Explained: कितना घातक है बंगाल में मिला ट्रिपल म्यूटेंट Coronavirus, क्या वैक्सीन होगी बेअसर?

देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है (Photo- news18 English via Reuters)

देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है (Photo- news18 English via Reuters)

देश में ट्रिपल म्यूटेंट कोरोना वायरस (triple mutant variant of coronavirus) भी फैलने लगा है. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार दिखने के कारण इसे बंगाल वेरिएंट भी कहा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:38 PM IST
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देश में कोरोना वायरस (coronavirus) का कहर जारी है. इस बीच बढ़ते संक्रमणों के बीच डबल म्यूटेंट वायरस (double mutant) सामने आया. इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग भी न हो सकी थी कि अब वायरस का ट्रिपल म्यूटेंट (triple mutant variant) भी चर्चा में है. जैसा कि नाम से समझ आता है, ये वायरस का वो रूप है, जिसमें एक या दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बार बदलाव हुआ. फिलहाल इसपर शोध होना बाकी है लेकिन आशंका जताई जा रही है कि वायरस का रूप बदलना काफी घातक हो सकता है.

म्यूटेशन क्या है

ट्रिपल म्यूटेशन को समझने के पहले एक बार ये जानते हैं कि आखिर म्यूटेशन क्या है. दरअसल वायरस भी ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे कि इंसान. हम खुद को आगे बढ़ाने के लिए नई चीजें सीखते हैं और अपडेट रहते हैं. यही तरीका वायरस भी अपने जीवित रहने के लिए अपनाता है. वो खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके. ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदलकर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं.

triple mutant variant coronavirus
म्यूटेशन की इस प्रक्रिया में कई बारवायरस वाकई काफी मजबूत हो जाते हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

क्या होता है म्यूटेशन से 

म्यूटेशन की इस प्रक्रिया में कई बार तो वायरस वाकई काफी मजबूत हो जाते हैं. और यहां तक डर रहता है कि वैक्सीन उनपर बेअसर हो जाएगी. वायरस की इसी प्रकृति को समझते हुए कई बीमारियों के लिए बूस्टर डोज दिया जाता है या फिर वैक्सीन को अपग्रेड किया जाता है. वहीं कई बार म्यूटेट होने पर वायरस कमजोर भी हो जाते हैं.

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डबल म्यूटेशन के मामले में वायरस के जीनोम में दो बार बदलाव दिखा

डबल म्यूटेंट का पहला जिक्र मार्च में हुआ था. तब सरकार ने कोरोना से प्रभावित 4 राज्यों- महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पंजाब से वायरस के सैंपल जमा करके उसपर रिसर्च की और ये नतीजा निकाला था. इसके साथ ही डर जताया जाने लगा कि वायरस का डबल म्यूटेंट ही बढ़ते संक्रमण के लिए जिम्मेदार है. हालांकि फिलहाल ऐसा निश्चित नहीं हो सका है.

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बंगाल में ट्रिपल म्यूटेंट 

सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) इसे समझने की कोशिश में थी ही कि इसी बीच ट्रिपल म्यूटेंट की चर्चा होने लगी. बता दें कि पश्चिम बंगाल में SARS-COV-2 के इस नए वेरिएंट का पता लगा है. ये वायरस के तीन अलग-अलग स्ट्रेन का एक कॉम्बिनेशन है या इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि वायरस के तीन रूपों ने मिलकर एक नया अवतार ले लिया.

triple mutant variant coronavirus
वैज्ञानिकों ने ट्रिपल म्यूटेंट को B.1.618 नाम दिया है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


ट्रिपल म्यूटेंट ज्यादा चालाक हो सकता है

 वैज्ञानिकों ने ट्रिपल म्यूटेंट को B.1.618 नाम दिया है. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि इसमें पाया जाने वाला जेनेटिक वेरिएंट ज्यादा चालाक है और उन लोगों के शरीर पर भी हमला कर सकता है, जिनके शरीर में पहले ही एंटीबॉडी बन चुकी है. यानी कोरोना से एक बार ठीक हो चुके लोग या फिर शायद वैक्सीन ले चुके लोग भी इसके हमले का शिकार हो सकते हैं. हालांकि ये बात भी अभी पुष्ट नहीं है.

किस तरह से बना ये रूप

इसमें वायरस की संरचना में कुछ चीजें गायब हुईं और कुछ जुड़ीं. ट्रिपल म्यूटेशन में कोरोना के वायरस से H146 और Y145 नामक स्पाइक प्रोटीन गायब हो गए. वहीं दो तरह की स्पाइक प्रोटीन्स में बदलाव हुआ. इन स्पाइक प्रोटीन्स को E484K और D614G कहा गया.

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कब से दिख रहा है म्यूटेशन 

पहला म्यूटेशन ब्रिटेन में मिला था, जिसे यूके वेरिएंट या फिर B.1.1.7 भी कहा गया. ये रूप पुराने वायरस से कई गुना ज्यादा संक्रामक माना गया. यहां तक कि इसके कारण मृत्यु दर भी बढ़ी थी और यूके में आनन-फानन लॉकडाउन लगाना पड़ा. इसके बाद ब्राजील में नया वेरिएंट मिला, जिसे B.1.351 नाम मिला. इसके मामले में दिखा कि कोरोना से ताजा उभरे मरीज भी इसकी चपेट में आने लगे थे.

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ट्रिपल म्यूटेशन के बाद हो सकता है कि वायरस इम्यून सिस्टम को धोखा देकर भीतर आ जाए- सांकेतिक फोटो (pixabay)


क्यों बंगाल म्यूटेंट पर चिंता हो रही 

अब भारत में ट्रिपल म्यूटेंट को बंगाल स्ट्रेन कहा जा रहा है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में सबसे पहले दिखने वाला ये रूप अब दिल्ली और महाराष्ट्र में भी दिखने लगा है. ये कितना घातक या संक्रामक है, इस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल सकी है लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें E484K म्यूटेशन दिख रहा है, जो चिंता का कारण है.

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एंटीबॉडी को धोखा देकर शरीर में घुस सकता है 

बता दें कि E484K म्यूटेशन को इम्यून एस्केप वेरिएंट कहा जा रहा है. यानी ये वो सिस्टम है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देकर अंदर घुस जाता है. इस बारे में मैकगिल यूनिवर्सिटी में एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ मधुकर पई ने एनडीटीवी के साथ अपनी बातचीत में कहा कि ये ज्यादा तेजी से फैलने वाला वायरस का रूप है. इसके कारण बहुत से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं.
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