पाकिस्तान में 09 प्रिंसले स्टेट ने विलय के मसले पर जिन्ना को पिला दिया था पानी

पाकिस्तान में 09 प्रिंसले स्टेट ने विलय के मसले पर जिन्ना को पिला दिया था पानी
पाकिस्तान में बहावलपुर प्रिंसले स्टेट के नवाब सादिक ने 15 अगस्त 1947 को खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया

भारत (India) ने जहां 15 अगस्त 1947 से पहले 562 प्रिंसले स्टेट्स का देश में विलय (Accession of more then 560 princely states) कर लिया था तो वहीं पाकिस्तान (Pakistan) की हालत इस मामले में बहुत पतली थी. उसे 09 बड़ी रियासतों का विलय करना था लेकिन हर रियासत ने उसे पानी पिलाकर रख दिया. पाकिस्तान में ये प्रक्रिया 1955 तक चलती रही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 5:09 PM IST
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अगर आप 15 अगस्त 1947 के पाकिस्तान (Size of Pakistan on 15 august 1947) पर गौर करेंगे तो मौजूदा पाकिस्तान (Present Pakistan)  की तुलना में कहीं ज्यादा छोटा था. अगर इस तारीख तक सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabh Bhai Patel) 560 से ज्यादा रियासतों का विलय (Accession of more then 560 princely states) भारत में कर चुके थे तो जिन्ना एक भी प्रिंसले स्टेट को पाकिस्तान में नहीं मिला पाए थे. इस मामले में उनका खाता शून्य था.

पाकिस्तान की भौगोलिक सीमा या उससे लगती हुई सीमा के साथ 09 प्रिंसले स्टेट थे. जो उस समय पाकिस्तान के उस हिस्से में थे, जो बंटवारे के बाद पश्चिम में था.

अपनी किताब "द सोल स्पोक्समैन" में इतिहासकार आएशा जलाल लिखती हैं, "जिन्ना को पाकिस्तान के नाम पर जो टुकड़ा मिला था, वो उससे संतुष्ट थे. किताब के अनुसार उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा, अगर उन्हें सिंध के रेगिस्तान में भी कुछ और जमीन भी मिल जाती तो वो इसे मुस्लिमों का देश मानकर संतुष्ट हो जाते. उन्हें हिंदू बहुल आजाद भारत के इलाके नहीं चाहिए." हालांकि हकीकत तो कुछ और ही बयां करती है.



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जो बात सामने नजर आती है, उसमें तो लगता है कि जिन्ना भारत के उन राज्यों को भी पाकिस्तान में मिलाने के लिए उतावले हुए जा रहे थे, जो ना केवल भारत के भौगोलिक सीमा में आते थे बल्कि जहां हिंदू आबादी बहुसंख्यक थी. हालांकि इस कोशिश में जिन्ना ने हर बार मुंह की खाई.

ये बहावलपुर के नवाब का शानदार आवास है नूर मंजिल, अब भी नवाब के उत्तराधिकारी इसी में रहते हैं. बहावलपुर के नवाब ने जिन्ना के जीते-जी पाकिस्तान में विलय नहीं किया था


तब पाकिस्तान का आकार आज से आधा ही था क्योंकि
जब पाकिस्तान हकीकत बन गया तो हर कोई ये जानने में उत्सुक हो सकता है कि मौजूदा पाकिस्तान का क्षेत्रफल क्या उतना ही है, जितना आजादी के समय बंटवारे के दौरान उसके हिस्से में आया था. जवाब ये है कि तब पाकिस्तान का आकार आज के मुल्क के आधे से भी कम था.

किसी भी प्रिंसले स्टेट का विलय नहीं करा पाए थे जिन्ना
एशियन वायस वेबसाइट में अपने लेख "द साइज ऑफ वेस्ट पाकिस्तान ऑन 15 अगस्त 1947"  में हरि देसाई ने लिखा है लाहौर के इतिहासकार याकूब खान बंगेश बताते हैं कि पाकिस्तान में 1947 में शायद ही किसी प्रिंसले स्टेट का इसमें विलय हुआ हो बल्कि विलय की प्रक्रिया पाकिस्तान में बहुत लंबे समय तक यानि आजादी के बाद 08 सालों तक चलती रही.

पाकिस्तान को 09 प्रिंसले स्टेट को मिलाना ही मुश्किल हो गया
हालांकि पाकिस्तान ने आजादी के पहले ही अपने यहां के 09 प्रिंसले स्टेट को मनाना, बातचीत करना, समझाना. धमकी देना आदि शुरू कर दिया था. इसके बाद भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा. इसके बाद विलय के लिए एक लंबी प्रक्रिया चली.

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पहली रियासत जिसका पाक में विलय हुआ
पहली रियासत जिसका विलय पाकिस्तान में हुआ, वो खैरपुर स्टेट थी. जो सिंध राज्य में आती थी. ये विलय 03 अक्टूबर 1947 को हुआ. हालांकि इससे पहले जूनागढ़ को फुसलाने के लिए जिन्ना ने बहुत कोशिश की थी. वहां के नवाब ने विलय पत्र पर साइन करके जिन्ना के पास भेज भी दिया था लेकिन वहां की बहुसंख्य हिंदू आबादी इसके खिलाफ थी. वहां जनमत हुआ और जूनागढ़ भारत में मिल गया.
एक और बड़े राज्य कालत, जो अब बलूचिस्तान के केंद्र के तौर पर दुनियाभर में जाना जाता है. उसने विलय पर 27 मार्च 1948 को हस्ताक्षर किए. बहावलपुर प्रिंसले स्टेट ने विलय पत्र पर 17 दिसंबर 1954 पर मुहर लगाई.

बहावलपुर ने खुद को आजाद घोषित कर दिया
बहावलपुर के नवाब सादिक मोहम्मद खान ने तो 15 अगस्त 1947 को खुद को आजाद घोषित कर दिया. अगले 07 सालों तक ये रियासत स्वतंत्र ही रही. यहां पाकिस्तान का कोई दखल नहीं था. ना ही वो पाकिस्तान के हुक्मरानों की किसी भी बात की परवाह करते थे.


स्वात के वली मिंगुल अब्दुल वदूद विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए. ये विलय भी 1947 में आखिर में हुआ.


बाकि राज्यों ने जमकर परेशान किया
अन्य चार सीमांत प्रांतों चित्रल, धीर, स्वात और अंब सबसे पिछले और ट्राइब राज्य थे. हुंजा औऱ नागर के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होने पर विवाद था. भारत में सरदार पटेल को सक्षम आईसीएस अफसर वीपी मेनन से पूरी मदद मिल रही थी और वो घूम-घूमकर तकरीबन सभी रियासतों का विलय 15 अगस्त 1947 तक करा चुके थे. 565 रियासतों में ज्यादातर का भारत में विलय हो चुका था.

जिन्ना समझाते में रहे नाकाम 
वहीं पाकिस्तान ने 14 अगस्त 1947 को अपनी आजादी का पहला दिन जब मनाया तो उनके अफसर, सैन्य अफसर और नेता इस मामले में कुछ नहीं कर पाए थे. बार-बार की कोशिश के बाद भी कायदे आजम इन 09 प्रिंसले स्टेट को समझा नहीं पाए थे कि वो पाकिस्तान में मिल जाएं.

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भारत में क्या स्थिति थी
बेशक तीन राज्यों ने विलय के मामले में पटेल के सामने दिक्कत पेश की. ये थे जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद. लेकिन ये भी भारत की झोली में बाद में आ ही गिरे. जूनागढ़ की जनता ने अगर जनमत परीक्षण में भारत के विलय पर भारी मतों से मुहर लगाई तो पाकिस्तान को वहां 92 वोट मिले. पाकिस्तान ने कोशिश की कि जूनागढ़ के विलय पत्र को बतौर साइन संयुक्त राष्ट्र संघ या अन्य प्लेटफॉर्मों पर पेश करे लेकिन इसको किसी ने गंभीरता से लिया ही नहीं. पाकिस्तान को बुरी तरह पटखनी मिली.

विलय के मसले पर जिन्ना को हमेशा नाकाम नेता के तौर पर याद किया जाएगा. उन्होंने भारतीय रियासतों पर नजर गड़ाकर उन्हें भड़काने का काम किया, उसमें तो वो औंधे मुंह गिरे ही साथ ही अपने देश में भी किसी भी प्रिंसले स्टेट ने उनकी बातों की परवाह नहीं की


जिन्ना की चालबाजियां उन्हें ले डूबीं
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और जिन्ना की चालबाजियां उन्हें ले डूबीं. तो हैदराबाद में पटेल ने सेना भेजकर उसका विलय भारतीय संघ में करा लिया. वो मामला भी संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाने की पाकिस्तान की कोशिश औंधे मुंह गिरी. आपरेशन पोलो नाम के पांच दिन आपरेशन ने हैदराबाद के निजाम की जिन्ना के लय पर थिरकने की जमीन की सरका दी. हैदराबाद 17 सितंबर 1948 को भारत में मिला.

नाममात्र का प्रिवीपर्स 
वहीं पाकिस्तान किसी तरह जिन 09 प्रिंसले स्टेट को खुद में मिलाया भी तो वहां ना केवल असंतोष रहता है बल्कि राजाओं और नवाबों को प्रिवीपर्स के तौर पर इतना कम धन मिलता है कि वो नाराज रहते हैं. ये रकम पाकिस्तान ने वर्ष 2017 में 25,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपए सालाना कर दी लेकिन ये अब भी उन्हें पूरी तरह नहीं मिल रही है.
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