Home /News /knowledge /

टोंगा के समुद्र में सक्रिय ज्वालामुखी का क्या भारत पर भी हो सकती है असर

टोंगा के समुद्र में सक्रिय ज्वालामुखी का क्या भारत पर भी हो सकती है असर

इस तरह के ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption) पूरी दुनिया में अपना असर छोड़ते हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इस तरह के ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption) पूरी दुनिया में अपना असर छोड़ते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) टोंगा (Tonga) के पास समुद्र में एक ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption)हुआ है. इसका प्रभाव महासागर के तटीय देशों में तो दिखा ही है, 12 किलोमीटर दूर भारत के चेन्नई शहर तक में महसूस किया गया है थोड़ी सी देर के लिए वायुमंडलीय दबाव में अचानक हुए इजाफे से पता चलता है कि ज्वालामुखी प्रस्फोट पूरी दुनिया में तबाही मचाने में सक्षम हो सकते हैं.

अधिक पढ़ें ...

    ज्वालामुखी (Volcano) प्रकृति की उन घटनाओं में से है जिसका असर  दूर दूर तक हो सकता है.आमतौर पर इस तरह  के प्रस्फोट कम होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये कभी नहीं होंगे. बीते सप्ताहांत में प्रशांत महासागर स्थित टोंगा (Tonga) के पास महासागर में ऐसा ही ज्वालामुखी विस्फोट हुआ जिसे दुनिया में दूर दूर तक महसूस किया गया.  यहां तक कि इसके पैदा हुए भूकंपीय झटके 12 हजार किलोमीटर दूर  भारत के चेन्नई तक में महसूस किए गए.

    कब दिखाई दिया असर
    शनिवार को इस घटना के होने के दस घंटे बाद भारतीय समयानुसार रात 8.15 बजे वायुमंडलीय दाब में अचानक से कुछ देर के लिए बहुत तेजी से 2 हेक्टा पास्कल तक उछल गया. समुद्र के अंदर हुए इस ज्वाला मुखी प्रस्फोट की घटना 16 जनवरी को भारतीय समयानुसार सुबह 10.15 बजे हुई थी. इससे एक खतरे का अंदेशा पैदा हो गया है.

    पूरे प्रशांत महासागर में आवाज
    इस प्रस्फोट के कारण प्रशांत महासागर के तटीय देशों में अलग अलग तीव्रता की सुनामी लहरें पैदा हो गईं. इसके अलावा 2500 किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड में कई जगहों पर इस प्रस्फोट की आवाजें भी सुनाई दी हैं. वहीं 9500 किलोमीटर दूर अमेरिका की अलास्का ज्वालामुखी वेधशाला में झटके महसूस होने के साथ हलकी आवाज सुनाई दी थी.

    हैरान करने वाली बात क्या
    अलास्का की वेधशाल के वैज्ञानिकों ने अपने ट्वीट में बताया, “बहुत ही बड़ा संकेत मिलना विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए कोई हैरान करने वाला अवलोकन नहीं है. लेकिन जिस तरह से उसकी आवाज सुनाई दी है वह अपने आप में बहुत ही अनोखी बात है.” हालांकि यह आवाज भारत में सुनाई नहीं दी, लेकिन इससे वायुमंडलीय दबाव में तेजी से बदलाव जरूर देखने को मिला.

    India, Chennai, Tonga, Volcano, Volcanic Eruption, Tonga volcanic eruption, volcanic eruption, Shockwave Chennai, Pacific Ocean

    ज्वालामुखी विस्फोट की आवाज पूरे प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)में सुनाई दी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    भारत में चेन्नई में सबसे पहले
    आईआईटी मद्रास के पीएचजी स्कॉलर एस वेंटरमन ने अपने घर में लगाए छोटे से मौसम स्टेशन में काम करने के दौरान संयोग से अपने बैरौमीटर में यह उतार चढ़ाव देख लिया जो 1012.5 से 1.014.5 hPa  के बीच था. उन्होंने बताया कि यह बहुत अजीब सा था और उन्हें लगा कि उनके उपकरण में कोई समस्या है.

    यह भी पढ़ें: Climate change: साल 2021 था पृथ्वी का 5वां सबसे गर्म साल

    चेन्नई से बेंगलुरू तक
    वैसे तो यह प्रभाव बहुत थोड़ी देर के लिए पर अचानक था, लेकिन अवलोकन एक तरंग और बहुत धीमे स्वरूप में हुए. तेजी से उछाल और गिरावट असामान्य बात थी वेंकटरमन ने तुरंत अपने सक्रिय चेन्नई के वेदर ब्लॉगिंग कम्यूनिटी में इसकी जानकारी दी और  बेंगलुरू में भी संपर्क किया जहां के भी इस तरह का अवलोकन पाया गया था जो 20 मिनट के अंतराल के बाद वहां पहुंचा.

    India, Chennai, Tonga, Volcano, Volcanic Eruption,  Tonga volcanic eruption, volcanic eruption, Shockwave Chennai, Pacific Ocean

    ज्वालामुखी (Volcano) से पैदा हुई तरंगें 1200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली थीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    चेन्नई के मौसम केंद्र में भी
    इसी के बाद ही वेंकटरामन को इस बात की पुष्टि मिल सकी यह सब टोंगा में हुए ज्वालामुखी प्रस्फोट के कारण हुआ था. उनके मुताबिक ये तरंगें 1200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से 10 घंटे बाद चेन्नई तक पहुंच सकीं. चेन्नई के क्षेत्र मौसम केंद्र के क्षेत्रीय चक्रवात चेतावनी केंद्र के निदेशक एन पुविरासन ने बताया कि उनके स्टाफ ने भी उसी समय वायुमंडल दाब के इस बदलाव की जानकारी दी थी.

    यह भी पढ़ें: क्या है डॉलफिन की सेक्स लाइफ और प्रजननता में अंतर- शोध ने बताया

    इन तरंगों को भारत में अलग मौसम केंद्रों ने भी महसूस किया था. लेकिन उनका समय दूरी के अनुसार अलग अलग था. प्रशांत महासागर का पूरे वैश्विक मौसम पर असर होता है. इस ज्वालामुखी प्रस्फोट के लंबी दूरी के प्रभाव आने वाले समय में अध्ययन से सामने आंएंगे लेकिन जैसा वेंटकरमन ने कहा कि प्रकृति की कोई सीमाएं नहीं होती हैं, यह बात हमें याद रखनी होगी.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर