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जस्टिस एएन रे, जिनसे कहा गया कि दो घंटे में तय करें कि मुख्य न्यायाधीश बनेंगे या नहीं

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: March 18, 2020, 2:25 PM IST
जस्टिस एएन रे, जिनसे कहा गया कि दो घंटे में तय करें कि मुख्य न्यायाधीश बनेंगे या नहीं
कौन थे सुप्रीम कोर्ट के वो चीफ जस्टिस, जिनकी नियुक्ति को लेकर बीजेपी अक्सर कांग्रेस को घेरती है. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के राज्यसभा में जाने पर पैदा हुए विवाद में बीजेपी ने फिर इसी मामले पर कांग्रेस को लताड़ा है

कौन थे सुप्रीम कोर्ट के वो चीफ जस्टिस, जिनकी नियुक्ति को लेकर बीजेपी अक्सर कांग्रेस को घेरती है. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के राज्यसभा में जाने पर पैदा हुए विवाद में बीजेपी ने फिर इसी मामले पर कांग्रेस को लताड़ा है

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  • Last Updated: March 18, 2020, 2:25 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा में मनोनीत करने पर विवाद उठ खड़ा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एएन रे की नियुक्ति के विरोध में तो देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. उसे लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अक्सर कांग्रेस को आड़े हाथों लेती है. गोगोई पर ताजा विवाद छिड़ने के बाद बीजेपी ने इस मसले को लेकर फिर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है. जानते हैं पूरा मामला क्या था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे वाई वी चंद्रचूड़ के पोते अभिनव चंद्रचूड़ ने कुछ दिनों पहले एक किताब लिखी थी, "सुप्रीम व्हीसपर्स". इस किताब में सुप्रीम कोर्ट के तमाम वाकयों और जजों के बारे में लिखा गया है. कई उन बातों के बारे में लिखा गया, जिसे लेकर कई तरह अटकलें उड़ती रहीं

इस  किताब का सबसे चर्चित हिस्सा 1973 से लेकर 1977 तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे एएन रे के बारे में है, जिसे वर्ष 2018 में देश के सभी अखबारों और पत्रिकाओं ने प्रमुखता से छापा.



उसे लोकतंत्र का सबसे काला दिन कहा गया



ये किताब कहती है कि 25 अप्रैल 1977 को जस्टिस एएन रे को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस का पद संभालने का प्रस्ताव दिया गया. इसके लिए उन्हें फैसला लेने के लिए दो घंटे मिले. जस्टिस रे ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. उनका ऐसा करना भारतीय लोकतंत्र और न्यायपालिका के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद बन गया.

तीन सीनियर जजों को सुपरसीड किया था
जब वो चीफ जस्टिस बने तो उन्होंने तीन सीनियर जजों जस्टिस एएन ग्रोवर, जस्टिस केएस हेगड़े और जस्टिस जयशंकर मणिलाल शीतल को सुपरसीड कर दिया. वो इन तीनों से ही जूनियर थे.

जस्टिस एएन रे को चीफ जस्टिस बनाने के विरोध में उनसे सीनियर तीन जजों ने इस्तीफा दे दिया था और पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे


देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए
25 अप्रैल 1973 पर उनकी नियुक्ति के बाद देशभर में बार एसोसिएशन ने विरोध में कई महीने तक विरोध प्रदर्शन किया. जुलूस निकाले गए. इंडिया टुडे के अनुसार इसे देशभर के कानूनी संगठनों ने लोकतंत्र का काला दिन बताया. 

तीनों जजों ने इस्तीफा दे दिया
बाद में इस नियुक्ति के विरोध में तीनों जजों ने इस्तीफा दे दिया. जस्टिस शीतल और जस्टिस हेगड़े ने 30 अप्रैल तक पद पर काम करने के बाद इस्तीफ दिया तो जस्टिस ग्रोवर ने 31 मई को पद से त्यागपत्र दे दिया.

क्या कहा था जस्टिस रे ने 
किताब में जस्टिस रे को ये कहते हुए उद्धृत किया, अगर मैं ये पद स्वीकार नहीं करता तो ये किसी और को दे दिया जाता जबकि मैं इस पद के लिए कतई लालायित नहीं था.

जस्टिस रे ने बाद में एक किताब में कहा, मैं खुद इस पद पर जाने के लिए लालायित नहीं था लेकिन क्या करता


हालांकि इसी किताब में कई सुप्रीम कोर्ट जजों ने चुनौती दी, उसमें दो वो जज भी थे, जिन्हें सुपरसीड करके जस्टिस रे चीफ जस्टिस बनाए गए थे. उनका कहना था कि उन्हें पहले से मालूम था कि ऐसा होने जा रहा है. जस्टिस रे का ये कहना कि उन्हें केवल दो घंटे दिए गए, गलत है.

क्या एक हफ्ते पहले ही जस्टिस रे को इस बारे में मालूम हो गया था
एक कानूनी साइट लेटेस्ट लॉ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, किताब में तब आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जगमोहन रेड्डी के हवाले से कहा गया है कि इस नियुक्ति से एक हफ्ते पहले नई दिल्ली में रूस के राजदूत ने डिनर पार्टी दी थी. जिसमें मैं भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद था. उसमें मैने देखा कि तत्कालीन खान और इस्पात मंत्री मोहन कुमारमंगलम जस्टिस रे को सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनने की बधाई दे रहे हैं.

ऑक्सफोर्ड में पढ़े थे
जस्टिस रे इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट में जज थे. अगस्त 1969 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया. वो ऑक्सफोर्ड में पढ़े हुए थे. वो 1977 में रिटायर होने तक देश के चीफ जस्टिस रहे. इसके बाद कोलकाता चले गए. बाद में उनके बेटे आलोकनाथ रे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रहे. जब जस्टिस रे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे, तो उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, बाद में सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी.

जस्टिस एएन रे उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस थे, जिस समय देश में आपातकाल लगाया गया था. उनके बारे में ये लिखा गया है कि वो उस दौरान अक्सर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को फोन करते थे


तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अक्सर फोन करते थे
आस्टिन ग्रेनविले की किताब वर्किंग ए डेमोक्रेटिक कांस्टिट्यूशन- ए हिस्ट्री ऑफ द इंडियन एक्सपीरियंस (Austin, Granville (1999). Working a Democratic Constitution – A History of the Indian Experience) में लिखा है  कि जस्टिस रे अक्सर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को फोन करके उनसे बात करते थे. बल्कि कई बार वो मामूली बातों पर प्रधानमंत्री के निजी सचिव को भी फोन करके उनसे सलाह लिया करते थे. जस्टिस रे के ही कार्यकाल के दौरान देशभर में आपातकाल लगाया गया था.

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First published: March 18, 2020, 2:10 PM IST
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