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बिल्ली पालने वालों को है इस जानलेवा बीमारी का खतरा, शोध में हुआ खुलासा

इस बीमारी के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं  (सांकेतिक तस्वीर)
इस बीमारी के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं (सांकेतिक तस्वीर)

सिर्फ मांसाहार ही बीमारियों की वजह नहीं, पालतू जानवर भी खतरनाक बीमारियां दे सकते हैं. जैसे बिल्ली पालने वालों को टॉक्सोप्लाजमोसिस (Toxoplasmosis) नाम बीमारी (disease) का खतरा रहता है, जो जानलेवा भी हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 8, 2020, 10:24 AM IST
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चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस की शुरुआती रिपोर्ट्स में साफ है कि ये वायरस एग्जोटिक जानवरों (जैसे चमगादड़, सांप) को खाने के कारण इंसानों में आया. इसके बाद से रेड मीट और खासकर अधपके मांस से दूरी बरतने की बात हो रही है. मांस खाने की वजह से पहले भी कई बीमारियां फैलती रही हैं, जैसे मैड काऊ से लेकर बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू तक. इस वजह से एक्सपर्ट्स एग्जोटिक माने वाले जानवरों को न खाने की सलाह दे रहे हैं. वहीं एनिमल-लवर्स के लिए भी एक बुरी खबर है. माना जा रहा है कि बिल्ली पालने वालों को एक खास किस्म का संक्रमण हो सकता है. इसे टॉक्सोप्लाजमोसिस के नाम से जाना जाता है. बीमारी के लक्षण फ्लू से मिलते -जुलते होते हैं इसलिए कई बार मरीज को इसका पता ही नहीं चलता है, जब तक कोई गंभीर नुकसान न हो जाए.

क्या है ये बीमारी
टॉक्सोप्लाजमोसिस दूषित पानी, पालतू बिल्ली के अपशिष्ट या अधपके खाने, खासकर मांसाहारी खाने से होने वाला संक्रमण है. यह संक्रमण दुनियाभर के लगभग एक तिहाई लोगों में पाया जाता है लेकिन आमतौर पर इसके परजीवी जिन्हें टी गोंडियाई कहा जाता है, मस्तिष्क के भीतर सुप्तावस्था में रहते हैं. हालांकि कई लोगों में संक्रमण के गंभीर होने पर यह सक्रिय हो जाते हैं और कई तरह की समस्याओं का कारण बनते हैं. इन्हीं में से एक रेज डिसआर्डर या टॉक्सोप्लाजमोसिस है. US National Library of Medicine की मानें तो भारत में हर साल 22.4% लोगों में इसका खतरा होता है, जिनमें से लगभग 1.43% व्यक्ति इस परजीवी से इंफेक्टेड पाए जाते हैं.

बिल्ली पालने वालों को टॉक्सोप्लाजमोसिस नाम की बीमारी का खतरा रहता है

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जिन घरों में बिल्ली पाली जाती है, वहां इस बीमारी के संक्रमण की आशंका ज्यादा रहती है. बिल्ली संक्रमित मांस खाती है और फिर अपने मल के जरिए इस बीमारी के परजीवी फैला देती है. Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी के परजीवी से प्रभावित हो सकते हैं. अगर मरीज का इम्यून सिस्टम मजबूत है तो बीमारी के बावजूद उसके दुष्प्रभाव नहीं दिखते हैं, वहीं अगर मरीज कोई गर्भवती महिला है तो इसके गंभीर असर दिखते हैं. जैसे गर्भ में ही शिशु की मौत या फिर शिशु का मानसिक-शारीरिक तौर पर विकलांग होना. इन हालातों में पालतू जानवर रखने वाले घरों में महिला की प्रेगनेंसी के दौरान ही इसकी जानकारी डॉक्टर को दी जानी चाहिए.

ये हैं खतरे
इसके अलावा नवजात शिशुओं में भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. बिल्ली के आसपास बने होने या फिर संक्रमित व्यक्ति के पास रहने पर इनका मस्तिष्क तो प्रभावित होता ही है, आंखों की रोशनी भी जा सकती है. शरीर का कोई अन्य अंग भी इससे प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज में इसके लक्षण लगभग तीन हफ्तों के दौरान दिखते हैं. जोड़ों में दर्द, बुखार, सर्दी-खांसी और सांस लेने में समस्या जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इलाज न मिलने पर हालात बिगड़ते जाते हैं. मरीज को बात-बात पर गुस्सा आना भी इसका एक लक्षण है. गंभीर हालातों में मरीज किसी को मारने या खुदकुशी करने तक भी आ सकता है.

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज में इसके लक्षण तीन हफ्तों के दौरान दिखते हैं


इस तरह रखें सावधानी
टॉक्सोप्लाजमोसिस के संक्रमण से बचने के कुछ आसान तरीके हैं. मसलन, सब्जियां या खाने की किसी भी सामग्री को अच्छी से धोकर पकाएं. बाहर जाने पर यदि पानी के स्त्रोत की जानकारी न हो तो पानी पीने से बचें, डिब्बाबंद पानी या अपने घर से पानी कैरी करना अच्छे विकल्प हैं. यदि घर पर पालतू बिल्ली है तो उसे यथासंभव साफ रखने की कोशिश करें. उसके छूने के बाद हमेशा साबुन से हाथ धोएं,खासकर खाना पकाते वक्त. बिल्ली की गंदगी साफ करते वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इस दौरान संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. अगर आपके घर पर बच्चे, बुजुर्ग या गर्भवती महिलाएं हैं तो उन्हें इस साफ-सफाई की प्रक्रिया से दूर रखना ही बेहतर है क्योंकि ऐसे में संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एम्स, भोपाल में कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ सूर्या बाली कहते हैं कि टॉक्सोप्लाजमोसिस एक तरह के परजीवी टी. गोंडियाई से होने वाला संक्रमण है. इसे ‘क्रेजी कैट लेडी सिंड्रोम’ के नाम से भी जाना जाता है. वैसे तो लगभग आधी आबादी इससे प्रभावित है लेकिन प्रायः रोग के परजीवी सुप्तावस्था में होते हैं और संक्रमण के लक्षण फ्लू जैसे दिखाई पड़ते हैं. हालांकि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या ऐसे लोगों, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है, के संक्रमित होने पर उनमें यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है. ऐसे में यह सीधे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर करते हैं और मरीज को झटके आना, गुस्से के दौरे, अवसाद जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं. यह बिल्ली के अपशिष्ट के अलावा अधपका मांस खाने से भी हो सकता है. रक्त, एम्नियोटिक फ्लूइड की जांच से बीमारी का पता लगाया जा सकता है. इलाज बीमारी के प्रकार और मरीज की अवस्था पर निर्भर है. साथ ही घर में पालतू बिल्ली रखने पर कुछ सामान्य सावधानियां बीमारी से बचा सकती हैं.

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