मिजोरम में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे ये हैं कारण

सारे विवाद की शुरूवात राज्य के गृह और वित्त विभाग के मुख्य सचिव लालनुनमाविया चुआंगुगो का मिजोरम से बाहर ट्रांफर करने के बाद हुआ

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Updated: November 9, 2018, 8:24 AM IST
मिजोरम में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे ये हैं कारण
फाइल फोटो
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Updated: November 9, 2018, 8:24 AM IST
एडम सप्रिंसांग

मिजोरम में इस सप्ताह के शुरु में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया. यह प्रदर्शन राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी बी एस शशांक को हटाने को लेकर किया गया था. जिसने राज्य में  हाल ही में होने जा रहे चुनाव की सारी प्रक्रियों को बाधित कर दिया है.

हालांकि चुनाव आयोग ने इस खराब होते माहौल को संभलने के लिए तेजी से सक्रिय हुआ. उसने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को मंगलवार को मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाया. वहीं विरोध प्रदर्शन को बुलाने वाले आयोजकों का कहना है कि वे देख रहे हैं कि चुनाव पैनल क्या करता है.

गौरतलब है कि सोमवार को लगभग 43000 हजार लोग राजधानी आईजोल में इकट्ठे हो गए थे. यह प्रदर्शन का पहला और व्यापक दिन था. लोगों गाना गाते हुए, प्रार्थना और जप करते हुए मुख्य चुनाव अधिकारी के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे.

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यह विरोध प्रदर्शन समानरूप से राज्य के लगभग 7 बड़े कस्बों में जिला चुनाव अधिकारियों के ऑफिस के बाहर हुआ. जहांतक की मिजोरम के सरकारी कर्मचारियों के संघ ने भी धमकी दी है कि, यदि 9 नवंबर तक शशांक को नहीं हटाया गया तो वे असहयोग आंदोलन चलाएंगे.

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन तीन मिजो कमेटियों से मिल कर बने एनजीओ कोर्डिनेशन कमीशन के द्वारा किया गया था. इसमें शामिल कमेटियां- यंग मिजो एसोशिएशन, मिजोरम सीनियर सिटिजंस एसोशिएशन और मिजो स्टूडेंट एसोशिएशन हैं.
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दरअसल इस सारे विवाद की शुरूवात राज्य के गृह और वित्त विभाग के मुख्य सचिव लालनुनमाविया चुआंगुगो का मिजोरम से बाहर ट्रांफर करने के बाद हुआ. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी शशांक ने एक पत्र द्लारा आरोप लगाया कि चुआंगुगो चुनाव प्रक्रिया में हस्ताक्षेप कर रहे है.

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हालांकि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कई कारण थे. मिजो ग्रुप का मानना था कि चुआंगुगो पर शशांक द्वारा लगाए गए आरोप पर उनको सफाई देने का मौका नहीं दिया गया. दूसरा मिजो लोगों का यह मानना कि शशांक राज्य में सही चुनाव करने में सक्षम नहीं हैं. इसके अलावा एक स्थानीय मुद्दा ब्रू आदिवासियों का भी है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं. मूल रूप से ये आर्टिकल News18 में प्रकाशित हुई है. पूरी खबर पड़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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