कश्मीर से आईं हिंदुओं के लिए ये दो अच्छी खबरें क्या आपको मालूम हैं

कश्मीर से आईं हिंदुओं के लिए ये दो अच्छी खबरें क्या आपको मालूम हैं
पुलवामा के अच्छन में मुस्लिमों पुराने मंदिर का किया जीर्णोद्धार

ये खबरें कहती हैं कि कश्मीर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं.

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कश्मीर से इस हफ्ते हिंदुओं के लिए दो अच्छी खबरें आई हैं. ये दोनों खबरें कश्मीरी पंडितों के लिए उम्मीद जगाने वाली भी हैं. ये खबरें कहती हैं कि कश्मीर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं.

अब आइए इन दोनों खबरों के बारे में बताते हैं. फिर इनके विवरण पर जाते हैं. पहली खबर ये है कि एक कश्मीरी पंडित ने करीब 25 साल बाद श्रीनगर पहुंच कर फिर अपनी दुकान खोल ली. जिस बाजार में उन्होंने अपनी पुरानी दुकान फिर खोली, उसके पड़ोस में मुस्लिमों की दुकानें हैं, जो उनके अर्से से बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं. वे अर्से से उन्हें वापस लौट आने के लिए कहते रहे हैं. अबकी बार उन्हीं मुस्लिमों ने फिर दोस्ती की मिसाल देकर कहा था कि उन्हें फिर बाजार में लौट आना चाहिए.
दूसरी खबर उस पुलवामा से है, जहां से फरवरी में 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों के मारे जाने की खराब खबर आई थी. उसी पुलवामा के अच्छन गांवों में हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर एक मंदिर का जीर्णोद्धार किया है. ये वो इलाका है जहां आतंकियों की मजबूत पकड़ है.

मुसलमानों ने ठीक किया पुलवामा में मंदिर 
इस मंदिर का नाम स्वामी जगरनाथ अस्थापन है. इस हफ्ते मंदिर में पूजा-पाठ का काम शुरू हो जाएगा. 80 साल पुराने इस मंदिर की दीवारें ढहने लगीं थीं. दीवारों के साथ छतें कमजोर पड़ रही थीं. जिसे इलाके के हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर ठीक कर दिया. दीवारों की मरम्मत करके उसे सीमेंट से मजबूत किया गया. रंगरोगन किया गया. छतों की भी मरम्मत हुई. ये भगवान शिव का मंदिर है.



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हालांकि इस मंदिर में मरम्मत का काम तब भी चल रहा था जब पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हुआ. इसके बाद कश्मीर के बाहर के राज्यों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और व्यवसायियों को निशाना बनाया जाने लगा. तब एक महीने से ज्यादा समय तक यहां काम रुका रहा. लेकिन उसके बाद ये फिर शुरू हो गया.

अच्छन गांव में कश्मीरी पंडितों के खाली पड़े घर


इलाके में केवल एक हिंदू परिवार बाकी सब मुस्लिम
इलाके के मुस्लिमों ने ना केवल मंदिर में काम करने वाले मजदूरों को चाय सर्व की, बल्कि ये भी देखते रहे कि मंदिर का काम कैसा चल रहा है. 1990 के दशक से पहले अच्छन में 60 पंडित परिवार रहते थे. इसके बाद स्थानीय कश्मीरी पंडित परिवार यहां से बाहर जाने लगे, क्योंकि तब ये गांव आतंकवाद की चपेट में आ चुका था. केवल भूषण लाल का परिवार ही यहां रुका रहा. मंदिर का जिम्मा इसी परिवार के कंधे पर आ गया, जो पिछले 25 से ज्यादा सालों से मंदिर में पूजा कर रहा था. साथ ही इसकी देखभाल भी. लेकिन पिछले कुछ सालों से मंदिर की हालत खस्ता होने लगी.

मुस्लिम परिवारों की मदद से मंदिर में लौटी रंगत 
तब भूषण ने इलाके की मस्जिद कमेटी को मंदिर के हाल के बारे में बताया. भूषण ने मीडिय़ा को बताया, उन्हें मुस्लिम भाइयों का साथ मिला. गांव में केवल एक हिंदू परिवार होने के कारण मुस्लिमों ने मंदिर बनाने में मदद की. मंदिर में पेंटिंग का काम एक मुस्लिम शब्बीर अहमद मीर ने किया. उसका कहना है कि मैंने अपने सारे काम छोड़कर इसे पहले किया, क्योंकि ये हमारी जिम्मेदारी थी. मंदिर के काम में लगे सारे मजदूर भी मुस्लिम ही थे. गांव के एक निवासी गुलाम नबी ने एक स्थानीय अखबार से कहा, 1990 के दशक से पहले हिंदू और मुसलमान यहां मिलकर रहते थे और साथ में त्योहार मनाते थे.

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29 साल बाद फिर लौटे और दुकान खोली
दूसरी खबर जिन रोशन लाल मावा की है. वो 1990 के दशक में श्रीनगर छोड़कर दिल्ली आ गए थे. दिल्ली में उनका बिजनेस अच्छा चल पड़ा. यहां उन्होंने एक बड़ा घर भी बनवा लिया था. उन्होंने घाटी तब छोड़ी थी, जब वो दुकान पर थे और आतंकवादियों ने वहां उन पर चार गोलियां दाग दी थीं. अब 29 साल बाद वो कश्मीर लौटे और श्रीनगर के बाजार में अपनी होल सेल की दुकान फिर से खोल ली है.

रोशनलाल मावा का स्वागत करते उनके पड़ोसी मुस्लिम दुकानदार


मुस्लिम मित्रों ने वापसी के लिए मनाया
दरअसल उनके पड़ोसी मुस्लिम दुकानदारों ने उन्हें मनाया कि अगर वो अपनी दुकान फिर से खोलते हैं तो उनका स्वागत है, उनकी हिफाजत वो सब खुद करेंगे. मावा का भी कहना है कि कश्मीर वापस लौटकर उन्हें जो सुख मिल रहा है, वो पूरे देश में घूमकर कभी नहीं मिला. कश्मीर जैसी कोई जगह ही नहीं है. जब उन्होंने अपनी दुकान दोबारा खोली तो पड़ोसी दुकानदारों ने आकर उनका जिस तरह स्वागत किया, उससे वो खुश हो गए.

दुकान का नाम है जियो बाजार 
उन्होंने अपनी दुकान का नाम रखा है जियो बाजार. पुराने संगी साथियों के बीच फिर अपने पुराने मोहल्ले और बाजार में कारोबार शुरू करने से वो उत्साहित और रोमांचित हैं. मावा कहते हैं कि उन्होंने ना केवल पूरा हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के कई मुल्क देखें हैं, लेकिन ना तो कश्मीर जैसी खूबसूरत कोई जगह मिली और ऐसा सद्भाव दिखा.

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