तेजी से हो सके कोरोना वैक्सीन ट्रायल, इसके लिए रूस में खास चूहे होंगे तैयार

तेजी से हो सके कोरोना वैक्सीन ट्रायल, इसके लिए रूस में खास चूहे होंगे तैयार
आम चूहों में ACE2 इंसानों के ACE2 से अलग होता है.

कोविड-19 (Covid-19) के लिए होने वाले ट्रायल के लिए सही जानवर हर जगह उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में रूसी वैज्ञानिकों ने अपनी ही लैब में उपयुक्त चूहे तैयार करने का काम शुरू कर दिया है.

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नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) के लिए सैकड़ों दवाइयों और वैक्सीन पर ट्रायल कई चरणों में चल रहा है. लेकिन उनके लिए हर जानवर पर ट्रायल नहीं हो सकता. रूसी वैज्ञानिक ऐसे चूहे (Mice) तैयार कर रहे हैं जिनमें कोविड-19 के लक्षण इंसान की तरह दिखें जिससे उन पर वैक्सीन और दवाओं का ट्रायल किया जा सके.

कहा हो रहा है यह काम
रूस में रशियन एकेडमी ऑफ साइंस एंड बेरगोरोड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक खास तौर पर सार्सकोव-2 संवेदनशील चूहे तैयार करने में लगे हैं. इस परिष्कृत चूहों में कोविड-19 के वैसे ही लक्षण दिखेंगे जैसे मानव में दिखाई देते हैं.

हर जानवर पर नहीं हो सकता ट्रायल
दरअसल हर प्राणी पर कोरोना वायरस अलग असर दिखाता है. कई जानवर तो इससे संक्रमित नहीं होते, होते हैं तो उनमें वे लक्षण नहीं दिखते जो इंसानों में दिख रहे हैं. यह विविधता तो इंसानों तक में दिखती है. ऐसे में ट्रायल उन्हीं जानवरों पर कारगर होगा जो इंसानों जैसे लक्षण दिखा सकें. इसके लिए रूसी वैज्ञानिक इस तरह के चूहों को तैयार करने की प्रक्रिया तय कर चुके हैं. इस प्रक्रिया को रिसर्च रिजल्ट एंड फार्मेकोलॉजी जर्नल में विस्तार से प्रकाशित किया गया है.



महामारी के चलते जानवर उपलब्ध भी नहीं हो रहे
एक तरफ पूरी दुनिया में ही तमाम शोधकार्यों से नई नई जानकारियां सामने आ रही हैं. इस जानकारी को अन्य सभी शोधकर्ताओं तक पहुंचाना भी एक चुनौती है. इनमें सबसे अहम है प्रीक्लीनकल ट्रायल के नतीजे सभी तक पहुंचना. इसके अलावा सभी प्रयोगशालाओं में क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए सार्सकोव-2 संवेदनशील जानवर भी नहीं होते. महामारी के चलते लॉकडाउन में ऐसे जानवरों को हासिल करना भी बहुत मुश्किल होता जा रहा है. इन्हीं मुश्किलों ने शोधकर्ताओं को यह शोध करने के लिए प्रेरित किया.

चूहे ही क्यों
दरअसल चूहे और इंसानी कोशिकाओं में काफी समानताएं होती हैं. चूहों की प्रतिरोधक क्षमता भी मनुष्यों की प्रतिरोधक क्षमता से मिलती है. ऐसे में जो दवा अगर चूहों में कारगर होती है तो उसके इंसानों में कारगर होने की भी काफी संभावना होती है. लेकिन फिर भी देखा गया है कि चूहों में सार्स कोव -2 होने की संभावना कम होती है.

Mice
बाकी जानवरों के मुकाबले चूहों की कोशिकाएं इंसान से मिलती जुलती होती है.


क्या होगी चूहे तैयार करने की प्रक्रिया
पहले चूहे को प्रयोगशाला में होने वाले रोजाना के तौर तरीकों से सुरक्षित किया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे जानवर प्रयोगशाला के कुछ निश्चित हालातों में ही संक्रमण के शिकार हो सकें. इससे उस प्रयोगशाला में काम कर रहे स्टाफ में कोविड-19 संक्रमण जोखिम को बहुत कम किया जाता है.

कैसे तैयार किए जाएंगे चूहे
इसके बाद चूहों में इंसानों की तरह ही कोविड-19 के लक्षण दिखें, इसके लिए उन्हें तैयार किया जाएगा. इससे वे चूहे नॉन क्लीनिकल ट्रायल के योग्य हो सकेंगे. शोधकर्ता चूहों में मानवीय ACE2 प्रोटीन का जीन डालेंगे जिससे चूहों में संक्रमण आसान हो जाए और वे इंसानों के लक्षण दिखा सकें. इतना ही नहीं शोधकर्ता ACE2 के अलावा TMPRSS2 का जींस भी चूहों में प्रविष्ट करेंगे. जिससे चूहों में उन लक्षणओं के दिखने की संभावना प्रबल हो जाएगी जो इंसानों में दिखाई देते हैं.

कब तक तैयार हो जाएंगे ऐसे चूहे
टीम को विश्वास है कि वह इस प्रक्रिया के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और उम्मीद है कि जून महीने की शुरुआत में ही उनके ये मॉडल चूहे तैयार हो जाएंगे. लेकिन रेस समय के साथ है. अब तक दुनिया में संक्रमित मरीजों की संख्या 40 लाख के पार हो चुकी है और दो लाख 70 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. वैक्सीन कारगर है या नहीं ये जांचने की प्रक्रिया को तेज करने में यह भी एक अहम कदम ही है.

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