दुनिया में पहली बार लाउडस्पीकर पर इस मस्जिद से गूंजी थी अजान

दुनिया में पहली बार लाउडस्पीकर पर इस मस्जिद से गूंजी थी अजान
सुल्तान मस्जिद या मस्जिद सुल्तान सिंगापुर के रोशोर जिले में मौजूद है.

लाउडस्पीकर (Loudspeaker) का आविष्कार 20वीं सदी (20th Century) की शुरुआत में हुआ था. और फिर इस आविष्कार के बाद लाउडस्पीकर्स को मस्जिदों तक पहुंचने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 9:54 PM IST
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उत्तर प्रदेश में रमजान के दौरान के अजान पर बैन की अफवाहें भारतीय सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं. अफवाहों के वशीभूत हो लोगों ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ ट्वीट करना शुरू कर दिया. ट्वीट करने वालों में पूर्व राज्यसभा सांसद और पत्रकार शाहिद सिद्दीकी भी थे. राज्य सरकार की तरफ से ऐसी अफवाहों का खंडन किया गया है. कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गु्प्ता नंदी ने कहा है कि राज्य सरकार ने ऐसी कोई रोक नहीं लगाई है.

दरअसल ये खबरें गाजीपुर डीएम के एक फैसले के बाद फैलीं जिसके तहत जिले में अजान पर रोक लगा दी गई. डीएम का कहना है कि सरकार की तरफ से अजान को लेकर कोई आदेश नहीं हैं, अगर आएगा तो हम शुरू करा देंगे. इस पर यूपी मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि सरकार की तरफ से अजान रोकने का कोई फरमान नहीं है, डीएम के फैसले की जांच की जाएगी.

इस दौरान सोशल मीडिया पर अजान में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी ट्वीट हुए. कई लोगों ने विभिन्न देशों के अजान के वीडियो के ट्वीट किए. दरअसल लाउडस्पीकर से अजान दिए जाने का प्रचलन तकरीबन एक सदी पुराना है. मकसद ये था कि सुबह के समय में अजान की आवाज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जा सके.





लाउडस्पीकर का आविष्कार 20वीं सदी की शुरुआत में हुआ था. और फिर इस आविष्कार के बाद लाउडस्पीकर्स को मस्जिदों तक पहुंचने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगा. ब्रायन विंटर्स की किताब The Bishop, the Mullah, and the Smartphone: The Journey of Two Religions into the Digital Age के मुताबिक दुनिया में पहली बार अजान के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल सिंगापुर की सुल्तान मस्जिद में किया गया था. ये करीब 1936 की बात है. तब वहां के अखबारों में खबरें छपी थी कि लाउडस्पीकर से अजान की आवाज 1 मील तक जा सकेगी.

हालांकि तब इस नई तकनीक के इस्तेमाल का विरोध मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले कुछ लोगों ने किया था. लेकिन कई लोगों का मानना था कि शहर में बढ़ते शोर के बीच अजान की आवाज ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगी. कुछ लोगों ने इसे बेहतर कदम माना तो कुछ ने विरोध किया. लाउडस्पीकर पर अजान दिए जाने के नियम अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं. जैसे तुर्की और मोरक्को जैसे देशों में शायद ही कोई मस्जिद हो जहां लाउडस्पीकर से अजान दी जाती हो. जबकि निदरलैंड में महज सात से आठ प्रतिशत मस्जिदों में लाउडस्पीकर के जरिए अजान दी जाती है.

सुल्तान मस्जिद


सिंगापुर का राष्ट्रीय स्मारक
सुल्तान मस्जिद या मस्जिद सुल्तान सिंगापुर के रोशोर जिले में मौजूद है. इसका नाम सुल्तान हुसैन शाह के नाम पर रखा गया था. 1975 में इस मस्जिद को देश का राष्ट्रीय स्मारक भी घोषित किया गया था. इस मस्जिद को बनाने की शुरुआत तो 19वीं सदी में ही की जा चुकी थी लेकिन इसका निर्माण कार्य 1932 में पूरा हुआ था. निर्माण के बाद मस्जिद में छोटे-मोटे जीर्णोद्धार के अलावा कोई बड़ा काम नहीं कराया गया है. ये कला और स्थापत्य का शानदार नमूना है.

कानूनी पक्ष
दुनिया में कई देशों में अजान की सीमाएं तय की गई हैं इनमें निदरलैंड, जर्मनी, स्वित्जरलैंड, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रिया, नॉर्वे और बेल्जियम जैसे देश शामिल हैं. लाओस और नाइजीरिया जैसे देशों ने स्वघोषित रूप से भी अजान की या तो सीमाएं तय की हैं या फिर प्रतिबंधित किया है.

लाउडस्पीकर पर विवाद
हाल के सालों में अजान को लेकर सबसे तीखा विरोध जर्मनी में देखने को मिला था. दरअसल यहां पर तैयार की जा Cologne Central Mosque के कंस्ट्रक्शन के दौरान ही आस-पास के लोगों ने अजान को लेकर शिकायत की थी. लोगों ने कहा कि मस्जिद के निर्माण के बाद यहां अजान दी जाएगी जिससे दिक्कतें होंगी. बाद में प्रशासन ने मस्जिद बनाने की छूट इसी बात पर दी कि इसमें लाउडस्पीकर के जरिए अजान नहीं दी जाएगी. इंडोनेशिया में अजान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था.



दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिमों की जनसंख्या वाले इस देश में एक महिला ने अजान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर शिकायत की थी. इसके बाद उसे ईशनिंदा में 18 महीने की सजा भुगतनी पड़ी थी. गुस्साई भीड़ ने 14 बौद्ध मंदिरों में आग लगा दी थी. बड़ी घटना पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने मस्जिदों में अजान के इस्तेमाल पर दिशानिर्देश जारी किए थे.

भारत में भी इसे लेकर लंबी बहस चलती रही है. मशहूर गायक सोनू निगम ने भी अजान को लेकर एक ट्वीट किया था जिसके बाद काफी हंगामा हो गया था. बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण दिया था कि उनकी बातें सुबह में बजने वाले लाउडस्पीकर के लिए थीं चाहे वह मंदिर हो या मस्जिद.

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