इन मुल्कों में चल रहा है कोरोना वायरस के टीके पर काम, शुरू हुआ ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल

इन मुल्कों में चल रहा है कोरोना वायरस के टीके पर काम, शुरू हुआ ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल
शी ने कोरोना वायरस का बायोस्‍ट्रक्‍चर तैयार कर पब्लिश किया. इस शोध के आधार पर चीन में कोरोना वायरस बनने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकी है.

कोरोना वायरस वैक्सीन (vaccine of coronavirus) के पहले ट्रायल में शामिल 45 प्रतिभागियों को सालभर तक निगरानी में रखा जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2020, 2:31 PM IST
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कोरोना वायरस (coronavirus) संक्रमण का मामला 180,000 का आंकड़ा पार कर चुका है. वहीं मरने वालों की संख्या भी 7 हजार से ज्यादा है. अब लंबे इंतजार के बाद सोमवार से इसके टीके के ट्रायल का पहला चरण शुरू हो चुका है.

कोरोना वायरस का कोहराम मचने के बाद से दुनियाभर के वैज्ञानिक इसके टीके की खोज में लगे हुए हैं. इसी बीच National Institute of Allergy and Infectious Diseases की देखरेख में कोविड-19 के वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है. वैक्सीन को mRNA-1273 नाम दिया गया है. टेस्ट के पहले चरण का मकसद ये देखना है कि इंसानी शरीर पर ये टीका कैसी प्रतिक्रिया करता है. ये जानने में लगभग 3 महीने लग सकते हैं कि टीका कितना सुरक्षित है या फिर कितना प्रभावी है.

किनपर हो रहा है ट्रायल
ट्रायल के लिए सिएटल को चुना गया है. ओपन लेवल ट्रायल के पहले दौर में 45 लोग लिए जा रहे हैं. बता दें कि ये 45 लोग केवल वालंटरी ढंग से इस ट्रायल में शामिल हुए हैं और 18 से 55 साल की उम्र के बीच के ये लोग हर तरह से स्वस्थ हैं. इसके बाद बड़े स्तर पर ट्रायल होगा, जिसमें सैकड़ों मरीजों को शामिल किया जाएगा. r. Fauci कहते हैं कि चाहे कितनी ही तेजी से ये काम किया जाए तो भी इसमें 6 से 8 महीने और लगेंगे. सालभर तक वालंटियर्स के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी. इसमें सफलता मिलने के बाद बड़े स्तर पर यानी बाजार में टीका उतरने में लगभग एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है. लेकिन ये भी तभी संभव है जब दोनों ट्रायल्स में सफलता मिले. किसी भी स्तर पर नाकामयाबी मिलने पर दोबारा नए सिरे से जेनेटिक सीक्वेंस पर काम करना होगा.



बाजार में टीका उतरने में एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है




टीके की टाइमलाइन क्या है
Food and Drug Administration की इजाजत के बाद शुरू हुई इस स्टडी में investigational vaccine के अलग-अलग डोज लगभग 6 हफ्ते तक दिए जाने वाले हैं और देखा जाएगा कि प्रतिभागियों का इम्यून सिस्टम इसपर कैसी प्रतिक्रिया करता है. शोध में शामिल Dr. Anthony Fauci ने पूरी प्रकिया पर संतोष जताते हुए कहा कि वैज्ञानिकों ने बहुत तेजी से इसपर काम किया. हालांकि काम का रिजल्ट देखना अभी बाकी है. बता दें कि अमेरिका की नामी-गिरामी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Moderna ने सोमवार 24 फरवरी को एक प्रेस वार्ता में बताया था कि वे COVID-19 के टीके की पहली खेप NIAID (National Institute of Allergy and Infectious Diseases) को भेज चुके थे. इसी का इस्तेमाल ट्रायल में हो रहा है. हालांकि NIAID प्रमुख Dr. Fauci बार-बार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि टीके की टाइमलाइन इसी बात पर निर्भर है कि वो इंसानी शरीर पर कैसी प्रतिक्रिया करता है.

किस तरह तैयार हुआ टीका
जनवरी में जैसे ही चीनी एक्सपर्ट्स ने कोरोना वायरस के जेनेटिक सीक्वेंस का खुलासा किया, उसके बाद से ही काम शुरू हो गया. फार्मा कंपनी Moderna ने इसके लिए Ribonucleic acid (RNA) का इस्तेमाल किया. आरएनए एक मॉलिक्यूल है जो जेनेटिक कोडिंग के काम आता है. चूंकि कोरोना वायरस के बारे में अबतक कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है, इस वजह से वैज्ञानिक उसी जानकारी पर काम कर रहे हैं जो सार्स और मर्स (Middle East respiratory syndrome) के बारे में पहले से जानते हैं. हालांकि ये भी तय है कि ट्रायल के दौरान टीके के उम्मीदों पर खरा आने पर भी कोरोना की वैक्सीन 1 साल से पहले आम लोगों के लिए मार्केट में नहीं आ सकेगी.

टीके की टाइमलाइन इसपर निर्भर है कि वो इंसानी शरीर पर कैसी प्रतिक्रिया करता है


ये देश भी कर रहे खोज
मॉडर्ना पहली कंपनी है जो कोरोना वायरस के क्लिनिकल ट्रायल तक पहुंच सकी लेकिन कोरोना की भयावहता को देखते हुए इसपर कई तरह की स्टडी की जा रही है. ऑस्ट्रलिया में Institute for Infection and Immunity के वैज्ञानिक Peter Doherty के अनुसार उनकी टीम वायरस को समझने की दिशा में बड़ा कदम उठा चुकी है. कोरोना के पहले मरीज के खून की जांच के जरिए उन्हें ये समझने में काफी मदद मिली है कि वायरस का हमला होने पर मरीज का इम्यून सिस्टम कैसे काम करता है. इस फाइंडिंग से ये समझ आ सका है कि एक ही वायरस के हमले पर अलग-अलग शरीर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया कैसे करते हैं. कोरोना पर चल रहे शोधों और खोजों के बीच ऑस्ट्रेलिया के Health Minister Greg Hunt ने इस जानकारी को बीमारी के इलाज की दिशा में बहुत जरूरी जानकारी माना है. ये खबर Reuters में प्रकाशित हुई है.

चीन और जर्मनी भी शामिल
जर्मनी स्थित CureVac फार्मास्यूटिकल कंपनी भी दावा कर रही है कि वो गोल्बल कोऑपरेशन नेटवर्क के तहत कोरोना वायरस का टीका बनाने और उसे दुनियाभर के प्रभावित देशों को उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं. Altimmune नाम एक अमेरिकन मेडिसिन कंपनी भी इस ओर काम कर रही है. ये कंपनी अपने टीके को पहले से ही खोजे जा चुके फ्लू के टीके NasoVAX की तर्ज पर बनाने की कोशिश में है. चीन में Inovio Pharmaceuticals और Beijing Advaccine Biotechnology इसपर मिलकर काम कर रहे हैं. INO-4800 नाम से तैयार टीके का प्री-क्लनिकल ट्रायल भी शुरू हो चुका है. यहां तक कि प्री ट्रायल की सफलता के बाद कंपनी ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के लिए 3,000 सैंपल भी तैयार कर चुकी है. माना जा रहा है कि अप्रैल में ये शुरू हो जाएगा.

वैसे तो दुनियाभर में एक दर्जन से भी ज्यादा फार्मास्यूटिकल कंपनियां कोविड-19 का टीका खोजने में लगी हुई हैं. WHO इन सारी कंपनियों का डाटा और खोज को कंपाइल करने में जुटा है.

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