तुर्की में म्यूजियम का मस्जिद में बदलना क्यों डरा रहा है?

तुर्की में म्यूजियम का मस्जिद में बदलना क्यों डरा रहा है?
प्रेसिडेंट ने अपने एलान में कहा है कि म्यूजियम से मस्जिद बनने में लगभग 6 महीने लगेंगे

तुर्की के हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदलने का आदेश (Hagia Sophia from a museum into a mosque in Turkey) दे दिया गया. मूलतः चर्च रही इमारत पर ये फैसला बड़े तबके को नाराज कर चुका है.

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कोरोना और सीमाओं को लेकर देशों की तनातनी के बीच तुर्की की ताजा खबर से कोहराम मचा हुआ है. 10 जुलाई को यहां के प्रेसिडेंट तैय्यप एर्दोगन ने एलान किया कि हागिया सोफिया म्यूजियम को अब नमाज के लिए खोला जा रहा है. प्रेसिडेंट के एलान से पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये संग्रहालय इससे पहले मस्जिद था और इसे दोबारा मस्जिद ही बनाया जाएगा. वैसे मस्जिद बनने से पहले ये बहुचर्चित इमारत चर्च रह चुकी है. यही वजह है कि इस फैसले के बाद से दुनिया में हल्ला है. माना जा रहा है कि इससे तुर्की की धर्मनिरपेक्षता खतरे में आ जाएगी.

क्या है इसका इतिहास
तुर्की का हागिया सोफिया एक समय पर दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से रहा. छठवीं सदी में इसे रोमन सम्राट जस्टिनियन ने इसे बनवाया था. माना जाता है कि इसे बनाने में लगभग 10 हजार कामगारों ने दिन-रात काम किया, तब जाकर पांच सालों में ये तैयार हुआ. इसके बाद से ये चर्च रोमन साम्राज्य का आधिकारिक चर्च रहा, जहां सम्राटों के राज्याभिषेक होते रहे. लगभग 900 सालों तक ये ऑर्थोडॉक्स चर्च रहा. तेरहवीं सदी में यूरोप के ईसाई आक्रामणकारियों ने हमले के दौरान इसे बुरी तरह से तोड़ा-फोड़ा और फिर उसे कैथोलिक चर्च में बदल दिया. कहानी यहीं पर खत्म नहीं हुई.

तुर्की का हागिया सोफिया एक समय पर दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से रहा

मुस्लिम शासकों का आक्रमण


साल 1453 में ऑटोमन एंपायर के सुल्तान मेहमद द्वितीय ने इसे मस्जिद में बदलने का आदेश दे दिया. तब इमारत से क्रिश्चिएनिटी के सारे प्रतीक हटा लिए गए. साथ ही इसे पूरी तरह से मुस्लिम शैली का दिखाने के लिए एक गुंबदनुमा इमारत के आसपास छह मीनारें भी खड़ी हो गईं. पहले विश्व युद्ध में ऑटोमन साम्राज्य की हार हुई और तभी आधुनिक तुर्की की नींव रखी गई.

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बना म्यूजियम
तुर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल पाशा ने देश को धर्मनिरपेक्ष घोषित किया. इसी कदम के तहत मस्जिद को म्यूजियम में बदल दिया गया. साल 1935 में ये आम सैलानियों के लिए खोल दिया गया. हालांकि तुर्की की मुस्लिम आबादी, जो मेजोरिटी में है, इसके विरोध में रही. वो चाहते थे कि इसे दोबारा मस्जिद बना दिया जाए. कई बार इसपर आंदोलन भी हुए. लेकिन लगभग सभी नेताओं ने धर्मनिरेपक्षता के लिहाज से इसे संग्रहालय ही बना रहने देने पर जोर दिया.

तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन हमेशा से ही जनभावनाओं के साथ रहे


फायदे की राजनीति
इधर तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन हमेशा से ही जनभावनाओं के साथ रहे. वे जनता की इस बात का समर्थन करते थे कि इमारत को मस्जिद बनना चाहिए. तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन अपने चुनाव प्रचार में इस इमारत को मुद्दा बना चुके थे, उन्होंने मुस्लिमों से वोटों के लिए वादा किया था कि जीतने पर म्यूज़ियम को मस्जिद बना देंगे. अब हालिया एलान इसी वादे की ओर कदम है. प्रेसिडेंट ने अपने एलान में कहा है कि म्यूजियम से मस्जिद बनने में लगभग 6 महीने लगेंगे.

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सोशल साइट में बदलाव
इस घोषणा के साथ ही हागिया सोफिया की वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट, जिनमें उसे म्यूजियम लिखा गया था, बंद हो गई. ये सारे काम तब हो रहे हैं कि जबकि कई इंटरनेशनल समुदाय इसके खिलाफ हैं. इनमें यूनेस्को भी शामिल है जिसने हागिया सोफिया को इंटरनेशनल धरोहर का दर्जा दिया हुआ है. वे लगातार चेता रहे थे कि म्यूजियम को मस्जिद में बदलना धर्मनिरेपक्ष फैसला नहीं है, वो भी तब जबकि ये शुरुआत से ही चर्चा रहा.

मॉडर्न तुर्की के बनने के बाद से म्यूजियम को यूनेस्को ने वर्ल्ड हैरिटेज के तहत रखा था (Photo-pexels)


गुस्से में अंतरराष्ट्रीय समुदाय
माना जा रहा है कि इससे चर्च को मानने वालों की भावनाएं आहत हुई हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में रशियन ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रवक्ता व्लादिमीर लेगोइडा ने कहा कि म्यूजियम को मस्जिद में बदलने से पहले करोड़ों क्रिश्चियन्स को नहीं सुना गया. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सारे  संवेदनशील मसलों को नजरअंदाज कर दिया.

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इससे पहले ग्रीस के विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि म्यूजियम यूनेस्को ने वर्ल्ड हैरिटेज के तहत रखा है. अब इसे दूसरे उद्देश्यों के लिए प्रमोट किया जा रहा है. माना जा रहा है कि तुर्की के प्रेसिडेंट के इस फैसले से देश कई सदी पीछे चला जाएगा, जब कोई भी हमला करके किसी इमारत या जगह को हथिया लिया करता था.

इसी 24 जुलाई से ये नमाज के लिए खोला जाने वाला है. साथ ही साथ इसे मस्जिद में बदलने का काम चलता रहेगा. हालांकि प्रेसिडेंट के फैसले से गुस्साए यूनेस्को ने ये साफ नहीं किया कि क्या मस्जिद होने के बाद भी इसे यूनेस्को कल्चरल हैरिटेज का दर्जा जारी रहेगा.
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