क्यों अंतरिक्ष में गश्त लगाती दिखेगी अमेरिकी स्पेस फोर्स

ट्रंप ने घोषणा की है कि जल्द ही अमेरिका अपने स्पेस फोर्स तैयार करेगा. स्पेस फोर्स जो अमेरिका की स्पेस में भी रक्षा करेगी. लेकिन सवाल यह है कि ऐसी क्या मुसीबत आन पड़ी की अमेरिका को अपनी सेना स्पेस में भेजनी पड़ जाएगी. क्या है यह स्पेस फोर्स.

News18Hindi
Updated: June 19, 2018, 8:04 PM IST
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Updated: June 19, 2018, 8:04 PM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक नई घोषणा चर्चा में है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एक स्पेस फोर्स चाहता है जो स्पेस में अमेरिका की रक्षा करेगी. जैसा कि नाम से आपको समझ में आ रहा होगा स्पेस फोर्स से ट्रंप का आशय एक और सैन्य शाखा है. फिलहाल अमेरिकी सेना की पांच शाखा हैं आर्मी, एयरफोर्स, नौसेना, मरीन कॉप्स और कोस्ट गार्ड. ट्रंप इसमें स्पेस फोर्स को भी जोड़ना चाहते हैं जो कि ‘होगी एयरफोर्स जैसी ही लेकिन उससे एकदम अलग होगी.’ हालांकि यह साफ नहीं है कि ट्रंप का स्पेस फोर्स का सपना इतनी आसानी से पूरा हो पाएगा.

क्या है ट्रंप की स्पेस फोर्स घोषणा

सोमवार को ट्रंप ने स्पेस फोर्स के गठन से संबंधित शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए. हालांकि आदेश में स्पेस फोर्स के गठन के लिए जरूरी दिशा निर्देश नहीं लिखे गए थे. अगर यह फोर्स बनती है तो एयरफोर्स, अंतरिक्ष से संबंधित सेवाएं - जैसे अंतरिक्ष में जंग की तैयारी या अमेरिकी सैटेलाइट की रक्षा – बंद कर देगी. क्योकि इस काम के लिए स्पेस फोर्स होगी. ट्रंप ने कहा भी है कि हमारे पास एयरफोर्स है, और अब स्पेस फोर्स भी होगी. ये दोनों एक जैसे हैं, लेकिन अलग अलग हैं.

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ट्रंप के स्पेस फोर्स के विचार को आम सहमति नहीं मिल पाई है


क्यों स्पेस फोर्स का गठन आसान नहीं

ट्रंप काफी वक्त से स्पेस फोर्स का सपना संजोए बैठे हैं. लेकिन इसके लिए यूएस कांग्रेस (यानि संसद) की सहमति नहीं है. पिछले साल ही अमेरिकी कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को सीधे नकार दिया था. इस साल के रक्षा बजट बिल में भी संसद ने स्पेस से जुड़े खर्चे को एयरफोर्स में ही बनाए रखने पर जोर दिया. जानकारों का कहना है कि ट्रंप की घोषणा का कुछ हासिल नहीं है क्योंकि नई सैन्य शाखा बनाने के लिए राष्ट्रपति की नहीं कांग्रेस की अनुमति चाहिए. अमेरिकी संविधान में भी साफ है कि कांग्रेस के पास सेना के विस्तार और सहायता का अधिकार है. यानि ट्रंप चाहें तो गठन का आदेश दे दे लेकिन कांग्रेस की हरी झंडी के बगैर बात आगे नहीं बढ़ सकती.

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रूस के साथ अमेरिका और चीन अंतरिक्ष में पकड़ मजबूत करना चाहते हैं
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क्यों जरूरी है स्पेस फोर्स

ओबामा प्रशासन में एयरफोर्स सचिव डेबोरा ली जेम्स ने कहा था – स्पेस अब शांतिपूर्ण जगह नहीं रही. यह मुमकिन है कि धरती पर होने वाले संकट का खून स्पेस में बहाया जाए. रूस और चीन भी अमेरिका के लिए चिंता की वजह हैं. ट्रंप ने अपने भाषण में कहा भी कि अमेरिका, अंतरिक्ष में रूस और चीन की अगुवाई नहीं चाहता. वह अपना दबदबा चाहता है. रूस स्पेस में जगह बनाना चाहता है क्योंकि उसे लगता है ऐसा करके वह धरती पर अपनी भविष्य की जंग में जीत बना पाएगा. 2015 में चीन ने तो एक स्ट्रैटजिक सपॉर्ट फोर्स तैयार भी कर ली है जो उसे स्पेस, सायबर और इलेक्ट्रोनिक से जुड़े युद्ध मिशन में मदद करेगी. ऐसे में अमेरिका पीछे कैसे रह सकता है.

स्पेस में किस तरह का तनाव है

तनाव ही तनाव है. अलग अलग देशों की सैटेलाइट से अंतरिक्ष भरा हुआ है. ये वे उपग्रह हैं जो अमेरिका, रूस, चीन और अन्य देशों को दुश्मनों को ट्रैक करने में मदद करते हैं. साथ ही गुप्तचर एंजेसियों की तस्वीरें और मिसाइल कंट्रोल करने जैसे काम भी ये उपग्रह करते हैं. यह समझ लीजिए कि उपग्रह धरती के काम को बहुत आसान कर देता है. ताकतवर देश इसी वजह से स्पेस पर नजरें टिकाएं बैठे हैं.

इसके अलावा कमर्शियल उपग्रह जो आपके फोन, फेसबुक को चलाते हैं और टैक्सी को रास्ता दिखाते हैं. सैटेलाइट को हैक कर देना भी बड़ा काम नहीं है. इसके अलावा अंतरिक्ष का मलबा जो कमर्शियल और मिलेट्री स्पेस उपकरणों में रुकावट पैदा करता है. ऐसे में हर देश चाहेगा कि उसका टीम, स्पेस में रहकर इन सारी समस्याओं से निपटता रहे. जिन देशों के पास पैसा और ताकत है, वह इसलिए स्पेस में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाना चाहते हैं, फिर उसके लिए उन्हें सेना ही क्यों न भेजनी पड़े.
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