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जब रोम में चर्च अधिकारियों के सताए लोगों ने पोप को मानने से इनकार कर दिया

जब रोम में चर्च अधिकारियों के सताए लोगों ने पोप को मानने से इनकार कर दिया

प्रतीकात्मक फोटो

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आबादी के लिहाज से दुनिया में ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की संख्या काफी कम है.

    दुनियाभर के लगभग 7.2 अरब लोगों में से केवल ईसाई धर्म के लगभग 2.4 अरब अनुयायी है. इस लिहाज से दुनिया की एक-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हुए ये धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म माना जा सकता है. भारत में भी एक बड़ी आबादी इस धर्म को मानती है, हालांकि इसके बावजूद भी ईसाई धर्म के बारे में लोगों को कम ही जानकारी होती है. ईसाई धर्म जिसे मसीही या क्रिश्चियन धर्म भी कहते हैं, एकेश्वरवादी धर्म है यानी जिसमें एक ही ईश्वर को माना जाता है. जानिए, इस धर्म की कुछ खास बातें और इसके प्रमुख प्रकार.

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    धर्म की शुरुआत कहां से हुई
    माना जाता है कि मसीही धर्म की उत्पत्ति आज से लगभग 2000 साल पहले येरूशलम में हुई थी. उस दौरान वहां पर रोमन शासकों की क्रूरता बढ़ने लगी थी, खासकर यहूदियों को तरह-तरह की यातनाएं दी जातीं. सताए हुए लोग इससे बाहर निकलने के तरीके सोचने लगे. कुछ लोग गुरिल्ला युद्ध की योजना बनाने लगे तो कुछ खुल्लमखुल्ला विद्रोह करने की सोचने लगे. इसी दौरान ईसा मसीह का जन्म हुआ. जन्म के कुछ सालों बाद ही ईसा की ख्याति एक चमत्कारी बालक के रूप में फैलने लगी. वे बीमारियों का छूकर ही इलाज कर देते. धीरे-धीरे उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी.

    प्रतीकात्मक फोटो


     

    एक यहूदी की बढ़ती लोकप्रियता से डरा हुआ शासक वर्ग उनके खिलाफ साजिशें करने लगा. आखिरकार एक धर्मसभा में ईसा मसीह पर झूठे आरोप लगा उन्हें सलीब पर चढ़ाने की सजा दे दी गई. माना जाता है कि सलीब पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन यीशु जीवित हो उठे थे. हालांकि ईसा मसीह की जिंदगी को लेकर लगातार विवाद रहे हैं क्योंकि उस दौर का पुख्ता दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सका है. शोधकर्ता अलग-अलग बातें कहते हैं. हालांकि इसपर सभी एकमत हैं कि यीशु ही ईसाई धर्म के संस्थापक रहे. उनकी मृत्यु के बाद उनके 12 प्रिय शिष्य पूरी दुनिया में फैल गए और ईसा मसीह के बताए धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे. सबसे पहले फिलीस्तीन से होते हुए ये धर्म सारे यूरोप में फैल गया, जहां से एशिया भी पहुंचा.

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    ईसाई धर्मग्रंथ
    बाइबिल इस धर्म का एकमात्र पवित्र गंथ्र माना जाता है. इसके दो भाग हैं- ओल्ड और न्यू टेस्टामेंट. लगभग ढाई हजार साल पहले तैयार हुए इस पवित्र ग्रंथ में 73 लेख श्रृंखलाएं हैं, जिसमें 46 लेख ओल्ड टेस्टामेंट में तो 27 लेख न्यू टेस्टामेंट में शामिल हैं. न्यू टेस्टामेंट में ईसा मसीह के जीवन और उनके उपदेशों का लेखाजोखा मिलता है, वहीं ओल्ड टेस्टामेंट में ईसा पूर्व यहूदी विश्वास का वर्णन है.



    ईसाई धर्म एकेश्वरवादी धर्म है, जिसमें ईश्वर को पिता और ईसा मसीह को ईश्वर की संतान माना जाता है. इसके अलावा इस धर्म में पवित्र आत्मा की भी अवधारणा है. इन तीनों को मिलाकर ट्रिनिटी बनती है, जो ईसाइयों के लिए सबसे पवित्र है.

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    धर्म का हुआ बंटवारा
    लगभग 2.42 बिलियन अनुयायियों के साथ ये धर्म दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाने वाला धर्म बन चुका है. इसकी कई शाखाएं है, जिनमें से एक है कैथोलिक धर्म. 1.2 बिलियन अनुयायियों के साथ ये सबसे बड़ी शाखा है, जिसे मानने वाले रोम की वेटिकन सिटी में पोप को अपना धार्मिक गुरु मानते हैं. माना जाता है कि ईसा ने अपने अनुयायियों की शिक्षा-दीक्षा के लिए रोमन कैथोलिक चर्च की नींव रखी थी. बाद में इस चर्च के कई धड़े हो गए. रोम से संचालित होने की वजह से इस चर्च को रोमन कैथोलिक चर्च कहते हैं. इसमें धर्म के नाम पर जीवन लगा देने वालों को पादरी और नन कहा जाता है जिन्हें विवाह की अनुमति नहीं होती है. पादरी चर्च का काम करते हैं तो ननें कैथोलिक संगठनों के स्कूलों या अस्पतालों में सेवा देती हैं.



    प्रोटेस्टैंट ईसाई धर्म की एक दूसरी बड़ी शाखा है. इसका जन्म सोलहवीं सदी में प्रोटेस्टैंट सुधारवादी आंदोलन के दौरान हुआ जो कि रोमन कैथोलिक चर्च का कट्टर विरोधी है. अनुयायियों की संख्या के लिहाज से ये मसीही धर्म का दूसरा बड़ा पंथ है, जिसे मानने वाले लगभग 920 मिलियन हैं. 16वीं सदी से पहले पूरे यूरोप में ईसाई धर्म ही था. सभी रोमन कैथोलिक चर्च के सदस्य थे. धर्मसुधार आंदोलन के दौरान ये एकता टूटी और लोग चर्च की अनैतिकता, विलासिता और रुढ़ियों का विरोध करने लगे. विरोध का दौर लंबा चला, जिसके दौरान धर्मसुधारकों को कड़ी सजाएं भी मिलीं. आखिरकार जर्मनी के सेक्सनी से धर्मसुधारक मार्टिन लूथर ने प्रोटेस्टैंट संप्रदाय की शुरुआत की. इसकी भी कई शाखाएं है लेकिन पांच संप्रदाय मुख्य हैं, जिनमें लूथरन, कैलविनिस्ट, एंग्लिकन, बैप्टिस्ट और मेथोडिस्ट शामिल हैं. ये अपेक्षाकृत अधिक उदारवादी संप्रदाय माना जाता है.

    इसके अलावा ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च भी एक बड़ा संप्रदाय है, जिसके अनुयायियों की संख्या 270 मिलियन है. कैथोलिक चर्च के बाद ये दूसरा बड़ा चर्च है. ये रोमन कैथोलिक चर्च के पोप को नहीं मानते, बल्कि इनकी अपनी परंपराएं हैं. यहां चर्च के गुरु को पेट्रीआर्क या मेट्रोपॉलिटन कहा जाता है.



    भारत में कहां से आया मसीही धर्म
    ऐसी मान्यता है कि हमारे यहां ईसाई धर्म की शुरुआत केरल के क्रांगानोर से हुई, जहां ईसा के बारह प्रिय शिष्यों में से एक संत थॉमस पहुंचे थे. यहां संत जल्द ही लोकप्रिय हो गए और मुगल आक्रांताओं के सताए हुए लोग उनकी शरण में जाने लगे. आज भी यहां संत थॉमस की कब्रगाह है. अंग्रेजों के समय में कॉन्वेंट स्कूल और चर्च के माध्यम से ईसाई संस्कृति और धर्म काफी फली-फूली. बाद में मदर टेरेसा के भारत आने और सताए हुए लोगों, खासकर कुष्ठरोग जैसी बीमारी के मरीजों को निस्वार्थ सेवाएं देने के बाद से इस धर्म का बड़ी तेजी से प्रचार-प्रसार हुआ. भारत में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार को लेकर वक्त-वक्त पर काफी विवाद होते रहे हैं लेकिन तब भी भारत में ईसाइयों की आबादी लगभग 2.78 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का 2.3 प्रतिशत है.

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    Tags: Christ, Christmas images, Christmas song, Merry Christmas, Religion, Rome

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