाद उनके पिता ने उनकी पढ़ाई बंद करवा दी थी. चंद्रकांत भाई ने मंदिर निर्माण की कला अपने दादा प्रभाशंकर सोमपुरा से सीखा है. चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने देश-विदेश में अबतक 100 से भी ज्यादा मंदिर बनाये हैं. लंदन, पीट्सबर्ग में सर्वधर्म मंदिर, बैंकॉक में विष्णु मंदिर और अमेरिका में जैन मंदिर बनाया है.

2001 में अयोध्या लाया गया मंदिर का मॉडल
राममंदिर का मॉडल 1989 में धर्माचारियों के द्वारा प्रस्तावित किया गया था. राम मंदिर के मॉडल को 2001 में अयोध्या में लाया गया. राममंदिर के इस मॉडल के अनुसार106 खंभों और 24 दरवाजों वाला यह भव्य दो मंजिला मंदिर है, जिसके ऊपरी भाग में भी 106 खंभे होंगे. प्रत्येक खंभे में 12 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को उकेरा जाएगा. साथ ही फूल पत्तियों का भी डिजाइन होगा. मंदिर के प्रमुख प्रवेश द्वार को सिंह द्वार के नाम दिया गया है.

राममंदिर के इस मॉडल के अनुसार106 खंभों और 24 दरवाजों वाला यह भव्य दो मंजिला मंदिर है.


उल्लेखनीय है कि देश के लगभग सभी मंदिर करीब-करीब चौकोर आकृति में बनाए जाते हैं लेकिन प्रस्वावित राममंदिर का गर्भगृह अष्टकोणीय होगा. साथ ही मंदिर की परिक्रमा पथ गोलाई में बनाया जाएगा. हालांकि अधिकांस मंदिर का परिक्रम पथ चौकोर होती है. नागर शैली में डिजाइन किया गया यह राममंदिर का शिखर भी अष्टकोण है. इस दो मंजिला मंदिर के भूतल पर रामलला की मूर्ति होगी और उपर के तल पर राम दरबार होगा.

राम मंदिर मॉडल बनाने पर चंद्रकांत भाई ने कहा कि राम मंदिर का मॉडल बनाना उनके जीवन काल में मंदिर निर्माण की उपलब्धियों के प्रदर्शन का शानदार अवसर है. उन्होंने कहा राम मंदिर का दर्शन करने वाले उनके इस योगदान की सराहना करेंगे.

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First published: November 10, 2019, 11:15 AM IST
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