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सावधान! इन पालतू जानवरों से हो सकती हैं 10 खतरनाक बीमारियां

कुत्तों के साथ सोने-बैठने वाले लोगों में त्वचा का ये संक्रमण दिखता है
कुत्तों के साथ सोने-बैठने वाले लोगों में त्वचा का ये संक्रमण दिखता है

कोरोना वायरस (coronavirus) की तरह इस बीमारी के लक्षण (symptoms of disease) भी धीरे-धीरे दिखते हैं, तब तक मस्तिष्क की कोशिकाओं (brain cells) का नुकसान हो चुका होता है और मरीज की मौत (death of patient) हो जाती है.

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कोरोना वायरस  (coronavirus) का कहर बढ़ने के साथ इसपर बहस छिड़ गई है कि क्या पालतू जानवर (pet animal) भी खतरनाक बीमारियां दे सकते हैं. Centers for Disease Control and Prevention के एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुत्ते-बिल्ली जैसे जानवर पालने वाले ज्यादातर लोग किसी न किसी बीमारी का शिकार हो सकते हैं जो पालतू जानवरों से आती है. जानें, ऐसी 10 बीमारियों के बारे में.

Catch scratch disease- ये एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो बिल्लियों की खरोंच से होता है. जरूरी नहीं, कि ये खरोंच बिल्ली ने गुस्से में मारी हो या खेलते हुए खरोंच लग गई हो, ये खतरनाक हो सकती है. छोटे बच्चों, प्रेगनेंट महिला या बुजुर्गों या पहले से ही बीमार लोगों के लिए पालतू बिल्ली की मामूली खरोंच भी इंफेक्शन दे सकती है. इसके लक्षण हैं फूली हुई लिंफ नोड्स, बुखार और लगातार थकान. लगभग 40 प्रतिशत बिल्लियों में इस इंफेक्शन के बैक्टीरिया होते हैं जिन्हें बैक्टीरियम बी कहते हैं, हालांकि बिल्ली में किसी भी तरह का कोई लक्षण नहीं दिखता है.

पालतू बिल्ली की मामूली खरोंच भी इंफेक्शन दे सकती है




Ringworm- कुत्तों से फैलने वाले इस संक्रमण को zoonotic skin infection कहते हैं. कुत्तों के साथ सोने-बैठने वाले लोगों और ज्यादा गर्म घरों में रहने वालों में त्वचा का ये संक्रमण दिखता है. ये फंगस की बीमारी है जिसके लक्षण हैं, त्वचा पर चकत्ते, दाने और लगातार खुजली होना. कुत्तों में शरीर में जगह-जगह बाल झड़ना और लगातार खुजली ऐसे लक्षण हैं, जिनसे पहचाना जा सकता है कि आपका कुत्ता बीमार है.
Psittacosis- पक्षी पालने वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा रहता है. इसे पैरट फीवर भी कहते हैं. ये बीमारी संक्रमित पक्षी के शरीर से हवा के जरिए फैलती है और अगर हम भी उसी हवा में सांस ले रहे हैं तो बीमारी के वायरस नाक के जरिए हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं. बीमारी के लक्षणों में बुखार, डायरिया, सूखी खांसी और ठिठुरन शामिल हैं. एंटीबायोटिक से ये इंफेक्शन 1 से 3 हफ्तों में चला जाता है.

Brucellosis- ये बीमारी गाय या बकरियों से आती है. आमतौर पर इंफेक्टेड गायों या बकरियों का दूध पीने पर ये बीमारी हो सकती है लेकिन अगर आप गाय पालने के शौकीन हैं तो शरीर पर हुए हल्के-फुल्के जख्मों के जरिए भी इस बीमारी के बैक्टीरिया भीतर पहुंच जाते हैं. इसके लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं. एंटीबायोटिक से इस बीमारी का भी इलाज संभव है.

इंफेक्टेड गायों या बकरियों का दूध पीने पर ये बीमारी हो सकती है


Tuberculosis-टीबी की बीमारी भी पालतू भेड़-बकरियों से इंसानों में फैल सकती है. जानवरों की छींक, बगलम या स्किन-टू-स्किन कॉन्टेक्ट से भी ये बीमारी फैलती है. टीबी के लक्षणों में सीने में दर्द, खांसी, बुकार, थकान और लगातार वजन घटना शामिल हैं.

Mad cow disease- इस बीमारी को bovine spongiform encephalopathy (BSE) के नाम से भी जाना जाता है. ये एक बेहद खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो मरीज की जान भी ले सकती है. ये prion नामक वायरस से फैलती है. बीमार गाय, भेड़ या बकरी का गोश्त खाने पर ये बीमारी होती है. मैड काऊ डिसीज के साथ सबसे खतरनाक बात ये है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, तब तक मस्तिष्क की कोशिकाओं का नुकसान हो चुका होता है और आखिरकार मरीज की मौत हो जाती है.

इस बीमारी के परजीवी संक्रमित कुत्ते या बिल्ली की आंतों में रहते हैं


Hookworm- इस बीमारी के परजीवी संक्रमित कुत्ते या बिल्ली की आंतों में रहते हैं. उन्हें पालने वाले लोग आमतौर पर साफ-सफाई के दौरान संक्रमित हो जाते हैं. हुकवॉर्म शरीर के भीतर पहुंचकर त्वचा में तेज दर्द के साथ खुजली पैदा करते हैं. बीमारी बढ़ने पर आंतों में अंदरुनी रक्तस्त्राव, सूजन और पेट दर्द होता है. एंटीपैरासाइट दवाओं से ये संक्रमण दूर किया जा सकता है.

Rabies- इस बीमारी को पालतू जानवरों से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारियों मं गिना जाता है. वायरस से फैलने वाली ये बीमारी पालतू जानवरों में आसपास रहने वाले जंगली जानवरों से आती है और पालतू जानवरों की सफाई के दौरान इंसानी शरीर में इसके वायरस प्रवेश कर जाते हैं. फ्लू की तरह लक्षणों से बीमारी की शुरुआत होती है, जो जल्द ही मतिभ्रम, बेहोशी या पैरालिसिस में बदल जाती है. पूरी दुनिया में हर साल लगभग 50 हजार मौतें इसी बीमारी की वजह से होती हैं. मॉर्डन चिकित्सा में इसका इलाज तो है लेकिन हर जगह उपलब्ध नहीं.

मॉर्डन चिकित्सा में इसका इलाज तो है लेकिन हर जगह ये उपलब्ध नहीं हैं


Toxoplasmosis- टॉक्सोप्लाजमोसिस दूषित पानी, पालतू बिल्ली के अपशिष्ट या अधपके खाने, खासकर मांसाहारी खाने से होने वाला संक्रमण है. यह संक्रमण दुनियाभर के लगभग एक तिहाई लोगों में पाया जाता है लेकिन आमतौर पर इसके परजीवी जिन्हें टी गोंडियाई कहा जाता है, मस्तिष्क के भीतर सुप्तावस्था में रहते हैं. हालांकि कई लोगों में संक्रमण के गंभीर होने पर यह सक्रिय हो जाते हैं और कई तरह की समस्याओं का कारण बनते हैं. अगर मरीज कोई गर्भवती महिला है तो इसके गंभीर असर दिखते हैं. जोड़ों में दर्द, बुखार, सर्दी-खांसी और सांस लेने में समस्या जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इलाज न मिलने पर हालात बिगड़ते जाते हैं. मरीज को बात-बात पर गुस्सा आना भी इसका एक लक्षण है. गंभीर हालातों में मरीज किसी को मारने या खुदकुशी करने तक भी आ सकता है.

Escherichia coli- ये एक खतरनाक बीमारी है, जो E. coli नामक बैक्टीरिया से होती है. गाय या किसी जानवर का कच्चा या अधपका मांस या खाने पर इस बीमारी का खतरा होता है. संक्रमित गाय के गोबर से भी ये बैक्टीरिया इंसानी शरीर तक पहुंच सकता है. पेट में दर्द, डायरिया, बुखार, शरीर में ऐंठन और उल्टियां इसके मुख्य लक्षण हैं. मांस अच्छी तरह से पकाकर खाने, चिड़ियाघर से लौटने या जानवरों को छूने के बाद हाथ धोने से इस बीमारी से बचा जा सकता है.

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