जानें कौन हैं तृप्ति देसाई, जो सबरीमाला मंदिर में करना चाहती हैं प्रवेश

तृप्ति देसाई (फाइल फोटो)
तृप्ति देसाई (फाइल फोटो)

तृप्ति ने सबरीमाला के अलावा हाजी अली दरगाह, महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर, नासिक के त्रयंबकेश्वर, कपालेश्वर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर के द्वार महिलाओं के लिए खुलवाने में संघर्ष किया है.

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  • Last Updated: November 16, 2018, 11:19 AM IST
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केरल के बहुचर्चित सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं की एंट्री को लेकर जारी विवाद के बीच शुक्रवार को मंदिर के द्वार फिर खुल चुके हैं. इस बीच भूमाता ब्रिगेड की संस्‍थापक और सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई पुणे से कोच्चि पहुंच गईं है. तृप्ति देसाई ने ऐलान किया था कि वो आज मंदिर में दाखिल होंगी और भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगी. ऐसे में एयरपोर्ट के बाहर भारी भीड़ जमा है. यहां मौजूद लोग उनका विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी है कि चाहे जो हो जाए मंदिर की शांति को भंग नहीं होने दिया जाएगा. अगर तृप्ति देसाई मंदिर में एंट्री करने की कोशिश करेंगी, तो उन्हें विरोधियों की लाश से होकर गुजरना होगा.

सबरीमाला मंदिर के द्वार आज सुबह 5 बजे से 5:30 बजे तक खुले रहेंगे. तृप्ति देसाई अपने साथियों के साथ मंदिर जाने के लिए कोच्चि पहुंची हैं. उन्होंने बताया था कि राज्य में प्रवेश करने से लेकर वापस आने तक उन्हें सुरक्षा चाहिए होगी. उन्हें केरल आने पर 'बुरे परिणाम भुगतने' की धमकियां मिल चुकी हैं. कई लोगों ने खुदकुशी की धमकी भी दी है.

केरल के सबरीमाला मंदिर ही नहीं बल्कि देश के कई मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने में तृप्ति की अहम भूमिका रही है. 'भूमाता ब्रिगेड' संस्था की कार्यकर्ता तृप्ति ने सबरीमाला के अलावा हाजी अली दरगाह, महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर, नासिक के त्रयंबकेश्वर, कपालेश्वर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर के द्वार महिलाओं के लिए खुलवाने में संघर्ष किया.



कर्नाटक के बेल्जियम जिले के निपानी तलुका में जन्मीं तृप्ति की स्कूलिंग पुणे के विद्या विकास विद्यालय से हुई. आठ साल की उम्र में परिवार के साथ कोल्हापुर से पुणे शिफ्ट हुई. उन्होंने मुंबई की SNDT महिला यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया. लेकिन ग्रेजुएशन के पहले ही साल में कुछ पारिवारिक कारणों से कॉलेज छोड़ना पड़ा. इसके बाद में संस्था 'क्रांतीवीर झोपड़ी विकास संघ' की प्रेज़ीडेंट बनीं. इस दौरान वे स्लम इलाकों पर काम करती थीं.
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इलेक्शन भी लड़ चुकी हैं तृप्ति
उन्होंने भूमाता ब्रिगेड संस्था की स्थापना की, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में है. वे पहली बार 2007 में लाइम लाइट में तब आईं, जब उन्होंने 'अजीत को-ओपरेटिव बैंक' के चेयरमैन अजीत पवार पर 50 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया. इसके बाद वे 2012 के सिविक इलेक्शन में बालाजी नगर वार्ड से बतौर कांग्रेस कैंडिडेट खड़ी हुई.



2010 में उन्होंने भूमाता ब्रिगेड की स्थापना की. उसके बाद से वे धार्मिक जगहों पर महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटवाने के लिए जानी जाने लगीं. उनकी संस्था की शाखाएं अहमदनगर, नासिक और शोलापुर में भी हैं. इस संस्था से 5000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं. 2011 में उन्होंने अन्ना हजारे के IAC यानी इंडिया अगेंस्ट करप्शन में हिस्सा लिया.

आध्यात्मिक भी हैं तृप्ति
तृप्ति एक्टिविस्ट महिला के अलावा बेहद आध्यात्मिक भी हैं. ऐसा तृप्ति के पति प्रशांत मीडिया से बातचीत में जाहिर कर चुके हैं. वह और उनका पूरा परिवार गगनगिरी महाराज का शिष्य है और सभी धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं. तृप्ति के पति प्रशांत कम्यूनिकेशन कंपनी एयरटेल के फ्रेनचाइज़ी और लैंड डीलर हैं.



तृप्ति पर उठे थे सवाल
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश के लिए तृप्ति के आंदोलन ने जब देश की सुर्खियों में जगह पाई तो उनसे सवाल किए गए कि मंदिर तक महिलाओं को बसों में ले जाने से लेकर तमाम खर्च के लिए पैसा कहां से आता है. इस पर उन्होंने कहा था, कोल्हापुर के छत्रपति ग्रुप की तरह कई संस्थाएं हैं जो उनकी मदद करती हैं.

सितंबर 2016 में तृप्ति को जाने-माने रियलिटी शो 'बिग बॉस' में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था. इसपर उन्होंने बताया था, ''मैं बिग बॉस के घर में रहने के लिए तैयार हूं. अगर वे ‘बिग बॉस’ के तौर पर किसी महिला की आवाज को लेते हैं तो ही मैं उनका प्रस्ताव स्वीकार करूंगी.'' बता दें कि यह शो जब से शुरू हुआ है तब से इसमें बिग बॉस को पुरूष आवाज ही मिली है. तृप्ति एक बेटे की मां भी हैं, जिसका नाम योगीराज देसाई है.



सबरीमाला मंदिर में जाएंगी तृप्ति?
तृप्ति ने काफी समय से मंदिरों में प्रवेश के भेदभाव पर मुहिम चला रखी हैं. कोर्ट के फैसले के बाद तृप्ति ने सबरीमाला मंदिर आने के लिए कहा है. उन्होंने सरकार से सुरक्षा की मांग भी की है. तृप्ति को मंदिर न आने की सलाह के साथ मंदिर आने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है. कहा जा रहा है कि उन्हें किसी भी कीमत पर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है.

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