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कैसे गाड़ियों के टायरों की वजह से मर रही हैं नदियों में मछलियां

शोध में पता चला है कि कार टायर (Car Tyre) के कैमिक्ल्स (Chemicals) नदियों में पहुंच कर मछलियों (Fishes) की मौत का कारण बन रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
शोध में पता चला है कि कार टायर (Car Tyre) के कैमिक्ल्स (Chemicals) नदियों में पहुंच कर मछलियों (Fishes) की मौत का कारण बन रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

टायर (Tyres) जल्दी खराब न हों इसके लिए उनमें एक खास केमिकल (Chemical) का उपयोग किया जाता है जो पानी में घुल कर एक प्रदूषण बन जाता है जो नदियों में मछलियों (Fishes) के लिए जानलेवा होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 1:29 PM IST
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क्या गाड़ियों (Vehicles) के टायरों (Tyres) से भी नदियों (Rivers) में रहने वाली मछलियों (Fishes) को कुछ नुकसान हो सकता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यही पाया है कि कार के टायरों में उपयोग होने वाले जहरीले रसायन (Toxic Chemicals) से नदियों का पानी प्रदूषित (Polluted) हो रहा है. यही प्रदूषण नदियों की मछलियों के लिये जानलेवा साबित हो रहा है. शोधकर्ताओं ने चेताया है कि अगर यही स्थिति रही तो हालात बहुत खतरनाक हो सकते हैं.

कैसे पहुंचता है यह नदियों में
अमेरिका में हुए इस शोध में पता चला है कि नदियों में जहर फैलने से सालमन मछलियां मर रही हैं. वे ऐसे जहरीले रसायन से मर रही हैं जो टायरों में उपयोग किए जाने वाले पदार्थ से बनता है. यह पदार्थ टायरों की उम्र बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. जब टायरों के घिसने से सूक्ष्मकण रास्तों पर बिखरते हैं तो ये सूक्ष्म कण पानी में मिलकर अंततः नदियों में पहुंच जाते हैं और उन्हें प्रदूषित कर देते हैं.

क्या है यह रसायन
साइंस जर्नल में प्राकाशित अध्ययन में पाया गया है कि नदियों मे जो  खतरनाक केमिकल सूप जैसे पदार्थ मछलियों की जान ले रहा है वह असल में 6PPD है जो टायरों की ओजोन के साथ प्रतिक्रिया होने रोकता है. यह ओजोन कार के इंजन के धुंए से निकलती है. समस्या 6PPD से ज्यादा उससे बनने वाले दूसरे रसायन से है जो तेजी से बड़ी मछलियों को मार देता है. यह पूरी दुनिया में सड़कों से पानी की स्रोतों, खास तौर पर नदियों में पहुंचता है इससे मछलियों का प्रजनन प्रभावित होता है.



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कर्ताओं ने पाया कि नदियों (Rivers) में सालमन मछलियां (Fish) तेजी से मर रही हैं.(तस्वीर: Pixabay)






तेजी से मर रही हैं मछलियां
हर पतझड़ में अमेरिका के पुगेट साउंड के शहरी नाले नदियों में रहने वाली कम से कम आधी कोहो सालमन मछलियां प्रजनन का मौका मिलने से पहले ही मर रही हैं. इससे भी बुरी बात यह है कि कुछ नदियों में तो सभी सालमन मछलियां मर रही हैं और अब वॉशिंगटन के शोधकर्ताओं ने इसकी वजह पता लगा ली है. उन्हें पता चला है कि इसके लिए 6PPD ही जिम्मेदार है. जो टायरों में इसलिए डाला जाता  है कि टायर बहुत जल्दी न टूट सकें जैसे किचन में फूड प्रिजर्वेटिव काम करते हैं.

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लोगों को नहीं पता
टायरों में देर सवेर टूटफूट होती ही है और वे घिसते ही हैं जिससे उनके महीन टुकड़े बारिश के बाद नदियों में पहुंच जाते हैं. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के एनवायर्नमेंटल केमिस्ट और इस शोध के प्रमुख लेखक एडवर्ड क्लॉजिएच का कहना है कि बहुत से लोगों को लगता है कि हम जानते हैं कि कौन से रसायन जहरीले हैं और पानी की शुद्धता को कायम रखने के लिए हमें इन रसायनों की मात्रा ही नियंत्रित करनी है.

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सालमन मछलियां (Salmon Fish) प्रजनन के लिए साफ पानी में लौटती हैं. (तस्वीर: Pixabay)


दो हजार रसायनों में से खोजा जहर
क्लॉजिएच ने बताया, “वास्तव में जानवर इन बड़े कैमिकल सूप को झेल रहे हैं और हम नहीं जानते कि इसमें कितने रसायन हैं. यहां हमने 2000 रसायनों के मिश्रण से शुरुआत की और उनकी पड़ताल करते हुए एक बहुत ही जहरीले रसायन तक पहुंचे जो बड़ी मछलियों को तेजी से मार देता है. हमें लगता है कि यह दुनिया की हर व्यस्त सड़क पर पाया जाता है.”

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क्यों बहुत बड़े खतरे का संकेत है ये
कोहो सालमन मछिलायों साफ पानी में पैदा होती हैं जहां वे अपने जीवन का पहला साल गुजारती हैं इसके बाद वे खुले समुद्र में जाकर अपना बाकी जीवन गुजार देती हैं. लेकिन इनमें से 0.1 प्रतिशत मछलियां साफ पानी में अपने मूल स्रोत की ओर लौटती हैं और मरने से पहले उस पानी में अंडे देती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया है कि वापसी करने वाली सालमन मछलियां प्रजनन से पहले ही मर रही हैं.
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