जानिए कैसे पेड़ों की रिंग्स में मिले सुदूर सुपरनोवा के पृथ्वी पर असर के प्रमाण

हमारी गैलेक्सी (Galaxy) में हुए सुपरनोवा (Supernova) के विस्फोट के पृथ्वी (Earth) पर हुए प्रभाव के संकेत मिले हैं.
हमारी गैलेक्सी (Galaxy) में हुए सुपरनोवा (Supernova) के विस्फोट के पृथ्वी (Earth) पर हुए प्रभाव के संकेत मिले हैं.

सुपरनोवा (Supernova) के पृथ्वी (Earth) पर हुए प्रभाव को जानने के लिये जब शोधकर्ताओं ने पेड़ों की रिंग्स (Rings) में सुराग खोजे तो उन्हें चौंकाने वाली जानकारी मिली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:37 PM IST
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पृथ्वी (Earth) से हजारों प्रकाशवर्ष दूर हुए ऊर्जा के विशाल विस्फोटों (Big Energy Explosions) ने हमारे ग्रह के जीवन और भूगर्भ में कुछ संकेत छोड़े थे. हाल ही में हुआ शोध यही कह रहा है. बह्माण्ड (Universe) में हुए सुपरनोवा (Supernovae) प्रस्फोट के पृथ्वी पर हुए प्रभावों को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने पृथ्वी पर पेड़ों के छल्लों (Rings) के रिकॉर्ड का अध्ययन किया. इस शोध में बताया गया है कि अंतरिक्ष में हुई सुपरनोवा की घटना से हमारी पृथ्वी पर जीवन भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका.

सुपरनोवा का प्रभाव
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोरॉडो बोउल्डर के जियोसाइंटिस्ट रोबर्ट ब्रेकनरिज का अध्ययन इसी महीने इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एस्ट्रबायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है जिसमें सुपरनोवा के प्रभाव का अध्ययन किया गया है. इस शोध में बताया गया है कि केवल कुछ ही महीनों के अंतर में सुपरनोवा का एक प्रस्फोट सूर्य की जीवन काल की ऊर्जा उत्सर्जित कर सकता है. ये सुपरनोवा बहुत ही चमकदार होते हैं.

बहुत ही ज्यादा चकमदार घटना
ब्रेकनरिज का कोलोरॉडो यूनिवर्सटी के इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कटिक एंड एल्पाइन रिसर् में वरिष्ठ शोध एसोसिएट हैं. उन्होंने बताया, “हम दूसरी गैलेक्सी में हमेशा ही सुपरनोवा देखते रहते हैं. टेलीस्कोप में एक गैलेक्सी छोटे धब्बे की तरह दिखती है, फिर अचानक ही एक तारा दिखाई देता है और वह गैलेक्सी के अन्य हिस्से के बराबर चमकदार होता है.



पूरी मानवजाति को नष्ट करने में सक्षम
हमारी ही गैलेक्सी में पृथ्वी के पास के सुपरनोवा पूरी मानव जाति को नष्ट करने की क्षमता होती है. कुछ दूर से भी ये सुपरनोवा के विस्फोट हमारे ग्रह में खतरनाक विकिरण की बारिश कर हमारी ओजोन परत का खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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इस अध्ययन से इतना तो साफ हुआ है कि पृथ्वी (Earth) खगोलीय घटनाओं से हमेशा अप्रभावित नहीं रहती. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


पेड़ों की छल्लों का अध्ययन
इन संभावित असर के अध्ययन के लिए ब्रेकनरिज ने हमारे ग्रह के पेड़ों के छल्लों (Rings) का अध्ययन किया जिससे उन्हें इन खगोलीय विस्फोटों के फिंगरप्रिंट मिल सकें. उनकी पड़ताल बताती है कि करीब 40 हजार साल पहले पृथ्वी की जलवायु को कम से कम चार बरा सुपरनोवा के प्रस्फोट से नुकसान हुआ था.

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अंतरिक्ष घटनाओं से अप्रभावित नहीं है पृथ्वी
ये नतीजे अभी तक निर्णायक तो नहीं हैं लेकिन एक संकेत जरूर दे रहे हैं कि जब पृथ्वी पर स्थायित्व की बात आती है तो अंतरिक्ष में होने वाली घटना अंतरिक्ष तक ही सीमित हो ऐसा जरूरी नहीं है. ब्रेकनरि ने बताया कि इन घटनाओं के प्रभाव पेड़ों के रिंग रिकॉर्ड से मेल खाते दिखाई दे रहे हैं.

रेडियोकार्बन की भूमिका
ब्रेकनरिज को शोध कार्बन-14 पर आधारित है जिसे रेडियोकार्बन भी कहा जाता है. यह पृथ्वी पर बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है और यहां बनता भी नहीं है. रेडियो कार्बन तब बनता है जब अंतरिक्ष से आने वाला विकरण लागतार हमारे वायुमंडल पर गिरता है. ब्रेकनरिज के अनुसार कुछ पेड़ों ने इस रेडियो कार्बन वाला कार्बनडाइ ऑक्साइड का उपयोग किया. यह पाया गया कि कई बार रेडियोकार्बन की मात्रा पेड़ों में अचानक बिना किसी स्थानीय कारण के बढ़ गई.

सौर ज्वाला या सुपरनोवा
इसका कारण कई वैज्ञानिकों ने सूर्य ज्वाला बताया, लेकिन ब्रेकनरिज और कुछ अन्य शोधकर्ताओं का मानना है कि सुपरनोवा का कारण जल्दबाजी में खारिज किया लगता है. उन्होंने पाया कि वैज्ञानिकों ने दूसरी गैलेक्सी में ऐसे सुपरनोवा का अवलोकन किया है जिनसे विशाल मात्रा में गामा विकिरण निकलता है जो पृथ्वी पर रेडियो कार्बन का निर्माण कर सकते हैं.

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कई वैज्ञानिकों को यह सौर ज्वालाओं (Solar Flare) का असर लगा था.


40 हजार साल के रिकॉर्ड
वैसे तो रेडियो कार्बन नुकासनदायक नहीं होते लेकिन पेड़ों में उनकी अचानक वृद्धि बताती है कि हजारों प्रकाशवर्ष दूर स्थित सुपरनोवा के विकिरण पृथ्वी तक पहुंच गए होंगे. इसकी पुष्टि के लिए ब्रेकनरिज ने पृथ्वी के पास पिछले 40 हजार सालों में हुए सुपरनोवा की जानकारी जमा की. वैज्ञानिक इनके बारे में इनके द्वारा छोड़े गए नेबुला का अध्ययन कर जान सकते हैं. ब्रेकनरिज ने इन सुपरनोवा के समय और पृथ्वी के पेड़ों के छल्लों के रिकॉर्ड से इसका मेल किया.

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ब्रेकनरिज को ऐसे आठ नजदीकी सुपनोवा मिल गए. उन्होंने इनमें से चार को सबसे उपयुक्त पाया. उन समय में हुए प्रभावों का विस्तृत अध्ययन और ज्यादा शोध का विषय है.लेकिन ब्रेकनरिज को दोनों घटनाओं, यानि सुपरनोवा के विस्फोट और पेड़ों की छल्लों में रेडियो कार्बन के बढ़ने,  का समय मेल खाना उनके नतीजों के लिए उत्साहित करता है.
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