जानिए क्या है BARC और यह कैसे तय करती है TV Channels की TRP

BARC टीवी चैनल्स (TV Channels) की रेटिंग (Rating) करने वाली संस्था है जिसके उपकरणों (Apparatus) से छेड़छाड़ की बात सामने आई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
BARC टीवी चैनल्स (TV Channels) की रेटिंग (Rating) करने वाली संस्था है जिसके उपकरणों (Apparatus) से छेड़छाड़ की बात सामने आई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मुंबई पुलिस का कहना है कि उसने तीन चैनलों की पहचान की है जो उन उपकरणों के साथ छेड़छाड़ करने के जिम्मेदार पाए गए हैं जिन्हें BARC टीवी चैनल्स को रेटिंग करने के लिए उपयोग में लाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 8:59 PM IST
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मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीवी चैनल्स (TV Channels) की रेटिंग से संबंधित टीआरपी स्कैम (TRP Scan) का खुलासा किया है. मुंबई पुलिस ने कहा है कि वह इस स्कैम से संबंधित पूरे मामले की गहराई से छानबीन करेगी. ऐसे में इस बात पर भी सवाल उठे हैं कि आखिर टीवी चैनल्स की रेटिंग कैसे तय होती है और इसके लिए जिम्मेदार संस्था BARC की क्या भूमिका है. इस संस्था की कार्यप्रणाली और उसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

क्या है मामला
मुंबई पुलिस का कहना है कि उसने तीन चैनलों की पहचान की है जो उन उपकरणों के साथ छेड़छाड़ करने के जिम्मेदार पाए गए हैं जिन्हें BARC टीवी चैनल्स को रेटिंग करने के लिए उपयोग में लाता है. बार्क (BARC) एक सैटटॉप बॉक्स के जरिए यह जानकारी हासिल करता है कि उपभोक्ता द्वारा कौन से चैनल देखे गए हैं जिसके आधार पर ही टीआरपी रेटिंग तय की जाती है.

क्या है यह BARC India
बार्क ब्रॉडकॉस्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया नाम की एक संयुक्त उद्योग उपक्रम है जिसे प्रसारणकर्ता (IBF), विज्ञापनदाता (ISA) और विज्ञापन और मीडिया एजेंसी (AAAI) का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टॉकहोल्डर निधिबद्ध करते हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा टेलीविजन मेजरमेंट निकाय है. BARC India साल 2010 में शुरू हुआ था और इसका मुख्यालय मुंबई में ही है.



अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है BARC
BARC की सबसे बड़ी खासियत आधुनिक तकनीक और उद्योग का मिश्रण है. यह व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित और भविष्य की तकनीक पर आधारित बताई जाती रही है. वहीं BARC India टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम के सटीक और पारदर्शी संचालन के लिए जिम्मेदार है.

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खास तकनीक का होता है उपयोग
BARC India ऑडियो वाटरमार्किंग तकनीक का उपयोग कर टीवी चैनल्स की व्यूअरशिप का मापन करती है. यह सिस्टम बैरोमीटर ( BAR-o-meters) के जरिए टीआरपी की मॉनिटरिंग करता है. मुंबई में करीब 2000 बैरोमीटर हैं.

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कैसे काम करती है ये तकनीक
पहले ऑडियो वाटरमार्क तकनीक का उपयोग कर प्रसारण के वीडियो में और उसके साथ दोनों में ही वाटरमार्क भेजे जाते हैं जिससे बैरोमीटर में वाटरमार्क सहित यह जानाकरी दर्ज हो जाती है कि उपभोक्ता कौन सा चैनल देख रहा है. इसके बाद इस जानकारी को अन्य संबंधित जानकारी के साथ जोड़ कर पूरे आंकड़े तैयार कर व्यूअरशिप डेटा के तौर पर जमा किया जाता है. इन्हीं आंकड़ों का मापन कर टीआरपी रेटिंग सहित अन्य जरूरी विश्लेषण भी किए जाते हैं. पूरी प्रक्रिया को यथासंभव पारदर्शी और सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है.

क्या है शिकायत
BARC ने इन बैरोमीटर की मॉनिटरिंग के लिए हंसा नाम की एजेंसी को इसका ठेका दिया था. हंसा रिसर्च ने शिकायत दर्ज करायी थी कि उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने उसके आंकड़ों का दुरुपयोग किया है जो कि टीआरपी मॉनिटरिंग सिस्टम में हैं. इसमें कुछ वर्तमान कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं.

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यहां दो बातें बहुत खास हैं. एक तो उपभोक्ता की गोपनीयता की सुरक्षा और दूसरे बैरोमीटर से हासिल किए गए आंकड़ों की सुरक्षा. इस मामले में समस्या आंकड़ों की सुरक्षा से संबंधित है. इस मामले में तकनीक को ज्यादा दोष इसलिए नहीं दिया जा सकता है क्यों शिकायत में पूर्व और वर्तमान कंपनी के कर्मचारी शामिल बताए गए हैं. लेकिन जो भी इस मामले के उजागर होने से BARC के सिस्टम की सुरक्षा पर सवालिया निशान तो लग ही रहा है.
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