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फोटोग्राफर उद्धव ठाकरे नहीं आना चाहते थे राजनीति में, अब बने महाराष्ट्र के सीएम

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 7:41 PM IST
फोटोग्राफर उद्धव ठाकरे नहीं आना चाहते थे राजनीति में, अब बने महाराष्ट्र के सीएम
राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है.

40 साल की उम्र तक उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) शिवसेना (Shiv Sena) की राजनीति से दूर रहे. और अपनी पहचान एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर (Wildlife Photographer) के तौर पर बनाई. उन्हें 2002 के बृहद मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 7:41 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीतिक उठापटक में नया मोड़ आ गया है. शनिवार की सुबह एनसीपी (NCP) के अजित पवार (Ajit Pawar) के साथ मिलकर देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की गठित की गई सरकार एक हफ्ते भी नहीं चल सकी. मुख्यमंत्री (Chief Minister) के तौर पर देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने 28 नवंबर को महाराष्ट्र 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली. उद्धव की कैबिनेट में कांग्रेस और एनसीपी के मंत्री भी शामिल हैं.

केंद्र में सत्तासीन बीजेपी (BJP) के प्रभाव के खिलाफ अपने चुनाव बाद के गठबंधन की मजबूती से रक्षा के जरिए उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने खुद को एक मजबूत नेता के तौर पर पेश किया है. इस वक्त महाराष्ट्र के गलियारे में उनके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है. पूर्व शिवसेना सुप्रीमो बाला साहब ठाकरे के सबसे छोटे पुत्र उद्धव अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे तो उन्हें अच्छे से जानने वालों के लिए यह मानना आसान नहीं होगा. क्योंकि उनकी राजनीति में कोई रुचि नहीं थी और उनका शौक था, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी (Wildlife Photography).

राजनीति में एंट्री के बाद राज ठाकरे हुए पार्टी से अलग और बनाई नहीं पार्टी
बालासाहब ठाकरे के दबाव के चलते उद्धव ठाकरे 2002 में बृहद मुंबई नगर निगम चुनावों के जरिए राजनीति से जुड़े और इसमें बेहतरीन प्रदर्शन के बाद पार्टी में बाला साहब ठाकरे के बाद दूसरे नंबर पर प्रभावी होते चले गए.

इतना ही नहीं बाला साहब ठाकरे के असली उत्तराधिकारी माने जा रहे उनके भतीजे राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बढ़ते कद के चलते उद्धव का संघर्ष भी खासा चर्चित रहा. यह संघर्ष 2004 में तब चरम पर पहुंच गया, जब उद्धव को शिवसेना की कमान सौंप दी गई. 2006 में राज ठाकरे पूरी तरह से पार्टी से अलग हो गए और उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी नई पार्टी बना ली. उद्धव ठाकरे शिवसेना की कमान संभालने के बाद से राज्य की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं. हालांकि सीधे देश की राजनीति को प्रभावित करने में उनका कोई विशेष योगदान कभी नहीं रहा है. लेकिन यह साफ है कि देश की राजनीति को लेकर उद्धव की महत्वाकांक्षा भी अपने पिता से अलग नहीं है.

पॉलिटिक्स में आने से पहले एक लेखक और फोटोग्राफर के तौर पर थी उद्धव की पहचान
उद्धव ठाकरे का जन्म 27 जुलाई 1960 में मुंबई में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे भारतीय राजनीति की जानी मानी शख्सियत थे. बाला साहब को महाराष्ट्र में एक फायरब्रांड नेता के रूप में जाना जाता था. वहीं उद्धव ठाकरे राजनीति में नहीं आना चाहते थे. वह एक लेखक (Writer) और एक पेशेवर फोटोग्राफर हैं. उद्धव के कई लेख देश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. उनकी करीब आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें और फोटो पत्रिकाएं प्रकाशित हुई हैं.
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शिवसेना में बाला साहब का उत्तराधिकारी (Successor) घोषित किए जाने से पहले तक उद्धव ठाकरे को पार्टी के बाहर शायद ही कोई जानता था. पार्टी के लोग इस बात से परिचित हैं कि उद्धव ठाकरे को सक्रिय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उद्धव को राजनीति से अधिक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पसंद थी. उद्धव की शादी रश्मि ठाकरे से हुई है. उनके दो बेटे आदित्य और तेजस हैं.

शिवसेना की उग्र छवि बदलकर उद्धव ने इसे बनाया महाराष्ट्र की जमीनी पार्टी
शिवसेना की हिंसक छवि को बदलना उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है. उद्धव के नेतृत्व में एक संगठित इकाई के तौर पर उन्होंने पार्टी का गठन किया. बाला साहब और राज ठाकरे की उग्र शिवसेना को उन्होंने ज्यादा संगठित और जमीनी पकड़ वाली राजनीतिक पार्टी (Political Party) में बदला. उद्धव ने अपनी बौद्धिकता का पूरा प्रयोग करते हुए पार्टी की राजनीतिक प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं.

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First published: November 26, 2019, 4:14 PM IST
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