किन देशों में सेना और पुलिस में शामिल किए जाते हैं ट्रांसजेंडर?

किन देशों में सेना और पुलिस में शामिल किए जाते हैं ट्रांसजेंडर?
साल 2019 के अप्रैल तक कुल 19 देश ऐसे हो गए, जहां ट्रांसजेंडरों की सेना में भर्ती होने लगी

दुनियाभर में कुल 19 देश ऐसे हैं, जहां ट्रांसजेंडर सेना में भर्ती (transgender recruitment in military) हो रहे हैं, हालांकि सुपर पावर अमेरिका इनमें शामिल नहीं.

  • Share this:
भारत में पैरामिलिट्री फोर्स में अब महिलाओं और पुरुषों के साथ-साथ ट्रांसजेंडरों की भी नियुक्ति की बात उठी है. होम मिनिस्ट्री ने असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा में ट्रांसजेंडरों को भी थर्ड जेंडर की तरह शामिल करने की बात की है. इस बारे में सुरक्षा बलों से राय मांगी गई है. अगर वे सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं तो इसी साल के अंत में सीएपीएफ (सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स) में उन्हें भी भर्ती का मौका मिल सकेगा. वैसे सेना या पुलिस में भर्ती की ट्रांसजेंडरों की राह आसान नहीं रही. इसपर लगातार काफी विवाद होते रहे. किसी ने इनके होने की वकालत की तो किसी नेता ने आते ही इनको जोड़े जाने पर रोक लगा दी. जानिए, किन देशों में सेना में होती है थर्ड जेंडर की भर्तियां.

साल 2019 के अप्रैल तक कुल 19 देश ऐसे हो गए, जहां ट्रांसजेंडरों की सेना में भर्ती होने लगी. ये देश हैं- ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बोलिविया, कनाडा, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इजरायल, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम. क्यूबा और थाइलैंड में भी ट्रांसजेंडरों की सैन्य भर्तियां शुरू हुईं लेकिन वे सीमित तरीके से की जा रही हैं. यानी खुली भर्ती नहीं हो रही और जो भर्तियां हो भी रही हैं, वे कुछ ही विभागों के लिए हैं.

पैरामिलिट्री फोर्स में अब महिलाओं और पुरुषों के साथ-साथ ट्रांसजेंडरों की भी नियुक्ति की बात उठी है




साल 1974 में नीदरलैंड्स वो पहला देश बना, जिसने अपने यहां थर्ड जेंडर को मिलिट्री में जगह दी. वहीं सुपर पावर अमेरिका में साल 2016 में तत्कालीन प्रेसिडेंट ओबामा की सरकार ने ट्रांसजेंडर नीति बनाई. इसके बाद से थर्ड जेंडर लोगों को मिलिट्री में भर्ती किया जाने लगा, हालांकि ट्रंप के आते ही इसपर रोक लग गई. ट्रंप ने एक मेमोरेंडम जारी करवाया. इसमें रोक के लिए तर्क ये था कि ट्रांसजेंडरों का आना सेना के प्रभाव और क्षमता को कम कर सकता है. इसमें कई बदलाव हुए. अब ढेर सारी पाबंदियों के साथ कुल 8,980 ट्रांसजेंडर अमेरिकी सेना में हैं.
ये भी पढ़ें: बीजिंग के नीचे बसा खुफिया शहर, जिसे लाखों लोगों ने हाथों से खोदकर बनाया

क्यों सेना में भर्ती पर रहा विवाद
मिलिट्री में इन्हें लिए जाने पर हमेशा से बवेला मचता रहा. इन्हें रोकने वाले समुदाय के अलग-अलग तर्क हैं. जैसे एक बड़ा समूह मानता है कि ट्रांसजेंडर होना एक तरह की मानसिक बीमारी है और इसलिए वे मिलिट्री या ताकत वाले किसी भी काम के लिए फिट नहीं हैं. ट्रांसजेंडरों में डिप्रेशन और खुदकुशी के बढ़े हुए मामले भी ऐसे तर्क को हवा देते हैं. कई बार लोग अपना जेंडर बदलवाने के लिए हार्मोन थैरेपी भी लेते हैं. तब भी हार्मोन्स की वजह से मानसिक संतुलन पर असर होता है. इसे भी ट्रांसजेंडरों को न लेने के लिए तर्क की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है. जेंडर चेंज कराने के लिए काफी लोग एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरॉन थैरेपी लेते हैं. इनकी वजह से शरीर में कई समस्याएं और बीमारियां पैदा होती हैं. इस वजह से भी मिलिट्री में उन्हें न लेने की वकालत की जाती रही.

मिलिट्री में इन्हें लिए जाने पर हमेशा से बवेला मचता रहा


बाद में इजरायल डिफेंस फोर्स, ब्रिटिश आर्म्ड फोर्स और कनाडियन आर्म्स फोर्स में एलजीबीटी समुदाय की खुली भर्ती हुई. इस दौरान देखा गया कि ट्रांसजेंडरों के सेना में होने से सेना की एकता और जोश पर कोई गलत असर नहीं होता है. इसके बाद से काफी सारे देशों से अपने यहां थर्ड जेंडर भर्ती शुरू कर दी. वैसे नीदरलैंड्स को ट्रांसजेंडरों की खुली भर्ती का श्रेय जाता है लेकिन ज्यादातर देशों में भी लगभग साथ ही साथ एलजीबीटी भर्तियां होने लगी थीं. साल 1997 में कनाडा के सार्जेंट सिल्वियन डुरेंड ने सेना में रहते हुए ही अपना लिंग परिवर्तन कराया. अगले ही साल सेना ने सिल्वियन का नाम सिल्विया करते हुए उनके सारे कागजात पर जेंडर फीमेल लिख दिया और सिल्विया सेना का हिस्सा बनी रहीं. ये अपनी तरह का पहला और सबसे साहसिक मामला था.

ये भी पढ़ें: चीन में मुस्लिमों पर बर्बरता की एक और कहानी, हेयर प्रोडक्ट बनाने महिलाओं के काटे जा रहे बाल

हमारे देश में एलजीबीटी समुदाय आबादी का एक बड़ा हिस्सा है. वैसे समाज में ट्रांसजेंडरों को अलग तरह से देखे जाने के कारण अब तक ये साफ नहीं है कि जनसंख्या में कितना हिस्सा ट्रांस है लेकिन साल 2011 की जनगणना के मुताबिक देश भर में कुल 4,90,000 ट्रांसजेंडर हैं. यानी अगर मिलिट्री में ट्रांस भर्तियां हो सकें तो सेना को और भी मजबूती मिल सकेगी.

एक बड़ा समूह मानता है कि ट्रांसजेंडर होना एक तरह की मानसिक बीमारी है -सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


बता दें कि पिछले ही साल संसद ने ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रॉटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल, 2019 पास किया. इसके तहत ट्रांस समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं. पैरामिलिट्री में ट्रांसजेंडरों की भर्ती की बात उठना भी इसी ओर पहल है.

ये भी पढ़ें: म्यांमार का वो टेरर ग्रुप, जिसे भारत में आतंक फैलाने के लिए चीन दे रहा है हथियार 

वैसे देश में पुलिस में भी ट्रांसजेंडर नियुक्तियां होने लगी हैं. पृथिका यशिनी भारत की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस सब-इंस्पेक्टर हैं. प्रदीप कुमार के तौर पर जानी जानी पृथिका ने लिंग परिवर्तन सर्जरी कराई और इसके बाद से पुलिस में शामिल होने की लड़ाई लड़ने लगीं. पुलिस भर्ती कॉलम में पृथिका ने महिला कॉलम भरा. वे रिजेक्ट हो गईं. तब इन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली. मामले पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने ट्रांसजेंडर के कॉलम की व्यवस्था करवाई और पृथिका इस तरह से साल 2015 में देश की पहली ट्रांस पुलिस अधिकारी बनीं. तब से अब तक कई ऐसे मामले आ चुके हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading