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Today in History: कैसे एक बंदरगाह पर हुए हमले ने अमेरिका और दुनिया को बदल दिया

Today in History: कैसे एक बंदरगाह पर हुए हमले ने अमेरिका और दुनिया को बदल दिया

80 साल पहले जापान ने हवाई के होनोलुलू में स्थित पर्ल बंदरगाह (Pearl Harbour) को तबाह कर दिया था. (तस्वीर साभार: Wikipedia)

80 साल पहले जापान ने हवाई के होनोलुलू में स्थित पर्ल बंदरगाह (Pearl Harbour) को तबाह कर दिया था. (तस्वीर साभार: Wikipedia)

द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान जापान का अमेरिका (USA) के पर्ल बंदरगाह (Pearl Harbour) पर हुए हमले के दूर गामी नतीजे हुए. इस हमले ने ना केवल उस विश्व युद्ध को अलग दिशा प्रदान की बल्कि यह घटना इस युद्ध के अंत की भूमिका निर्मित करने का आधार भी साबित हुई. इसी घटना ने अमेरिका को युद्ध में खींचा जिससे वह एक महाशक्ति के रूप में उभरा. जापान का यह हमला 7 दिसंबर 1941 को ही हुआ था.

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    कई बार केवल एक घटना ही बहुत बड़े नतीजे दिखा देती है. इसी तरह की एक घटना द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में भी हुई थी जिसने अमेरिका (USA) और फिर पूरी दुनिया को बदल दिया था. यह कुछ और नहीं बल्कि 1941 में अमेरिका के पर्ल बंदरगाह (Pearl Harbour) पर हुआ वह हमला था जिसने ना केवल युद्ध बल्कि दुनिया को बदलने के लिए भी नींव का काम किया था. 7 दिसंबर को  हुई इस घटना ने युद्ध की दिशा को बदलने का काम किया जिसमें अमेरिका की विश्वयुद्ध में एंट्री हुई थी और सब कुछ बदल गया था.

    क्या थी इस दिन के पहले की स्थिति
    द्वितीय विश्व युद्ध में 7 दिसंबर 1941 से पहले और बाद की स्थिति में बहुत अंतर था. ऐसा कम से कम अमेरिका के मामले में तो कुछ ज्यादा ही था, लेकिन इसका पूरी दुनिया पर कितना असर होगा इसका किसी को अंदाजा ना था. इस विश्व युद्ध में इस तारीख से पहले अमेरिका तटस्थ संधियों से बंधा से और युद्ध में शामिल नहीं था. अमेरिकी शासन, राजनीति से लेकर लोगों तक में इस बात पर मतैक्य नहीं था कि क्या अमेरिका को इस युद्ध में शामिल होना चाहिए या नहीं.

    क्या था तब युद्ध का हाल
    7 दिसंबर 1941 से पहले जर्मनी फ्रांस, बेल्जियम नॉर्वे आदि पर कब्जा कर चुका था. जर्मनी इटली और जापान के साथ मिलकर अपनी ताकत बढ़ा रहा था. ब्रिटेन और जर्मनी के बीच भीषण लड़ाई हो रही थी. अमेरिका युद्ध में शामिल नहीं था. रूस भी जर्मनी और उसके सहयोगियों से भिड़ा हुआ था.

    7 दिसंबर को क्या हुआ था
    7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के हवाई द्वीपों में से एक होनोलुलू द्वीप पर स्थित पर्ल बंदरगाह पर भीषण हमला कर उसे तबाह कर दिया. इस हमले के पीछे  जापान का उद्देश अमेरिका की पूर्वी एशिया में गतिविधियों को रोकना था जिससे अमेरिका ब्रिटेन, नीदरलैंड के उपनिवेशों में मदद ना मिल सके. इस हमले में अमेरिका के आठ युद्ध पोतों में से चार डूब गए और चार को भारी नुकसान हुआ. इसके अलावा 188 अमेरिकी वायुयान तबाह हुए और 2400 से ज्यादा अमेरिकी मारे गए.

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    इस घटना के बाद अमेरिका (USA) की वैश्विक राजनीति में स्थिति पूरी तरह से बदल गई थी. (तस्वीर: Pixabay)

    क्या हुआ युद्ध पर असर
    अमेरिका पर यह हमला पूरी तरह से चौंकाने वाला था. लेकिन इस घटना के बाद अमेरिका के युद्ध में शामिल होने से यूरोप में युद्ध के हालात पर बहुत असर पड़ा. इसमें भी सबसे प्रमुख ब्रिटेन की स्थिति रही. उसे अमेरिका से अब मदद मिलनी शुरू हो गई जिससे उसकी स्थिति कमजोर होने बच गई. जापान को लेकर भी अमेरिका में बहुत विरोध हुआ. और कई विशेषज्ञ यही मानते हैं कि अगर यह हमला ना हुआ होता तो शायद जापान  पर परमाणु बम ना गिराए गए होते.

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    और क्या हुआ असर
    वहीं पर्ल हार्बर पर हमले से सोवियत संघ की एशिया में विस्तार की रफ्तार भी थम गई. युद्ध के अंत में अमेरिका ब्रिटेन से ज्यादा शक्तिशाली राष्ट्र उभर कर सामने आया. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दो नए ध्रुव पैदा हुए जिसमें एक सोवियत संघ तो दूसरा अमेरिका था, लेकिन ब्रिटेन अमेरिका के पीछे ही रहा.

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    आज पर्ल बंदरगाह (Pearl Harbour) की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है. (तस्वीर: shutterstock)

    अमेरिका की संवेदनशीलता
    इस बदले परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को एक अलग ही दिशा मिली. तो वहीं अमेरिका में अपने सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बहुत बढ़ती दिखाई दी. साल 1812 के युद्ध के बाद यह अमेरिका पर पहला विदेशी हमला था. इस स्तर का हमला इसके बाद साल सिंतबर 2001 में हुआ था.

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    द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच प्रतिस्पर्धा, अमेरिका के वैश्विक मामलों में ज्यादा दखल और संवेदनशीलता सभी की नींव पर्ल हार्बर का युद्ध माना जा सकता है. पूर्वी एशिया में जापान के साथ अमरिका के संबंध भी द्वितीय विश्व युद्ध में बहुत उतार चढ़ाव में दिखे. लेकिन युद्ध के बाद भी अमेरिका ने जापान को अपनी खुद की सेना रखने नहीं दी और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आज भी अमेरिका के पास है.

    Tags: History, Research, USA, World

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