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आज प्यार भरे स्पर्श की है और ज्यादा जरूरत, इसे खत्म करने पर आमादा है कोरोना

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 2:28 PM IST
आज प्यार भरे स्पर्श की है और ज्यादा जरूरत, इसे खत्म करने पर आमादा है कोरोना
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना युग में स्पर्श की जरूरत बढ़ गई है. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना वायरस (Corona virus) के खौफ के बीच बहुत से लोग सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) जैसे नियमों के अपने निकटजनों के स्पर्श (Touch) से वंचित हैं.

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नई दिल्ली:  बहुत साल पहले टीवी पर एक विज्ञापन आया करता था. इसमें मशहूर अदाकारा शबाना आजमी एड्स के बारे में जानकारी देते समय कहती दिखतीं हैं कि एड्स छूने से नहीं फैलता है. इसके बाद वे एक बीमार बच्ची का हाथ प्यार से थाम कर कहती हैं कि इससे प्यार फैलता है. लेकिन कोरोना वायरस (Corona virus) ने हमसे यह सुविधा भी छीन ली है. हम अपनों को भी नहीं छू सकते हैं, जबकि इस तनाव भरे माहौल में स्पर्श (Touch) की अहमियत और जरूरत बढ़ गई है.

कोरोना का एक असर यह भी है
कोरोना वायरस के तेज प्रसार ने हाथ मिलाने तक को पुराना कर दिया है. भारत जैसे देश जहां नमस्कार की संस्कृति पहले से ही है, वहां तो इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, लेकिन बहुत से पश्चिमी देशों में यह एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक झटका है. इन देशों में हाथ मिलना शिष्टाचार से बढ़कर सांस्कृतिक अंग था. लेकिन कोरोना वायरस के प्रसार ने पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक संकट तक खड़ा कर दिया है और वहां लोग प्रेम भर स्पर्श तक के लिए तरस रहे हैं

क्या महत्व है स्पर्श का



अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में स्पर्श को बहुत ही ज्यादा अहमियत दी जाती है. जहां भारतीय संस्कृति में निकटजनों से प्रेम की अभिव्यक्ति के बहुत से तरीके हैं, वहीं इन देशों में प्रेम की अभिव्यक्ति उतनी विस्तृत नहीं है. लेकिन इसकी अहमियत कहीं भी कम नहीं है. अमेरिका में लॉस एजिंलिस की कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी  के मनोविज्ञानी स्टीव कोल का कहना है कि स्पर्श अपनेपन का सबसे शक्तिशाली सुरक्षा संकेत है.



अमेरिका में हो रहा है बड़ा संकट
अमेरिका में बहुत से लोग अकेले रहते हैं. कोरोना वायरस के कारण चल रहे लॉकडाउन के कारण ऐसे लगभग 3.5 करोड़ लोग अपने घरों में कैद हैं. ये लोग सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के निर्देशों को मानते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं. ऐसे में उनके लिए किसी को छूना बहुत ही दूर की बात हो गई है.

 social distancing,
लोगो कको एक दूसरे से छह फुट की दूरी बनाए रखनी पड़ रही है.


कितने गंभीर हैं यहां हालात
अकेले अमेरिका में अब तक कोविड-19 से 15 लाख 93 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण हो चुके है. इनमें से 11 लाख 27 हजार अब भी ठीक नहीं हुए हैं जबकि करीब 94 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. लोगों में यहां इस संक्रमण की वजह से खौफ का माहौल है. कोल का कहना है कि इस अकेलेपन में व्यक्ति ज्यादा असुरक्षित महसूस करता है. ऐसे में सुरक्षा संकेत इस तनाव को कम करने में मदद करते हैं.  इनमें प्रेम से छूने की क्रिया का अहम योगदान होता है.

कोरोना की वजह से बढ़ा है तनाव
तनाव हमारे शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है और किसी बीमारी का खौफ तनाव बढ़ा देता है. कोरोना के साथ समस्या यह है कि इसने तनाव तो दिया ही है , लेकिन तनाव कम करने के सामाजिक कारक छीन लिए हैं. बीमारी में लोगों का आपसे आपका हाल पूछना, आपकों आना आपको सहानुभूतिपूर्वक छूना आदि संकेत आपके तनाव कम करने मे मदद करते हैं, लेकिन इस माहौल में छूने का अभाव तनाव बढ़ा ही  रहा है.

क्या प्यार से छूने से कम होता है तनाव
हाथ थामने से गले  लगाने से सुरक्षा का भाव तो आता ही है. इसके साथ ही शरीर में बायोकैमिकल बदलाव भी आते हैं. मियामी स्कूल ऑफ मेडिसन यूनिविर्सिटी के टिफिनी फील्ड का मानना है कि  इस तरह छूए जाने से दिमाग को सकारात्मक संकेत मिलते हैं और दिमाग के तनाव जनित हार्मोंस कम होते हैं और उन हिस्सों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जो धड़कन, ब्लड प्रैशर, सांस आदि को नियंत्रित करते हैं.

corona virus
अमेरिका में इस समय कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज हैं.


जिस तरह तनाव से हमारे शरीर पर कुप्रभाव डालने वाले हार्मोंस बनने लगते हैं. उसी तरह से प्रेम से छूने, हाथ पकड़ने, और गले लगाने से भी हमारे शरीर में पर अच्छा असर डालने वाले हार्मोंस निकलते हैं. अमेरिका में हुए कई अलग-अलग शोधों से साफ हुआ है कि स्पर्श और प्रेम भरे स्पर्श का अंतर हमारा मस्तिष्क साफ तौर पर समझता है. मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक केवल छूना ही काफी नहीं है उसके पीछे का भाव भी प्रभाव डालने में भूमिका निभाता है. हमारे जीन्स में ही सामाजिकता पहले से ही रची बसी हुई है. बेशक आज प्यार भरे स्पर्श की बहुत ज्यादा जरूरत है.

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First published: May 21, 2020, 2:28 PM IST
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