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क्या होती हैं टोंगो ज्वालमुखी से अंतरिक्ष तक पहुंचीं वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगें

क्या होती हैं टोंगो ज्वालमुखी से अंतरिक्ष तक पहुंचीं वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगें

हुंगा टोंगा ज्वालामुखी (Hunga Tonga Volcano) अब तक का सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक माना जा रहा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

हुंगा टोंगा ज्वालामुखी (Hunga Tonga Volcano) अब तक का सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक माना जा रहा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

टैंगो ज्वालामुखी (Tango Volcano) को विस्फोटित हुए सात महीने हो चुके हैं. इस विस्फोट का प्रभाव पूरी पृथ्वी (Earth) पर महसूस किया गया था और इससे पैदा हुई सुनामी लहरें पूरे प्रशांत महासागर में हर तरफ फैली थीं. इससे हमारा वायुमंडल तक प्रभावित हुआ था. नए अध्ययन खुलासा हुआ है कि इस विस्फोट के साथ वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगें (Atmospheric Gravity Waves) अंतरिक्ष तक को छू गई थीं. जो खगोलीय गुरुत्व तरंगों से काफी अलग होती हैं.

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    जनवरी 2022 में हुंगा टोंगो में हुए ज्वालामुखी (Hunga Tongo Volcano) विस्फोट अपने आप में बहुत ही अलग ज्वालामुखी विस्फोट था. नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने माना कि यह अब तक के अवलोकित ज्वालामुखी विस्फोटों में से सबसे शक्तिशाली और दूरगामी प्रभाव फैलाने वाले ज्वालामुखियों में से एक था. समुद्र के अंदर हुए इस विस्फोट के बारे में वैज्ञानिकों को यह भी कहना है कि यह विज्ञान के लिहाज से भी अनोखी घटना थी  जिससे ऐसी तरंगें पैदा हुई जो पूरी पृथ्वी (Earth) तक फैंली और वायुमंडल के आयनमंडल में 100 किलोमीटर तक गई थीं. इस अध्ययन के सैटेलाइट अवलोकन बताते हैं कि इससे निकली वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगे (Atmospheric Gravity Waves) अंतरिक्ष तक को छू गई थी.

    बहुत ही विलक्षण घटना
    बाथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुआई में हुआ यह शोध हाल ही में नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ था. इस अध्ययन में सैटेलाइट आंकड़ों के साथ ही जमीन से किए गए अवलोकनों को शामिल करते हुए दर्शाया गया कि यह विस्फोट अवलोकित विज्ञान में मात्रा और गति के लिहाज से में बहुत ही विलक्षण था. इसकी एक खास बात यह थी कि इसने तेजी से चलने वाले गुरुत्व और वायुमडंलीय तरंगों को भी पैदा किया था.

    क्या होती हैं वायुमंडलीय तरंगें
    वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगें को लेकर एक भ्रम हो जाता है. वास्तव में ये खगोलभौतिकीय गुरुत्वाकर्षण तरंगें नहीं हैं. दरअसल गुरत्व तरंगें लंबवत तरंगें होती हैं. किसी प्रणाली से शुरू हुई ये तरंगें हवा को लंबवत  विस्थापित करती हैं जिससे गुरुत्व तरंगें पैदा होती हैं. पहाड़ों से टकरा कर और आंधी तूफानों के कारण ऊपर की ओर जाने वाली हवा से भी गुरुत्व तरंगें पैदा होती है.

    कैसे पैदा हुईं ये तरंगें
    दिसंबर 2021 में हुंगा टोंगो में छोटी भूकंपीय घटनाओं की शृंखला की शुरुआत हुई थी. इसके बाद 15 जनवरी को वहां एक विशाल ज्वालामुखी विस्फोट हुआ. इससे एक लंबवत गुबार निकला जो 50 किलोमीटर ऊपर तक गया. पानी से निकली ऊष्मा और गर्म राख अगले 12 घंटों के लिए गुरुत्व तरंगों के सबसे बड़े स्रोत रहे थे. इसविस्फोट ने गुरुत्व तरंगों की तरह लहरदार प्रभाव दिखाया जिसे सैटेलाइट अवलोकनों ने बताया की वे पूरे प्रशांत बेसिन में फैली थीं.

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    कई अभूतपूर्व गतिविधियों को पैदा करने के कारण टोंगो ज्वालामुखी (Hunga Tonga Volcano) को बहुत ही अनोखी घटना माना जा रहा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    वायुमंडल में सबसे तेज गति
    इस विस्फोट से हमारे वायुमंडल में भी तरंगें पैदा हुईं जो कम से कम छह बार पृथ्वी पर घूमती रहीं और सैद्धंतिक रूप से सर्वाधिक गति के करीब पहुंची जो 320 मीटर प्रति सेंकेड की गति थी. यह अब तक वायुमडंल में देखी गई सबसे तेज गति थी. यह एक घटना बहुत बड़े इलाके पर हावी थी. इसके उपयोग अब वैज्ञानिक भविष्य में वायुमंडलीय मौसम और जलवायु प्रतिमानों में कर सकेंगे.

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    हैरतअंगेज प्राकृतिक प्रयोग
    शोधकर्ताओं ने बताया कि यह वाकई में एक बहुत बड़ा विस्फोट था और विज्ञान द्वारा अब तक के अवलोकित किए ज्वालामुखियों में सबसे अनोखी घटनाओं  में से एक था. हमने वायुमडंलीय गुरुत्व तरंगें दुनिया भर में इस तरह से फैलती नहीं देखीं. वे अपनी गति सैद्धांतिक सीमा के  बहुत पास से यात्रा कर रही थीं. यह घटना बहुत ही हैरतअंगेज प्राकृतिक प्रयोग थी. इससे हमारी वायुमडंलीय समझ बढ़ाएगी और मौसम एवं जलवायु प्रतिमानों को बेहतर करने सहायक होगी.

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    इस विस्फोट का असर अंटार्कटिका के ऊपर बने ओजोन छिद्र (Ozone Hole) पर भी हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    और भी दिखेंगे असर
    शोधकर्ताओं को हुंगा टोंगो विस्फोट के और भी असर दिखाई देने की उम्मीद है. उनके अध्ययन ने दर्शाया है कि से प्रस्फोट के दौरान भारी मात्रा में समुद्री पानी के वाष्पीकरण से  वैश्विक तरंगें फैली थीं. जैसे जैसे पानी की वाष्प समतापमंडल में फैलेगी लोगों की निगाहें ओजोन छिद्र पर जाएगी जो वसंत में और भीषण हो सकता है.

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    इस अध्ययन में बाथ यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी आदि के साथ नासा ने भी काम किया था. अब शोधकर्ता अपने साथियों के साथ मौसम और जलवायु पूर्वानुमान केंद्रों पर काम रहे हैं. वे यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि विस्फोट से हासिल की गई जानकारी का भविष्य में बेहतर पूर्वानुमान लगाने के लिए कैसे किया जा सकता है.

    Tags: Earth, Research, Science, Space

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