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इस औरत की वजह से शुरू हुआ था #metoo मूवमेंट

इन्होंने की थी #metoo की शुरुआत

इन्होंने की थी #metoo की शुरुआत

यह समझना कि यह मजबूत आंदोलन #metoo 2017 में शुरू हुआ गलत होगा. इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी साल 2006 में एक महिला के प्रय ...अधिक पढ़ें

    बीते एक साल में एक नए आंदोलन ने पूरी दुनिया को एकसाथ खड़ा कर दिया है. ये है #metoo आंदोलन. अक्टूबर 2017 में इस आंदोलन ने हॉलीवुड में जोर पकड़ा और हॉलीवुड के सबसे बड़े प्रोड्यूसर हार्वी विंस्टीन के खिलाफ 20 से ज्यादा एक्ट्रेसेज सामने आईं. इन सभी एक्ट्रेसेज ने बताया कि जब उन्होंने हार्वी के साथ काम किया था तब हार्वी ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था. इसके बाद एक के बाद हॉलीवुड के कई बड़े नाम यौन शोषण के आरोपी के रूप में सामने आए. इसमें केविन स्पेसी जैसे बड़े एक्टर का नाम भी शामिल था. इस आंदोलन की पहली आधिकारिक सालगिरह के आस-पास भारत में भी यह मूवमेंट जोर पकड़ रहा है.

    भारत में यह मूवमेंट शुरू हुआ तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के मामले से. तनुश्री दत्ता ने 2008 में नाना पाटेकर पर इल्जाम लगाया था कि फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ की शूटिंग के दौरान नाना ने उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश की थी. तनुश्री ने यह भी कहा कि इसके लिए नाना ने डांस कोरियोग्राफर गणेश आचार्य के साथ मिलकर भड़काऊ और अश्लील स्टेप भी ऐड करवाए थे. इसके बाद सोशल मीडिया पर महिलाओं ने खुलकर बोलना शुरू कर दिया है. बीते एक हफ्ते में बहुत सी ज्ञात और अज्ञात महिलाओं ने कई बड़े नामों वाले पुरुषों को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

    भारतीय #metoo मूवमेंट में कई बड़े नाम सामने आए हैं. इनमें प्रोड्यूसर विकास बहल, एक्टर आलोकनाथ, गायक कैलाश खेर, कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती, तन्मय भट्ट, गुरसिमरन खम्बा, लेखक और कॉमेडियन वरुण ग्रोवर, लेखक चेतन भगत और केंद्रीय मंत्री एम जे अख्तर के नाम मुख्य रूप से शामिल हैं. इस लिस्ट ने कॉमेडी, फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री को बुरी तरह से हिला दिया है और उम्मीद की जा रही है आगे भी लड़कियां इसी हिम्मत से अपने साथ हुई घटनाओं के जिक्र से ऐसे लोगों का पर्दाफाश करती रहेंगी.

    लेकिन यह समझना कि यह मजबूत आंदोलन #metoo 2017 में शुरू हुआ गलत होगा. इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी साल 2006 में एक महिला के प्रयासों से. कौन थी वो महिला और कैसे शुरू हुआ यह #metoo आंदोलन?

    एक दशक से भी पुराना है यह #metoo आंदोलन:
    सोशल मीडिया के सबसे बड़े और पूरी दुनिया में फ़ैले आंदोलनों में शामिल #metoo एक औरत की अथक मेहनत का नतीजा है. इस महिला का नाम है टराना बर्क. टराना अश्वेत लड़कियों और महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली वकील और एक्टिविस्ट हैं.

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    दुनिया की बहुत सी महिलाओं की तरह टराना खुद भी सेक्सुअल हैरेसमेंट का शिकार हुई थीं. उन्होंने एक अखबार को बताया था कि जब वो सिर्फ 6 साल की थीं तो उनके पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने उनके साथ गंभीर छेड़छाड़ की थी. इसके बाद जब वो बड़ी हुई तो उनके साथ बलात्कार हुआ था. इन्हीं वजहों से बर्क को पता था कि इन घटनाओं का कैसा असर किसी भी महिला पर पड़ता है. उनका मानना है कि अश्वेत महिलाओं के खिलाफ उनके देश में बहुत अमानवीय व्यवहार आज भी होते हैं. इसीलिए उन्होंने ऐसी लड़कियों और महिलाओं को इस सदमे से उबारने की दिशा में मदद शुरू की.

    कैसे शुरू हुआ #metoo:
    टराना बर्क का कहना है कि उन्होंने 2006 में इस आंदोलन की शुरुआत की थी. वो इस आंदोलन के जरिए छोटी उम्र की अश्वेत महिलाओं को न्याय दिलवाना चाहती थीं. उस दौर में मायस्पेस नाम का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्टिव था. बर्क ने उसी प्लेटफॉर्म पर ये हैशटैग उन महिलाओं को एकजुट करने के लिए बनाया था.

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    2017 में जब एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने इसे पहली बार प्रयोग किया था तो लोग उन्हें इस हैशटैग की अविष्कारक मानने लगे. लेकिन ऐसे में टराना ने खुद अपना एक पुराना वीडियो ट्वीट किया जिसमें उन्होंने इस शब्द का प्रयोग एलिसा से कई साल पहले किया था. ऐसा उन्होंने किसी आपसी लड़ाई के लिए नहीं बल्कि इसलिए किया था ताकि लोगों को इसके पीछे की मेहनत भी नजर आए.




    किस घटना ने करवाई #metoo की शुरुआत:
    यह घटना एक छोटी सी लड़की के साथ हुई थी जिसका नाम था हेवन. एक कैंप में टराना लोगों से मिलने गई थीं जहां उन्हें हेवन मिली. लेकिन हेवन का व्यवहार बहुत चीखने चिल्लाने वाला था. जब टराना ने उससे बात की तो पता चला की उस बच्ची की मां का बॉयफ्रेंड उसका यौन उत्पीड़न कर रहा था. इस घटना और दर्द ने बर्क को तोड़ दिया. इस बात को सुनकर उनके जेहन में दो ही शब्द उभरे, ‘मैं भी’, ‘मी टू’. बस यहीं से उन्होंने सोशल मीडिया पर एक हैशटैग बनाया और अपने काम में जुट गईं.

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    Tags: Child sexual abuse, Child sexual harassment, Crime Against Child, Me Too

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