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अंग्रेजी अख़बारों से: तो क्या आचार संहिता का उल्लंघन कर मंत्रियों ने बनवाया बीजेपी का घोषणा-पत्र?

बीजेपी का घोषणापत्र
बीजेपी का घोषणापत्र

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया है कि केंद्रीय मंत्रियों और उनके विभागों ने भारतीय जनता पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र यानि मैनिफेस्टो तैयार कराने में मदद की थी. यह आचार संहिता के उल्लंघन का मामला हो सकता है.

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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया है कि केंद्रीय मंत्रियों और उनके विभागों ने भारतीय जनता पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र यानि मैनिफेस्टो तैयार कराने में मदद की थी. यह मामला चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला हो सकता है. इसके अलावा और क्या हैं आज की राजनीतिक सुर्खियां, पढ़ें-

तो क्या केंद्रीय मंत्रियों ने बीजेपी को घोषणा-पत्र के लिए दिए थे सुझाव?

# हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि केंद्रीय मंत्रियों और उनके विभागों ने भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनावों के लिए घोषणापत्र तैयार में मदद की थी.



# इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है. जो कि चुनावों की घोषणा के बाद से ही यानि 10 मार्च से ही प्रभाव में आ चुकी है.
# चुनावी आचार संहिता के अनुसार, मंत्रियों को उनके आधिकारिक दौरों को उनके चुनावी कार्यक्रमों के साथ नहीं मिलाना चाहिये और सरकारी मशीनरी और व्यक्तियों का प्रयोग चुनावी कार्यक्रमों में नहीं किया जाना चाहिए.

पैम्फलेट के मसले पर भिड़े आतिशी और गंभीर

# टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी पार्टी की पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार आतिशी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि बीजेपी के उम्मीदवार गौतम गंभीर और उनकी टीम ने उनके खिलाफ विवादित पर्चे बांटे हैं. जिसमें उनके खिलाफ भद्दे और नीचा दिखाने वाले आरोप लगाए गए हैं.

# इन पर्चों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को भी निशाना बनाया गया है.

# इस मामले में गंभीर की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने न सिर्फ अरविंद केजरीवाल पर पलटकर आरोप लगाए बल्कि यह भी कहा कि अगर साबित हो गया उन्होंने ऐसा किया है तो वे इलेक्शन से अपना नाम वापस ले लेंगे.

चुनाव आयोग को दिए जवाब में नीति आयोग ने PMO के साथ जानकारियां साझी करने के मामले में दी सफाई

# टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग ने पीएमओ के साथ कुछ जिलों की जानकारियां और आंकड़े साधा करने के मामले में चुनाव आयोग को सफाई देते हुए एक पत्र लिखा है. हालांकि हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक नीति आयोग ने ऐसी जानकारियां शेयर करने से मना किया है.

# एक वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग से प्रधानमंत्री की राजनीतिक रैलियों से पूर्व तीन जिलों वर्धा, लातूर और गोंडिया की जनसंख्या से जुड़े और अपनी रुचि की जगहों की जानकारी मांग की गई थी, जो उन्होंने जिला प्रशासन से जुटाकर पीएमओ को दी थी.

# इसके बाद कांग्रेस चुनाव आयोग के पास गई थी और सरकारी/आधिकारिक मशीनरी का चुनाव प्रचार के लिए दुरुपयोग किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी.

 

चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ तेज बहादुर की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

# हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग के बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन खारिज किए जाने के फैसले पर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है.

# मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा कि हमें इस याचिका पर सुनवाई के लिए कोई आधार नहीं मिला है.

# यादव ने निर्वाचन अधिकारी के अपने नामांकन को रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि यह प्रधानमंत्री की चुनौती को हटाने का एक प्रयास था.

कांग्रेस को यूपी के आखिरी दो चरणों में अच्छा करने की आशा

# इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश की सभी पार्टियों की नज़रें यूपी के आखिरी दो चरणों के चुनावों पर लगी हैं. अभी यूपी की 27 सीटों पर चुनाव होने बाकी हैं.

# इनमें से ज्यादातर सीटें पूर्वांचल की हैं. जहां का प्रभार प्रियंका गांधी को दिया गया था. हालांकि 2014 में इन 27 सीटों में से 26 पर बीजेपी की जीत हुई थी. सिर्फ आजमगढ़ की सीट वह नहीं जीत सकी थी.

# लेकिन 2009 में कांग्रेस ने यहां 6 सीटें जीती थीं. यह भी एक कारण था कि प्रियंका को यहां का प्रभार सौंपा गया.

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