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Mizoram Assembly Election 2018: कांग्रेस के लिए 'नाक' का सवाल होगा मिज़ोरम जीतना

मिज़ोरम, उत्तर-पूर्व में कांग्रेस का आख़िरी गढ़ है

मिज़ोरम, उत्तर-पूर्व में कांग्रेस का आख़िरी गढ़ है

मिज़ोरम विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं, जिनमें से 39 सीटें केवल अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं.

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    मिजोरम में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव हुआ था और अब 11 दिसंबर को सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होने जा रही है. मतगणना ही तय करेगी की मिजोरम की कमान किस पार्टी को मिलने वाली है.

    मिज़ोरम की मौजूदा सरकार का कार्यकाल 15 दिसंबर को खत्म हो जाएगा. यहां कांग्रेस के लाल थनहवला अभी मुख्यमंत्री हैं. लगातार दो कार्यकाल पूरा कर चुके लाल थनहवला एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ताल ठोक रहे हैं.

    मिज़ोरम भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से ज्यादा है. निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मिज़ोरम में वोटरों की कुल संख्या मात्र 7.68 लाख है. इनमें से 3.93 लाख महिला वोटर हैं और 3.74 पुरुष वोटर हैं.

    मिज़ोरम विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं, जिनमें से 39 सीटें केवल अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं. वहीं लोकसभा में पूरे राज्य से केवल 1 सीट है और वह भी ST कैंडिडेट के लिए रिजर्व है.

    मिज़ोरम की राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

    #पिछले करीब एक दशक से मिज़ोरम में कांग्रेस ही सत्ता में है. हालांकि बीजेपी इस बार अपनी जगह बनाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है.

    # 2011 की जनगणना के अनुसार, 87.16 फीसदी मिज़ोरम की जनसंख्या ईसाई थी और ज्यादातर रिपोर्ट्स यही कहती हैं कि आज भी मिज़ोरम के ज्यादातर लोगों को बीजेपी से परहेज ही है.

    # मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां कांग्रेस के खिलाफ कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है. हालांकि दो मामलों में कांग्रेसी सरकार को असफलता हाथ लगी है- राज्य का मूलभूत विकास और शराबबंदी.

    # मिज़ोरम की सड़कें भी ख़राब हालत में हैं और कांग्रेस सरकार के पिछले 10 सालों के कार्यकाल में उनमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ है.

    # इसके साथ ही मिज़ोरम में शराब से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. कांग्रेस ने ही अपने कार्यकाल के दौरान शराब से प्रतिबंध हटा दिया था.

    # इन सारे मुद्दों का प्रयोग कर कांग्रेस के खिलाफ अपनी जगह बना पाना बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल होगा. हालांकि MNF (मिज़ो नेशनल फ्रंट) जरूर इसमें सफल हो सकता है. वैसे भी नॉर्थ-ईस्ट का यह राज्य 1984 से ही कांग्रेस और मिज़ो नेशनल फ्रंट के हाथों में सत्ता बदलता रहा है. इस बीच में 1988 में यहां पर राष्ट्रपति शासन भी लागू हुआ था.

    # हाल ही में कांग्रेस के दो नेताओं ने पार्टी छोड़कर MNF ज्वाइन कर ली थी.

    # 2008 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 40 में से 32 सीटें जीती थीं और उसे 39 फीसदी वोट मिले थे. जबकि MNF ने तीन सीटें जीती थीं और उसे 31 फीसदी वोट मिले थे.

    # 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के वोट प्रतिशत और सीटें दोनों ही बढ़े थे. कांग्रेस को इन चुनावों में 34 सीटें और 45 फीसदी वोट मिले थे, जबकि MNF का वोट प्रतिशत गिरकर 29 फीसदी हो गया था. हालांकि उसे 5 सीटों पर कामयाबी मिली थी. मिज़ोरम से आने वाले एक मात्र सांसद भी कांग्रेसी ही हैं.

    # हालांकि बीजेपी यहां पर अपनी स्थिति मजबूत करने के पूरे प्रयास कर रही है. इसी संबंध में अमित शाह ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में 7,000 बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और मुख्यमंत्री लाल थनहवला पर एक भ्रष्ट और वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री अपने छोटे भाई को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. जो उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री था.

    # हालांकि मात्र 7.68 लाख वोटरों वाले इस छोटे से राज्य मिज़ोरम में कांग्रेस के सामने नॉर्थ-ईस्ट का अपना आखिरी गढ़ बचाने की चुनौती है.

    यह भी पढ़ें: सिर्फ यही नेता राजस्थान में लगातार दो बार बन सका है बीजेपी से मुख्यमंत्री

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