भारत में आज पहली बार : जब प्रस्तुत किया गया था हमारे संविधान का प्रारूप

आज ही के दिन डॉ भीम राव अंबेडकर ने संविधान सभा को भारतीय संविधान (Indian Constituion) का  प्रारूप सौंपा था. (फाइल फोटो)

आज ही के दिन डॉ भीम राव अंबेडकर ने संविधान सभा को भारतीय संविधान (Indian Constituion) का प्रारूप सौंपा था. (फाइल फोटो)

21 फरवरी 1948 को भारत की संविधान सभा (Constituent Assembly) के समक्ष भारतीय संविधान (Indian Constitution) का प्रारूप (Draft) पहली बार पेश किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 6:57 AM IST
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भारतीय संविधान (Indian Constitution) का निर्माण एक लंबी प्रक्रिया से गुजरा है. आजादी हासिल होने से पहले ही संविधान सभा (Constituent Assembly) के बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी और एक दिसंबर 1946 से ही इसने अपना कार्य आरंभ कर दिया था. इसके बाद 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया जिसके अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडर (Dr BR Ambedkar)  ने संविधान का प्रारूप संविधान सभा के अध्ययक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) को आज ही के दिन यानि 21 फरवरी 1948 को सौंपा था.

13 समितियों में से एक थी प्रारूप समिति

संविधान में बहुत सारे पहलुओं को शामिल किया जाना था जो एक जटिल कार्य था. संविधान के लिए बनी कुल 13 समितियों में से एक प्रमुख समिति प्रारूप समिति थी. प्रारूप समिति ने छह महीने के अंदर ही संविधान का प्रारूप संविधान सभा को सौंप दिया था. इस समिति ने संविधान सलाहकार बी एन राव द्वारा तैयार किये गए ड्राफ्ट कर काम किया था. इसके बाद संविधान सभा में औपचारिक चर्चाएं शुरु हुई जिससे संविधान को अंतिम रूप दिया जा सके.

प्रारूप पर बहस
संविधान सभा के सदस्यों को करीब आठ महीनों तक इस प्रारूप के अध्ययन का मौका मिला. सभा में तीन स्तरों पर संविधान प्रारूप पर बहस हुई. नवम्बर 1948 से 17 अक्टूबर 1949 तक कई बैठकों में इस प्रारूप पर सिलसिलेवार चर्चा हुई. तीसरे और अंतिम प्रारूप पर 14 नवम्बर 1949 को चर्चा शुरू हुई. इसके बाद 26 नवम्बर 1949 को संविधान को पारित कर दिया गया. गहन चर्चाओं में पेश किए गए सुझावों पर विचार करते हुए संविधान के प्रारूप को अंतिम रूप दिया गया. यह काम डॉ. भीम राव आंबेडकर के नेतृत्व में हुआ.

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भारतीय संविधान (Indian Constitution) को अंतिम रूप भी प्रारूप समिति ने ही दिया था.


संविधान सभा का चुनाव



आज लोगों को हैरानी होती है कि उस जमाने में संविधान सभा का निर्माण कैसे हुआ था. कौन से लोग इसके सदस्यों की योग्यताओं को कैसे तय किया गया था. भारतीय संविधान सभा के लिए बाकायदा चुनाव हुए थे जो आजादी से लगभग एक साल पहले ही हो गए थे. जुलाई 1946 में चुनाव संपन्न होने के बाद उसी साल दिसंबर में उसकी पहली बैठक भी हो गई थी.

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कितने सदस्य थे इस सभा के

संविधान सभा के सदस्य वयस्क मताधिकार के आधार पर अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित हुए थे. सभा की पहली बैठक के बाद ही भारत पाकिस्तान का बंटवारा तय हो गया था. इसलिये बंटवारे के बाद मूल सभा के कुल 389 सदस्यों में से भारत में 299 ही रह गए थे. इनमें से 229 चुने हुए और 70 सदस्य मनोनीत थे. इसमें कुल महिला सदस्यों की संख्या 15, अनुसचित जाति के 26, अनुसूचित जनजाति के 33 सदस्य थे.

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डॉ भीम राव अंबेडकर (Dr BR Ambbedkar)ने संविधान सभा में प्रारूप समिति की ओर अधिकांश जिम्मेदारी खुद उठाई.
(Photo- news18 English creative)


समिति की भूमिका

प्रारूप समिति सिर्फ संविधान के प्रारम्भिक पाठों को लिखने के लिए जिम्मेदार नहीं थी, बल्कि उसको यह जिम्मा सौंपा गया था कि वह विभिन्न समितियों द्वारा भेजे गए अनुच्छेदों के आधार पर संविधान का लिखित पाठ तैयार करे, जिस बाद में संविधान सभा के सामने पेश किया जा सके. सभा के समक्ष कई मसविदे पढ़े गए और हर बार ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों ने चर्चा का संचालन और नेतृत्व किया था. अधिकांश बार यह जिम्मेदारी आंबेडकर ने ही निभाई थी.
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