इस वजह से तुर्की और मलेशिया दे रहे हैं पाकिस्तान का साथ!

इस वजह से तुर्की और मलेशिया दे रहे हैं पाकिस्तान का साथ!
तुर्की और मलेशिया ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की मदद की थी.

तुर्की और मलेशिया (Turkey and Malaysia) ने पाकिस्तान के समर्थन में कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) को यूएन की आम बैठक में उठाते हुए भारत के कदम का विरोध किया था. मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने तो यहां तक कह दिया कि भारत ने कश्मीर पर कब्जा किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2019, 7:59 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका (America) में 26/11 के आतंकी हमले (Terrorist attack) के बाद आतंकवाद को लेकर दुनिया के नजरिए में एक बड़ा बदलाव आया. आतंकवाद पर एकजुट आज की दुनिया में जहां पाकिस्तान अपनी आतंक समर्थित नीतियों के कारण अलग-थलग पड़ गया है. वहीं कुछ ऐसे भी देश हैं जो पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं. इन देशों में तुर्की, मलेशिया और चीन शामिल हैं. भारत ने जब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले प्रावधान आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किया, तो तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान का साथ देते हुए इस मसले को यूएन में उठाते हुए भारत की आलोचना की.

टेरर फंडिंग के आरोप में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की संभावित कार्रवाई से भी पाकिस्तान को तुर्की और मलेशिया ने ही बचाया और वो ब्लैक लिस्टेड होने से बच गया. एफएटीएफ ने आतंकवादियों की फंडिंग पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान को चार महीने की मोहलत दे दी. हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तुर्की और पाकिस्तान के बीच हमेशा ही अच्छे संबंध रहे हैं. लेकिन इस तरह पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर सामने आना एक नई बात है. आखिर तुर्की और मलेशिया द्वारा पाकिस्तान की इस तरह खुलकर समर्थन देने के पीछे की वजह क्या है?

तुर्की और मलेशिया की मदद से पाकिस्तान ब्लैक लिस्टेड होने से बच गया.




तुर्की और पाकिस्तान के संबंध पुराने हैं
हालांकि तुर्की पहले भी पाकिस्तान की मदद करता रहा है. दोनों देशों के संंबंध पाकिस्तान बनने के बाद से ही अच्छे रहे हैं. लेकिन बावजूद इसके तुर्की ने इस तरह खुलेआम पाकिस्तान की कमी मदद नहीं की. दरअसल बदले वैश्विक परिवेश में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन इस्लामी जगत के नेता के रूप में खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं.

एर्दोगन का इस्लामी दुनिया के नेता के रूप में उभार
एर्दोगन द्वारा कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन को इस्लामी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने वाला एक कदम है. तुर्की ने पूरी दुनिया में मुसलमानों से संबंधित मसलों पर अब खुलकर सामने आ गया है. तुर्की ने चीन के उइगर मुस्लमानों का भी मुद्दा जोरशोर से उठाता रहा है. लेकिन पाकिस्तान चीन के उइगर मुस्लमानों के मामले में चुप है. हाल ही में पाकिस्तान तुर्की के इन प्रयासों में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है.

प्रधानमंत्री इमरान खान एर्दोगन के एक विश्वसनीय सहयोगी हैं.


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एर्दोगन के एक विश्वसनीय सहयोगी बन गए है. गौरतलब है कि यूएन में तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा था कि भारत ने कश्मीर में 8 मिलियन लोगों को कैद में रखा है. हालांकि भारत ने एर्दोगन के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया था और इसे भारत का आंतरिक मामला बताया था.

तुर्की-पाकिस्तान के संबंधों के पीछे पैन इस्लाम का विचार
भारत के एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि तुर्की-पाकिस्तान के संबंधों के पीछे का कारण पैन-इस्लामवाद की विचार धारा है. वर्तमान समय में एर्दोगन स्वयं में एक उदारवादी इस्लामी नेता के रूप में प्रजेंट कर रहे हैं. एर्दोगन ने तुर्की की धर्मनिरपेक्षता के चरित्र को काफी हदतक बदल कर रख दिया है.

तुर्की-पाकिस्तान के संबंधों के पीछे का कारण पैन-इस्लामवाद की विचार धारा है.


गौरतलब है कि आधुनिक तुर्की के निर्माता अता तुर्क मुस्तफा कमाल पाशा ने देश को धर्म के दलदल से बाहर निकाल कर धर्मनिरपेक्षता की नींव रखी थी. इसी के साथ चलते हुए तुर्की आज विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा है. बहरहाल मौजूदा समय में एर्दोगान के यूरोपीय संघ में शामिल होने का सपना चकनाचूर हो चुका है. तुर्की का पश्चिम के साथ हनीमून भी खत्म हो चुका है. अब एर्दोगान के पास वैश्विक इस्लाम का नेता होने का सुखद सपना है.

विश्वस्व सहयोगी के रूप में पाकिस्तान
तुर्की के इस समय अपने पड़ोसी देशों को लेकर राजनीति मसले हैं, जिसमें उनको एक विश्वस्व सहयोगी की जरूरत है. उत्तरी सीमा में कुर्दों की समस्या के साथ-साथ पड़ोसी देश अजरबैजान और बुल्गारिया के साथ भी सीमा विवाद है. अजरबैजान के विवाद में पाकिस्तान ने तुर्की का सहयोग किया है. वहीं भूमध्य सागर के द्वीप साइप्रस को लेकर भी तुर्की का विवाद है. भारत साइप्रस की स्वतंत्रता का समर्थक रहा है.

इमरान खान ने कई मुद्दों पर तुर्की का समर्थन किया है.


पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ के दौरान पाकिस्तान-तुर्की संबंध कुछ खास नहीं थे. लेकिन वर्तमान पीएम इमरान खान ने तुर्की के साथ अपने रिश्ते को मजबूत किया है. पाकिस्तान में तुर्की के सहयोग से शुरू हुईं, जिसमें मेट्रो बस परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा कार्य शामिल हैं. रक्षा और पर्यटन क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग किया गया है.

तुर्की और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों ने एक दूसरी की प्रशंसा और सैन्य संबंध के जरिए अपने रिश्तों को मजबूत किया है. अतातुर्क ने तुर्की संविधान में स्पष्ट रूप से सेना की भूमिका को सुनिश्चित किया. इस मॉडल का पाकिस्तान भी अनुकरण करना चाहता है जिससे सेना की भूमिका को सीमित किया जा सके. बता दें कि पाकिस्तान में सेना की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है.

पाकिस्तान और मलेशिया
पाकिस्तान और मलेशिया के भी संबंध काफी पुराने हैं लेकिन हाल के वर्षों में महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ हुए हैं. हालांकि भारत और मलेशिया के बीच संबंध ऐतिहासिक होने के साथ-साथ मजबूत आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं. मलेशिया में भारतवंशियों की एक अच्छी तादाद भी है. लेकिन एक इस्लामिक देश होने के नाते पाकिस्तान के साथ मलेशिया की नजदीकियां काफी बढ़ी हैं.

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने यूएन में पाकिस्तान का समर्थन किया.


मलेशिया द्वारा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की मदद करना इसी इस्लामी ब्रदरवुड से प्रभावित है. महातिर मोहम्मद के पहले के कार्यकाल में भी पाकिस्तान के साथ उनकी नजदीकियां रही हैं. यूएन में अपने संबोधन में महातिर मोहम्मद ने भारत पर आरोप लगाया कि उसने कश्मीर पर जबरन कब्जा किया है.

भारत की जवाबी कार्रवाई
भारत ने भी पाकिस्तान के समर्थन के लिए तुर्की और मलेशिया खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. भारत ने अपने विशाल बाजार और आर्थिक व्यवस्था की मजबूती को अपना हथियार बनाया है. भारतीय व्यापारियों ने मलेशियाई पाम ऑयल की खरीद को बंद कर दिया. एक रिपोर्ट के हवाले से भारतीय व्यापारियों ने मलेशिया के बजाय इंडोनेशिया से पाम ऑयल की खरीद करने का फैसला किया है. दरअसल भारत पाक ऑयल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार है.

भारत की कार्रवाई का दिखने लगा है असर
भारत के इस कदम का असर भी दिखने लगा है. मलेशियाई पीएम महातिर मोहम्मद के हवाले से आ रही खबर के अनुसार पीएम महातिर इस समस्या के समाधान के लिए भारत के साथ राजनयिक बातचीत कर सकते हैं. हालांकि भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने तुर्की की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है.


मलेशियाई सरकार का कहना है कि यह भारतीय व्यापारिक समुदायों की प्रतिक्रिया है. यदि भारत सरकार ऐसा कुछ करती है तो उस पर वो कूटनीतिक रूप से काम करेंगे. मलेशिया भारत से चीनी और भैंसे के मांस की खरीद को बढ़ाने जैसा कदम उठाने का संकेत दिया है.

पीएम मोदी का तुर्की दौरा रद्द 
भारत ने तुर्की पर जवाबी कार्रवाई करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अंकारा की प्रस्तावित यात्रा को रद्द कर दिया है.  साथ ही तुर्की के साथ हुए 2.3 अरब डॉलर के रक्षा सौदे को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है. भारत ने तुर्की की रक्षा कंपनी अनादोलू शिपयार्ड को भारतीय नौसेना के लिए जहाजों के निर्माण का कांटेक्ट दिया था.

इसके अतिरिक्त भारत साइप्रस में तुर्की के खिलाफ वहां की आजादी को समर्थन देने का भी फैसला ले सकता है. इसके साथ ही भारत ने तुर्की द्वारा उत्तरी सीरिया में किए गए आक्रमण की भी आलोचना की थी. भारत का कहना है कि कुर्दों के खिलाफ तुर्की आक्रमण से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर हुई है.

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