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टाइटेनियम से भी ज्यादा मजबूत इस लकड़ी को गोली भी नहीं भेद सकती!

News18Hindi
Updated: October 19, 2019, 2:07 PM IST
टाइटेनियम से भी ज्यादा मजबूत इस लकड़ी को गोली भी नहीं भेद सकती!
वैज्ञानिकों ने एक सुपरवुड बनाया है, जिसको गोली भी नहीं भेद सकती है.

सुपरवुड (Superwood) का उत्पादन करना लगभग कागज के उत्पादन करने जैसा ही आसान है. वहीं इसकी मजबूती स्टील और आधुनिक टाइटेनियम से भी अधिक है. यह मजबूत धातुओं की अपेक्षा काफी हल्का है.

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  • Last Updated: October 19, 2019, 2:07 PM IST
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नई दिल्ली.  एक निर्माण सामग्री (Construction material) के रूप में लकड़ी का प्रयोग (Using wood) हम मनुष्य बहुत पहले से प्रयोग करते आ रहे हैं. जहांतक की देश के महान सम्राट अशोक का महल भी लकड़ी का बनाया गया था. जिसकी सुंदरता की तारीफ तीसरी शताब्दी के चीनी यात्री फाह्यन ने भी किया था. उन्होंने कहा था, ‘ सम्राट अशोक का महल इतना सुंदर है कि उसे बनाना मनुष्यों के लिए संभव नहीं है. इस महल को तो साक्षात राक्षसों ने बनाया है.’

हालांकि वर्तमान समय में कंक्रीट, संगमरमर और स्टील ने लकड़ी का स्थान ले लिया है. क्यों की लकड़ी इन चीजों की तुलना में कमजोर है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक सुपरवुड बनाई है. ये सुपरवुड इतनी मजबूत है कि बंदूक की गोली को भी रोक सकती है.

सुपरवुड कंक्रीट, संगमरमर और स्टील से ज्यादा मजबूत है.


लकड़ी की इंजीनियरिंग है सुपरवुड

ऐसा नहीं है कि यह सुपरवुड दुनिया की पहली इंजीनियरिंग लकड़ी है. प्लाईवुड, फाइबरबोर्ड और पार्टिकलबोर्ड सभी को लकड़ी के छोटे टुकड़ों से मिलाकर बनाया जाता है. गौरतलब है कि इनमें से अबतक प्लाईवुड सबसे मजबूत होती है. क्योंकि इसे कई पतली परतों को मिलाकर बनाया जाता है. लेकिन यह प्लाईवुड इतनी मजबूत नहीं होती कि यह गोली को रोक सके. इसके लिए तो सुपरवुड की आवश्यकता होगी.

सुपरवुड को बनाना सस्ता और आसान
इस लकड़ी को बनाना आश्चर्यजनक रूप से आसान और सस्ता था. सुपरवुड को भी कई तरह की रासायनिक क्रियाओं के द्वारा बनाया जाता है. निर्माण की शुरूवात में पहले लकड़ी को सोडियम हाइड्रोक्साइड और सोडियम सल्फाइट के घोल में उबाला जाता है. यह रासायनिक घोल लकड़ी के लिग्निन और हेमिकेलुलोज को हटा देता है. जिसके कारण लकड़ी की कोशिकाओं की दीवारें सख्त हो जाती हैं. यह प्रक्रिया ठीक वैसे ही है, जैसे कागज बनाया जाता है. दरअसल पॉलिमर को हटाना अल्ट्रा-मजबूत लकड़ी बनाने की कुंजी है.
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लकड़ी को सोडियम हाइड्रोक्साइड और सोडियम सल्फाइट के घोल में उबाला जाता है.


सुपरवुड बनाने के लिए लकड़ी की कंप्रेसिंग
सुपरवुड बनाने की अगली प्रक्रिया कंप्रेसिंग शुरू करना है. जिसके द्वारा लकड़ी की सेल की दीवारों को हटाने के लिए लकड़ी को पर्याप्त दबाव में गरम किया जाता है. जिससे लकड़ी की सेल की दीवारों से सेल्यूलोज के हाइड्रोजन के परमाणु अपने पड़ोसी परमाणुओं के साथ मजबूती से रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बंधने लगते हैं और लकड़ी घनीभूत होकर कहीं ज्यादा मजबूत  जाती है.

कंप्रेस लकड़ी अपने पहले की स्थित से 20 गुना अधिक सख्त हो जाती है. इसको तोड़ना पहले की अपेक्षा 10 गुना अधिक कठिन हो जाता और इसकी प्रतिरोधक क्षमता में 50 गुना की बढ़ोतरी हो जाती है. यह सुपरवुड न केवल स्टील से ज्यादा मजबूत होती है, बल्कि आधुनिक टाइटेनियम मिश्र धातुओं से भी अधिक मजबूत होती है.

सुपरवुड की प्रतिरोधक क्षमता सामन्य लकड़ी से 50 गुना अधिक होती है.


सुपरवुड का भविष्य स्पष्ट है


इस सुपरवुड का इस्तेमाल हम कई तरह से कर सकते हैं. दरअसल सुपरवुड का उत्पादन करना लगभग कागज के उत्पादन करने जैसा आसान है. वहीं इसकी मजबूती स्टील और आधुनिक टाइटेनियम से भी अधिक है. इतना ही नही यह अपने जैसे मजबूत धातुओं की अपेक्षा काफी हल्का है. सुपरवुड की प्रतिरोधक क्षमता स्टील से अधिक होने और उससे हल्का होने के कारण बॉडी आर्मर बनाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त सुपरवुड का इस्तेमाल गाड़ियों और ईमारतों के निर्माण में भी किया जा सकता है.

बता दें कि इमारतों और सड़कों के निर्माण में बड़े पैमाने पर कंक्रीट का इस्तेमाल होने के चलते ग्रेनाइट के बड़े-बड़े पहाड़ों को समाप्त किया जा रहा है. जिसके कारण पर्यावरणीय संकट काफी जटिल हो गई है. साथ ही प्लास्टिक के बड़े पैमाने में होने वाले प्रयोग से भी बचा जा सकता है. इस सुपरवुड का उत्पादन लकड़ी से होने के चलते इसका इस्तेमाल से पर्यावरण के प्रदूषण को कम किया जा सकता है. सुपरवुड से हल्के फ्रेम भी बनाए जा सकते हैं.

भविष्य में घरों का निर्माण सुपरवुड के हो सकता है.


बॉडी आर्मर बनाने में केवलर सिंथेटिक फाइबर का इस्तेमाल
गौरतलब है कि अभी बॉडी आर्मर बनाने के लिए केवलर नामक सिंथेटिक फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि सुपरवुड केवलर जैसा मजबूत तो नहीं है लेकिन उसकी अपेक्षा 20 गुना सस्ता है. बता दें कि केवलर एक उच्च तापरोधी और मजबूत सिंथेटिक फाइबर है. जिसकी विकास स्टेफ़नी कॉवेल द्वारा 1965 में किया गया था. इसका पहला प्रयोग 1970 में किया गया था.

बहुत कुछ है जो हम एक पदार्थ के साथ कर सकते हैं जो कागज के रूप में उत्पादन करने के लिए लगभग आसान और आसान है, टाइटेनियम से अधिक मजबूत है, और बूट करने के लिए हल्का है. यहाँ एक विचार है: शरीर कवच. सुपर लकड़ी केवलर के रूप में काफी मजबूत नहीं है, लेकिन यह लगभग 20 गुना सस्ता है.

सुपरवुड के इस्तेमाल से प्रदूषण को कम किया जा सकता है.


कारों के निर्माण में सुपरवुड का हो सकता है इस्तेमाल
सुपरवुड कारों और अन्य वाहनों के निर्माण के लिए भी एक पसंदीदा बन सकता है क्योंकि यह प्लास्टिक की कीमत या पर्यावरणीय प्रभाव के बाद वृद्धि के बिना हल्के फ्रेम के ईंधन-कुशल लाभ प्रदान कर सकता है. हालांकि इस सुपरवुड के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. इस लकड़ी की अविश्वसनीय ताकत और कठोरता का रिसर्च अभी अपने आरम्भिक चरण में है.

बता दें कि इस लकड़ी की शोधकर्ता लिआंगिंग हुं क्षमता से ही ज्यादा क्रांतिकारी रहीं हैं. 2016 में  उसने लकड़ी के रंग को हटाकर उसे मिथाइल मिथाइरीलेट के साथ एक बहुलक में बदल दिया. जिसे प्लैक्सी ग्लास के रूप में जाना जाता है. दरअसल यह एक पारदर्शी लकड़ी है. जिसका इस्तेमाल भविष्य में विंडशील्ड के तौर पर हो सकता है. साथ ही यह भी संभव है  कि आने वाले समय में कार में केवल लकड़ी का फ्रेम ही न हो, बल्कि उसकी विंडशील्ड भी लकड़ी की हो.

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First published: October 19, 2019, 2:06 PM IST
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