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कोरोना वायरस के लिए कुछ दवाओं का परीक्षण जारी, सबसे ज्यादा रेम्डेसिविर से उम्मीद: वैज्ञानिक

News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 7:32 PM IST
कोरोना वायरस के लिए कुछ दवाओं का परीक्षण जारी, सबसे ज्यादा रेम्डेसिविर से उम्मीद: वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों ने कहा, हमारे पास नई दवाएं विकसित करने के लिए समय नहीं है.

अमेरिका के थिंक टैंक मिल्कन इंस्टीट्यूट के एक ट्रैकर के मुताबिक कोविड-19 (Covid-19) के इलाज के लिए 130 से ज्यादा दवाओं (Medicines) को लेकर परीक्षण चल रहा है, कुछ में वायरस को रोकने की क्षमता हो सकती है.

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नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) का टीका आने में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है. ऐसे में वैज्ञानिक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अन्य बीमारियों में दी जाने वाली पुरानी दवाओं से क्या इस बीमारी की काट तैयार की जा सकती है. इस कड़ी में एंटीवायरल रेम्डेसिविर (Remdesivir) संभावित दावेदारों की सूची में सबसे आगे हैं.

कोविड-19 का प्रसार लगातार जारी है और दुनिया भर में इसके 52 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं जबकि शनिवार तक तीन लाख 38 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में इस बीमारी को लेकर कुछ श्रेणियों की दवाओं का नैदानिक परीक्षण चल रहा है. इनमें से रेम्डेसिविर (Remdesivir) ने कोविड-19 (Covid-19) के ठीक होने की दर तेज कर कुछ उम्मीदें जगाई हैं. इस दवा का परीक्षण पांच साल पहले खतरनाक इबोला वायरस (Ebola virus) के इलाज में किया गया था.

130 दवाओं पर चल रहा है परीक्षण
अमेरिका के एक स्वतंत्र आर्थिक थिंक टैंक मिल्कन इंस्टीट्यूट के एक ट्रैकर के मुताबिक कोविड-19 के इलाज के लिए 130 से ज्यादा दवाओं को लेकर परीक्षण चल रहा है, कुछ में वायरस को रोकने की क्षमता हो सकती है, जबकि अन्य से अतिसक्रिय प्रतिरोधी प्रतिक्रिया को शांत करने में मदद मिल सकती है. अतिसक्रिय प्रतिरोधी प्रतिक्रिया से अंगों को नुकसान पहुंच सकता है.



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रेम्डेसिविर से तेजी से ठीक हो रहे हैं मरीज
सीएसआईआर के भारतीय समवेत औषध संस्थान, जम्मू के निदेशक राम विश्वकर्मा ने बताया, 'फिलहाल, एक प्रभावी तरीका है…वह है अन्य बीमारियों के लिए पहले से स्वीकृत दवाओं का इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कि क्या उनका प्रयोग कोविड-19 के लिए हो सकता है. एक उदाहरण रेम्डेसिविर का है' विश्वकर्मा ने कहा कि रेम्डेसिविर लोगों को तेजी से ठीक होने में मदद कर रही है और इस दवा से गंभीर रूप से बीमार मरीजों की मौत की संख्या में कमी आई है. उन्होंने कहा, यह जीवन रक्षक हो सकती है.

5 से 10 साल में हो सकता है दवा का निर्माण
विश्वकर्मा ने कहा, 'हमारे पास नई दवाएं विकसित करने के लिए समय नहीं है. नई औषधि विकसित करने में 5-10 साल लग सकते हैं इसलिए हम मौजूदा दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह देखने के लिए नैदानिक परीक्षण कर रहे हैं कि वे प्रभावी है या नहीं.' उन्होंने कहा कि एचआईवी (HIV) और वायरल इंफेक्शन (Viral infections) के इलाज के तौर पर उपलब्ध कुछ अणुओं को नए कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ इस्तेमाल करके देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर इन्हें प्रभावी पाया जाता है तो औषधि नियामक संस्थाओं से उचित अनुमति हासिल कर कोविड-19 के खिलाफ इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.

फेवीपीराविर से भी है उम्मीदें
विश्वकर्मा के मुताबिक इसके अलावा फेवीपीराविर (Favipiravir) से भी कुछ उम्मीदें हैं और कोविड-19 के खिलाफ इसके प्रभावी होने को लेकर भी नैदानिक परीक्षण का दौर चल रहा है. सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर मांडे ने इस महीने घोषणा की थी कि हैदराबाद स्थित भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान ने फेवीपीराविर बनाने की तकनीक को विकसित किया है. उत्तर प्रदेश में स्थित शिव नादर विश्वविद्यालय में रसायन विभाग के प्रोफेसर शुभव्रत सेन भी इस बात से सहमत हैं कि जिन दवाओं का परीक्षण चल रहा है उनमें रेम्डेसिविर से सबसे ज्यादा उम्मीद है. सेन ने बताया कि जिन दवाओं का परीक्षण चल रहा है उनमें से कुछ एंटीवायरल है और कुछ एंटीमलेरिया और एंटीबायोटिक हैं.

इनपुटः भाषा से

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First published: May 23, 2020, 7:17 PM IST
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