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कोरोना काल में कैसे चलेगी संसद? मानसून सूत्र के लिए इन तरीकों पर चल रहा विचार

रेलवे के पास था संसद की कैंटीन का टेंडर

रेलवे के पास था संसद की कैंटीन का टेंडर

लोकसभा (Loksabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) में आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) के आयोजन को लेकर विचार विमर्श हो रहा है. इस बाबत राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ( M Venkaiah naidu) और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने बैठक भी बुलाई थी.

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    नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) के कारण उत्पन्न स्थिति के कारण संसद (Indian Parliament) के नियमित सत्र के आयोजन पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को पालन करते हुए सभी सांसदों को समाहित करने के लिये किसी भी सरकारी इमारत की क्षमता को पर्याप्त नहीं पाया जा रहा है. उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह जानकारी दी .

    सूत्रों ने बताया कि न तो संसद के केंद्रीय कक्ष और न ही विज्ञान भवन का हॉल में कम से कम एक मीटर की दूरी बनाये रखते हुए सभी सांसदों को बैठाने के लिये स्थान है. माना जा रहा है कि दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी संसद के वर्चुअल सत्र या हाइब्रिड सत्र आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं .

    हाइब्रिड सत्र के तहत कुछ सांसद तो संसद में स्वयं उपस्थित रहते हैं जबकि शेष सांसद वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेते हैं . सूत्रों ने बताया कि एक ऐसे भी विकल्प पर विचार किया जा रहा है कि सामाजिक दूरी के मानकों का पालन करते हुए ऐसे सदस्यों की सूची तैयार की जाए जिनकी सदन के कामकाज के विभिन्न विषयों में दैनिक आधार पर जरूरत है .

    नायडू और बिरला ने बुलाई बैठक
    संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2020) आमतौर पर जुलाई महीने में आयोजित किया जाता है . राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ( M Venkaiah Naidu) और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) द्वारा बुलाई गई बैठक के बारे में माना जा रहा है कि दोनों सदनों के महासचिवों ने पीठासीन अधिकारियों को बताया कि न तो संसद का केंद्रीय कक्ष (Central Hall Of Parliament) और न ही विज्ञान भवन (Vigyan Bahwan) के हॉल में इतनी क्षमता है कि इस स्थिति में सभी सांसद वहां एक साथ बैठ सकें.

    यह बैठक संसद के आगामी मानसून सत्र आयोजित करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के लिये बुलाई गई थी. नायडू और बिरला को जानकारी देते हुए महासचिवों ने दोनों सदनों के चैम्बरों, संसद के केंद्रीय कक्ष और विज्ञान भवन के हॉल की बैठक की क्षमता के मूल्यांकन के परिणामों की जानकारी दी .

    उन्हें बताया गया कि सामाजिक दूरी के मानदंडों को पूरा करते हुए राज्यसभा के चैम्बर में 60 सदस्यों को बैठने की व्यवस्था की जा सकती है जबकि लोकसभा के चैम्बर और केंद्रीय कक्ष 100 से अधिक सांसदों के बैठने की व्यवस्था के लिये पर्याप्त होगा. उन्होंने कहा कि अगर सदस्यों के बैठने की व्यवस्था गैलरी में की जाए, तब भी जरूरी सीट से कम की व्यवस्था हो पाएगी .

    नायडू और बिरला ने दो शीर्ष अधिकारियों को कहा कि वे दोनों सदनों की कार्यवाही में सदस्यों के हिस्सा लेने के लिये वर्चुअल तरीके से व्यवस्था करने से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा करें . इसमें वर्चुअल तरीके से सदस्यों के हिस्सा लेने से जुड़े़ विषय शामिल हैं और जो दोनों सदनों के कामकाज के नियमों एवं तकनीकी पहलुओं के अनुरूप हों . संसदीय समितियों की वर्चुअल बैठकों के संबंध में कहा गया कि ऐसी बैठकों के संबंध में नियमों में बदलाव के लिये संसद के दोनों सदनों में एक प्रस्ताव लाना जरूरी होगा .

    सांसद वोटिंग कैसे करेंगे?
    लोकसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ सांसदों को हाइब्रिड योजना में ऑनलाइन आने का अनुरोध करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि लगभग सभी सांसद सदन में आना पसंद करेंगे. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने कहा- 'अगर सरकार कोई विवादास्पद बिल लाती है, या भारतीय अर्थव्यवस्था के कोविड  प्रबंधन जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तो क्या आपको लगता है कि विपक्षी सांसद कार्यवाही को ऑनलाइन देखेंगे? अगर किसी विधेयक पर मतदान होता है, तो सांसद कैसे भाग लेंगे?'

    भारतीय संसद के दो पूर्व अधिकारियों ने कहा कि सरकार को कोविड कर्व के फ्लैट होने ने का इंतजार करना चाहिए और उसके बाद ही  सत्र आयोजित करने के बारे में सोचना चाहिए. उनमें से एक ने बताया कि भारतीय संविधान पिछले सत्र के अंतिम दिन और अगले संसद के पहले दिन के बीच छह महीने का अंतर रखने की अनुमति देता है. उन्होंने कहा कि 'सरकार के पास मानसून सत्र आयोजित करने के लिए सितंबर तक का पर्याप्त समय है.' (भाषा इनपुट के साथ)

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