भारत समेत वो चार देश, जो दुनिया में सबसे ज्यादा खाना पैदा करते हैं

भारत समेत वो चार देश, जो दुनिया में सबसे ज्यादा खाना पैदा करते हैं
कौन हैं दुनिया के चार बड़े कृषि उत्पादक

भारत दुनिया के चार बड़े कृषि उत्पादकों में जरूर है लेकिन अमेरिका, चीन और ब्राजील के किसान कहीं ज्यादा खुशहाल हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2018, 10:48 AM IST
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दुनिया में कुछ ही देश हैं, जो जरूरत से ज्यादा अन्न और खाद्य पदार्थ पैदा करते हैं. ये देश इतना अनाज और अन्य चीजें इतनी ज्यादा पैदा करते हैं कि यूरोप के सारे देश मिलकर भी उतनी पैदावार नहीं उगा पाते. एक जमाना था जबकि भारत की पैदावार अमेरिका से भी ज्यादा होती थी लेकिन भारत के पैदावार की बहुत कुछ खपत देश के अंदर ही हो जाती है.
दुनिया के चार बड़े पैदावार करने वाले देशों में अमेरिका, चीन, भारत और ब्राजील शामिल हैं. ये सभी देश एक बड़े भूभाग पर खेती करते हैं. अमेरिका दुनिया के फूड मार्केट में सुपर पॉवर है लेकिन भारत और चीन भी उससे कम नहीं.

अमेरिका
अमेरिका के कृषि जगत में मजदूरों या श्रम शक्ति कम होने के बाद भी वो दुनिया का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश है. अमेरिका भौगोलिक तौर पर खासा बड़ा देश है. देश में चारों ओर बड़े बड़े खेत फैले हुए हैं. कैलिफोर्निया, लोवा, टैक्सास, नब्रास्का और इलिनोस सबसे ज्यादा कृषि उपज पैदावार वाले राज्य हैं. अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ा अनाज निर्यातक है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका का खाद्य उत्पादन दोगुना हो चुका है.
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अमेरिका का कृषि क्षेत्र अत्याधुनिक मशीनों से लैस है, जिसके चलते देश खादयान्न उत्पादन का बड़ा हब है. अमेरिका के कृषि मंत्रालय के आंकड़ों मुताबिक देश की कुल जीडीपी में कृषि का योगदान महज एक फीसदी है. वहीं 1.3 फीसदी लोग ही रोजगार के लिए इस निर्भर करते हैं. अमेरिका दुनिया में मक्के का सबसे बड़ा उत्पादक है. वहीं गेहूं उत्पादन में इसका दुनिया में तीसरा स्थान है.

अमेरिका के खेत आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों से कहीं ज्यादा लैस हैं


अमेरिका में किसानों की आय पिछले सालों की तुलना में इस बार कम है लेकिन वो काफी समृद्ध स्थिति में हैं.

चीन
इन्वेस्टोपीडिया डॉट कॉम के अनुसार चीन बहुत आराम से इस सूची में नंबर वन है. वो दुनिया में सबसे ज्यादा अनाज, सब्जियां और फल पैदा करता है. चीन में खुद उसकी पैदावार की सबसे ज्यादा खपत है बल्कि बड़ा आयातक भी है.
चीन ने इसके लिए एक बहुत मजबूत सिस्टम तैयार किया हुआ है. एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों और विशेषज्ञों पर ना केवल खेतों पर जाकर काम करना होता है बल्कि ट्रेनिंग भी देनी होती है. वो किसानों से तालमेल करके लगातार ये कोशिश करते हैं कि पैदावार अच्छी मिले. उसमें किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होने पाए.

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चीन के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों की मिट्टी खासी उपजाऊ है. चीन खेतों की जुड़े मजदूरों की संख्या 31 करोड़ के आसपास है.

चीन की सरकार अपने किसानों को हर तरह का सहयोग देती है


चीन में चावल, गेहूं, आलू, प्याज, हरी बीन्स ब्रोकली, पालक, गाजर, कद्दू, टमाटर, अंगूर, सेब, तरबूजा आदि की जबरदस्त पैदावार होती है. इन सबकी पैदावार में वो दुनिया में सबसे ऊपर है.
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के साल 2013 के आंकड़ों मुताबिक देश की कुल जीडीपी में 10 फीसदी हिस्सा कृषि का है. चीन को दुनिया का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब माना जाता है, लेकिन पिछले एक दशक से देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का भी बड़ा योगदान है. गेहूं, चावल और आलू के उत्पादन में चीन का दुनिया में पहला स्थान है. चीन में पिछले कुछ सालों में किसानों की आय लगातार बढी हैं.

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ब्राजील
ब्राजील हमेशा से कृषि उत्पादक देश रहा है. गन्ना, उसकी मुख्य फसल रही है. अब ब्राजील में बड़े पैमाने में काफी, सोयाबीन और कार्न की पैदावार भी होती है. यहां संतरे, अन्नानास, पपीता और नारियल भी काफी ज्यादा पैदा होते हैं. ब्राजील काफी बड़े पैमाने पर अपनी पैदावार का निर्यात करता है.

ब्राजील में खेती में आधुनिक तौरतरीकों का तो इस्तेमाल होता ही है. वहां के किसान आमतौर पर समृद्ध हैं


दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी महज 5.6 फीसदी तो है लेकिन कृषि आधारित उद्योगों का हिस्सा तरीबन 23.5 फीसदी है. यह आंकड़े देश की प्रमुख कृषि संगठन सीएनए के हैं बीते सालों में यहां कृषि आधारित उद्योगों में बहुत तेजी आई है. ब्राजील की 15 फीसदी आबादी रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर करती है. ब्राजील में भी किसानों की हालत काफी बेहतर है. साथ ही ब्राजील का खेती से जुड़ा प्रस्संकरण उद्योग अमेरिका की ही तरह खासा मजबूत है.

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भारत
भारत का स्थान कृषि उत्पादन के लिहाज से दुूनिया में नंबर दो है. यहां बड़े पैमाने पर अन्न, दलहन, सब्जियों और फलों की पैदावार होती है लेकिन इस सूची में भारत का स्थान नंबर चार पर है. चीन की तुलना में उसकी कृषि पैदावार आधी है. खेतों की उत्पादकता की अगर बात करें तो भारत की जगह चीन, अमेरिका और ब्राजील से नीचे हैं.
भारत में किसानों की हालत अगर बहुत अच्छी नहीं रहती तो एक बड़ी समस्या ये भी है कि देश की बड़ी आबादी गरीब होने के कारण उनकी खाद्य क्रय शक्ति कम है. हालांकि भारत की जनसंख्या का तेजी से बढना भी एक चिंताजनक वजह है, अन्यथा भारत कृषि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों में निर्यात कर काफी पूंजी अर्जित कर सकता है.

भारत में किसान नाराज हैं. एक साल में तीन बार किसान तीन बड़े आंदोलन कर चुके हैं


भारत में कृषि की हालत लगातार खराब होती जा रही है, हालांकि अब भी देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका अहम बनी हुई है. साल 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक देश की कुल जीडीपी में कृषि का हिस्सा लगभग 16 फीसदी का है. साथ ही करीब 49 फीसदी लोग रोजगार के लिए इस पर निर्भर करते हैं. भारत में किसानों की हालत असंतोषजनक है. किसानों का मानना है कि मौजूदा सिस्टम में वो अपनी उपज से बहुत ज्यादा कमाई नहीं कर पाते. कई इलाकों में तो किसान जितना पैसा बुआई में लगाता है, वो धन भी नहीं निकाल पाता.

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