इस मुल्क में एक ख़ास परफ्यूम से लड़ी जा रही है कोरोना से जंग

इस मुल्क में एक ख़ास परफ्यूम से लड़ी जा रही है कोरोना से जंग
तुर्की में कोविड-19 (Covid-19) से मुकाबले के लिए एक खास तरह का परफ्यूम इस्तेमाल किया जा रहा है

तुर्की (Turkey) में कोविड-19 (Covid-19) से मुकाबले के लिए एक खास तरह का परफ्यूम (perfume) इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें काफी मात्रा में अल्कोहल होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2020, 1:07 AM IST
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कोरोना संक्रमित (corona infection) लोगों का आंकड़ा तुर्की में 56900 से भी ज्यादा हो चुका है. ऐसे में सरकार एहतियात के तौर पर क्वारंटीन और आइसोलेशन जैसे तरीके तो आजमा ही रही है, साथ में आम लोग भी अपनी तरह से ये जंग लड़ रहे हैं. वे हैंड सैनेटाइजर (hand sanitizer) की जगह धड़ल्ले से एक खास तरह का तुर्की परफ्यूम इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे वहां की भाषा में Kolonya कहते हैं.

क्या है इसकी खासियत
असल में ये परफ्यूम से ज्यादा कलोन है, यानी वो खुशबू जिसमें एसेंशियल ऑइल की मात्रा बहुत कम लगभग 2 से 3% तक होती है, जबकि अल्कोहल काफी ज्यादा रहता है. तुर्की में ये हमेशा से वहां की संस्कृति का हिस्सा रहा. मेहमाननवाजी में काफी आगे माने जाते इस देश में कहीं भी दावत में जाने पर सबसे पहले हाथों पर कलोन छिड़का जाता है. साफ-सफाई के मामले में अव्वल तुर्की में इसे सैनेटाइजर की तरह भी रखते हैं और माना जाता है कि इसके छिड़काव से 80% तक जर्म्स खत्म हो जाते हैं. कोरोना से लड़ने में ये परफ्यूम ज्यादा प्रभावी इसलिए भी माना जा रहा है कि ये इस देश के लोगों के रोजमर्रा का हिस्सा रहा है और कोई नई आदत सीखने के लिए उन्हें कोशिश नहीं करनी पड़ रही है.

कोरोना से लड़ने में परफ्यूम ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है

सरकार ने किया एलान


कलोन की भूमिका मेहमानवाजी से आगे बढ़ी, जब देश के स्वास्थ्य मंत्री Fahrettin Koca ने 11 मार्च को इसके फायदे गिनाते हुए कोरोना से लड़ाई में इसका इस्तेमाल बढ़ाने की बात की. यहां तक कि तुर्की मीडिया में भी इसे anti-Covid-19 परफ्यूम बताया जाने लगा. तब तब यहां पर कोरोना का एक भी मामला नहीं आया था. मामले बढ़ने के साथ कलोन की बिक्री भी बढ़ती चली गई. द इकॉनोमिस्ट की मानें तो यहां बीते कुछ ही हफ्तों में इस स्थानीय परफ्यूम की ऑनलाइन बिक्री 3400% तक बढ़ गई है, वहीं दुकानों पर भी ये खरीदे जा रहे हैं.

पहले भी होता था इस्तेमाल
कलोन से पहले भी तुर्की में एक खास खुश्बू का इस्तेमाल होता रहा था. माना जाता है कि 9वीं सदी में शासक से लेकर आम प्रजा तक गुलाबों की खुश्बू को रोजमर्रा में उपयोग करते थे. फिर 19वीं सदी की शुरुआत के साथ कलोन जर्मनी से होते हुए Ottoman Empire तक पहुंचा और तुर्की के लोगों के रुटीन का हिस्सा बन गया.

कलोन सारे टर्किश नागरिकों को मिल सके, इसके लिए सरकार भी कदम उठा रही है


सबको मिले, ये देख रही सरकार
कलोन या kolonya सारे टर्किश नागरिकों को मिल सके, इसके लिए सरकार भी कदम उठा रही है. यहां 13 मार्च को पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना बंद कर दिया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा कलोन बन सके. 18 मार्च को राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि सबको और खासकर 60 पार के लोगों को कलोन मिल सके. फिलहाल स्थानीय उत्पादकों ने भी बढ़ी हुई बिक्री के बाद भी इसका दाम न बढ़ाने का फैसला किया है.

पहले से सफाई-पसंद है ये देश
वैसे हाथ धोने की आदत में तुर्की दूसरे देशों से काफी आगे है. इस बारे में Gallup International ने एक सर्वे में बताया कि बाथरूम जाने के बाद साबुन से हाथ धोने में तुर्की जनता 94% के साथ सबसे आगे है. 64 देशों के 62,398 पर ये सर्वे किया गया, जिसमें ये नतीजे निकलकर आए. लगभग 24% ब्रिटिश हाथ धोने की आदत को सही मानते हैं, वहीं डच यानी नीदरलैंड के लोग हैंड हाइजीन के मामले में सबसे खराब माने जाते हैं. वहां इसका प्रतिशत सबसे कम रहा. हाथ न धोने के पीछे यूरोपियन देशों के ज्यादातर लोगों का तर्क था कि टॉयलेट में टिश्यू पेपर का उपयोग करने पर हाथों में संक्रमण का डर लगभग नहीं जितना होता है.

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