पाकिस्तान, चीन नहीं बल्कि इस देश को भारत के लिए बताया गया अंदरूनी खतरा

पाकिस्तान, चीन नहीं बल्कि इस देश को भारत के लिए बताया गया अंदरूनी खतरा
भारत को चीन पाकिस्तान से प्रत्यक्ष खतरा तो है ही, लेकिन तुर्की में भी भारत विरोधी गतिविधियां खतरनाक स्तर पर बढ़ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर, Reuters)

हाल में खुफिया रिपार्ट से पता चला है कि इस देश में भारत विरोधी (Anit Inida) गतिविधियां इतनी बढ़ रही हैं जिसकी वजह से वह पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) से भी खतरनाक हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 6, 2020, 3:39 PM IST
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भारत में जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) से धारा 370 (Article 370) हटे एक साल हो चुका है. इस मौके पर दुनिया में चीन (China) के अलावा एक ही देश ने ही भारत के इस फैसले की आलोचना की थी, तब तुर्की ने भी भारत में जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा हटाने की आलोचना की थी. वैसे तो भारत के लिए तुर्की (Turkey) का यह रवैया कोई नया नहीं है, लेकिन पता चला है कि तुर्की से भारत को इससे कहीं बड़ा खतरा है. माना जा रहा है कि इसससे भारत की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर खतरा है.

क्या है यह खतरा
हाल ही में मिली इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार तुर्की भारत विरोधी गतिविधियों का नया हब बन रहा है और इस मामले में इसकी स्थिति पाकिस्तान के बाद दूसरी है. इस रिपोर्ट में तुर्की सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह भारतीय मुसलमानों का उग्र सुधारवादी बना रही है और इसके लिए कट्टरपंथियों की भर्ती भी कर रही है.

भारत के अंदर तक पैठ
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तुर्की सरकार के लिए यह काम करने वालों में से कुछ का सीधा संबंध तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) के परिवार से है. बताया जा रहा है कि इन संस्थाओं या संगठनों ने पहले मुकाबले भारत में ज्यादा अंदर तक पैठ बना ली है. इस सबंध में तीन तरह के प्रयास प्रमुख हैं. इनमें पहला तुर्की का सरकारी मीडिया, दूसरा शैक्षणिक संस्थान और तीसरा गैर सरकारी संगठन (NGOs) है.



कैसे फांसा जाता है लोगों को
इस आंकलन में कुछ लोगों और समूहों की पहचान की गई है जिनमें से कुछ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थे जिन्हें तुर्की में उन संस्थाओं में काम करने का लालच दिया गया था जिनके एर्दोगान शासन से पक्के ताल्लुकात थे. इस रिपोर्ट में उन संगठनों की सूची तैयार की गई है जिन्होंने तेजी से भारतीयों को तुर्की में पढ़ने के लिए बड़ी स्कॉलरशिप देना शुरू किया है.

तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन का इन गतिविधियों से संबंथ साबित हो रहा है.


तुर्की पहुंचने के बाद शुरू होता है असली काम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है  कि तुर्की अपने सरकार समर्थित गैर सरकारी संगठनों के जरिए भारतीय कश्मीरी और मुस्लिम छात्रों को तुर्की में पढ़ाई के लिए बड़ी स्कॉलरशिप और विनिमय कार्यक्रम चला रहा है. एक बार छात्र तुर्की पहुंच जाता है कि इसके बाद पाकिस्तान के लिए काम करने वाले लोग मामला अपने हाथ में ले लेते हैं.

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तुर्की के राष्ट्रपति से सीधा संबंध
स्कॉलरशिप का प्रस्ताव देने वालों की सूची बहुत लंबी है. इस बारे में एक अधिकारी का कहना है कि इनमें से ज्यादातर संगठनों का तुर्की सरकार, राष्ट्रपति एर्दोगॉन या उनके परिवार से सीधे संबंध हैं. रिपोर्ट मे राष्ट्रपति एर्दोगॉन के परिवार के सदस्यों के भारत में काम कर रहे इस्लामिक संगठन के साथ संबंध का भी जिक्र है.

और यह काम भी
इसके अलावा भारत में तुर्की दूतावास की भूमिका के बारे में बात की गई है साथ ही ऐसे लोगों को तुर्की ज्यादा से ज्यादा भेजा जा रहा है जो भारत के खिलाफ बोलते हैं. ऐसे लोगों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. इन मंचों पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की सुनियोजित साजिश होती है.

Pakistan
पाकिस्तान तुर्की की इरादों का अपने लिए फायदा उठाना चाहता है.


एर्दोगॉन की उस महत्वाकांक्षा
यह सब कुछ तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगॉन की उस महत्वाकांक्षा के तहत हो रहा है जिससे वे खुद को मुस्लिम समुदाय का मसीहा के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं. एर्दोगॉन के समर्थकों को लगता है कि वे अपने पुराने ऑटोमन साम्राज्य को पुनर्स्थापित कर सकते हैं जिसमें ऑटोमन सुल्तान को मुस्लिम दुनिया का खलीफा कहा जाता था. एक सदी पहले यह राज्य दक्षिण पूर्व यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के तटीय इलाकों में फैल गया था.

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पाकिस्तान इसी का फायदा उठाना चाहता है. यही वजह से कि तुर्की और पाकिस्तान पिछले कुछ समय से काफी नजदीक आ गए हैं. तुर्की के भारत विरोधी बयान भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं.
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