गगनचुंबी इमारतों के शीर्ष पर तेजी से गुजरता है समय, बहुत काम की है यह जानकारी

गगनचुंबी इमारतों के शीर्ष पर तेजी से गुजरता है समय, बहुत काम की है यह जानकारी
स्कायट्री जापान की सबसे ऊंची इमारत है.

गगनचुंबी इमारतों (Skyscraoers) के शीर्ष पर समय कुछ नैनोसेकंड (Nanoseconds) ज्यादा तेजी से गुजरता है. यह जानकारी बहुत उपयोगी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 6:55 PM IST
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नई दिल्ली: समय पिछले करीब 100 सालों से वैज्ञानिकों के लिए एक अगल ही तरह का शोध विषय बना हुआ है. महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein)  ने तो समय को एक आयाम तक का दर्जा दे डाला. समय को लेकर जापान के शोधकर्ताओं ने नई खोज की है. उन्होंने अपने अध्ययन में पाया है कि गगनचुंबी इमारतों (Skyscrapers)  के शीर्ष पर समय तेजी से गुजरता है.

कहां हुआ यह अध्ययन
टोक्यो यूनिवर्सिटी में हुए अध्ययन में पाया गया है कि गगनचुंबी और अन्य ऊंची इमारतों में समय बहुत ही अलग गति से चलता है. क्वांटम इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रोफेसर हिदेतोशी की टीम टोक्यो स्थित स्कायट्री पर चढ़ी और उन्होंने धरातल और बिल्डिंग के समय के अंतर का अध्ययन किया और पाया कि यह धरातल से चार नैनो सेकंड तेज चलता है.

सभी गगनचुंबी पर ऐसे ही मिलेंगे नतीजे
टोक्यो स्थिति स्कायट्री जापान की सबसे ऊंची बिल्डिंग है. इसकी ऊंचाई 2080 फीट है. इस  समय दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा मानी जाती है जिसकी ऊंचाई 2722 फीट है. शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका अध्ययन दुनिया की  सभी गगनचुंबी इमारतों पर समान तौर पर लागू हो सकता है.



वैज्ञानिकों ने इस अध्यन के लिए खास क्लॉक का उपयोग किया,( प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहली बार हुआ है इस तरह का अध्ययन
इससे पहले के शोधों ने पाया है कि समय पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर के हिस्से में तेजी से गुजरता है जहां पीपीएस उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं. लेकिन यह पहली बार है कि इस तरह का अध्ययन गंगनचुंबी इमारतों जैसी जगहों के लिए किया गया है को लोगों के लिए खुली रहती हैं.

आइंसटीन के सिद्धांत से समझा जा सकता है अंतर
शोध में बताया गया है कि यह अंतर आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत से समझा जा सकता है. इसके अनुसार समय का संबंध उस बिंदु पर गुरुत्व के बल यानि स्ट्रेंथ (Strength)  से है जहां से वह मापा जा रहा है. इसका प्रभाव अणु के न्यूक्लियस का चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉन की गति पर पड़ता है. इन इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा स्तर बदलने से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकरण निकलते हैं. इन्ही विकिरणों का उपयोग वैज्ञानिक समय को मापने के लिए उपयोग करते हैं.

खास उपकरण से नापा जा सकते हैं विकिरण
अलग अलग गुरुत्व के बलों में ये विकरण भी अलग हो जाए हैं. इन्हें एटॉमिक लैटिस क्लॉक्स नाम के उपकरणों से मापा जा सकता है. ये उपकरण विकिरण को मापने के लिए एक अति शीत वैक्यूम चेम्बर का उपयोग करते हैं. आमतौर पर ये उपकरण पूरे लैब के आकार के होते हैं, लेकिन काटोरी की टीम ने एक बड़े  फ्रिज के आकार का यह उपकरण बनाया और उसे स्कायट्री के शीर्ष पर ले गए.

 

बहुत मामूली लगते हैं नतीजे
इस क्लॉक या उपकरण में थोड़े बदलाव के बाद टीम अपने अध्ययन के जरूरी आंकड़े जुटा सकी. ऊपरी तौर पर काटोरी की टीम के अध्ययन के नतीजे अधिक उपयोगी नहीं लगते, लेकिन वे बहुत काम के हो सकते हैं.

क्या काम आ सकती है यह तकनीक और जानकारी
समय की गति की यह जानकारी भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का सटीक समय बताने में सहायक हो सकती है. काटोरी के मुताबिक भविष्य में अति संवेदनशील एटॉमिक लैटिस क्लॉक इसी तरह से विकिरण का मूल्यांकन कर भूकंप और ज्वालामुखियों की गतिविधियों का अध्ययन किया जा सकता है. इतना ही नहीं यह हवा में उड़ने वाले हवाई जहाजों की गति की सटीक जानकारी रखने में मददगार हो सकते हैं.

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