चीन में तीन सालों के भीतर 435 उइगर विद्वान लापता, हो रहा ब्रेनवॉश

चीन में तीन सालों के भीतर 435 उइगर विद्वान लापता, हो रहा ब्रेनवॉश
चीन के ही भीतर उइगर समुदाय से जुड़े विद्वान गायब हो रहे हैं - सांकेतिक फोटो(Photo-pikist)

उइगर विद्वानों (Uighur scholars) को गायब करने के पीछे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of China) का हाथ माना जा रहा है. कथित तौर पर इससे उइगर समुदाय के बाकी लोगों को बदलना आसान होगा.

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हाल ही में चीन के सरकारी परमाणु संस्थान द इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी सेफ्टी टेक्नोलॉजी (INEST) में काम करने वाले वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबर आई. इससे चीन में खलबली मची हुई है. सरकारी अमला इसे ब्रेन ड्रेन यानी प्रतिभाओं का पलायन मान रहा है और रोकने की कोशिश में है. दूसरी तरफ चीन के ही भीतर उइगर समुदाय से जुड़े विद्वान गायब हो रहे हैं. इसकी वजह से चीन के री-एजुकेशन कैंप में चीनी संस्कृति सीख रहे उइगरों की असल संस्कृति पर खतरा मंडरा रहा है.

गायब हो रहे स्कॉलर
मामला पहली बार साल 2017 में सामने आया, जब उइगर समुदाय का एक ख्यात जियोसाइंटिस्ट एकाएक गायब हो गया. Tashpolat Tiyip नाम के ये प्रोफेसर बीजिंग से बर्लिन के लिए एयरपोर्ट निकले. वहां वे एक साइंस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए थे लेकिन तभी वे गायब हो गए. यहां तक कि परिवार और दोस्तों के पास उनका कोई फोन कॉल तक नहीं आया. ये अप्रैल 2017 की बात है. इसके ठीक 6 महीने बाद एक वीडियो आया कि ये वैज्ञानिक उइगर समुदाय के उन लोगों में था, जिसने काफी लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काया.

शिनजिंयाग प्रांत में रह रहे उइगर मुस्लिमों मे से छांटकर स्कॉलर्स को अलग किया जाता है - सांकेतिक फोटो

क्या था आरोप


साइंस मैग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक ने स्टूडेंट्स को वो हिस्से पढ़ाए, जिसमें उइगरों का जिक्र था. इस आरोप के साथ ही वैज्ञानिक को दो साल की कैद दी गई और कैद के बीच ही मौत की सजा सुना दी गई. सजा सुनाया गया एक्सपर्ट वैज्ञानिक बिरादरी में इतना ख्यात था कि उसकी सजा रोकने के लिए दुनियाभर के 50 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार को चिट्ठी लिखी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

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ये अकेला उदाहरण नहीं
माना जा रहा है कि शिनजिंयाग प्रांत में रह रहे उइगर मुस्लिमों मे से छांटकर स्कॉलर्स को अलग किया जाता है और उन्हें अलग डिटेंशन कैंपों में डाल दिया जाता है. ऐसे ही एक मामले में उइगर प्रकाशन इंडस्ट्री से जुड़े हुए एक स्कॉलर को पकड़ा गया और तब से वो लापता है. इस बारे मे कैलीफोर्निया में रह रहा उनका बेटा आवाज उठा रहा है. चीन की नफरत का शिकार इस समुदाय के सारे लोग हैं लेकिन स्कॉलर उनका खास निशाना हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक चीन में अप्रैल 2017 से लेकर अब तक कम से कम 435 उइगर स्कॉलर गायब हो चुके हैं. ये बात उइगर ह्यूमन राइट प्रोजेक्ट में सामने आई.

री-एजुकेशन कैंप और टॉर्चर के जरिए उइगरों को चीनी संस्कृति की ट्रेनिंग दी जा रही है- सांकेतिक फोटो (flickr)


ब्रेनवॉश है मकसद
ये कदम चीन उइगरों की संस्कृति और विकास से जुड़े सारे निशान मिटाने के लिए उठा रहा है. इसमें उन्हीं लोगों को टारगेट किया जाता है जिनका अपने समुदाय के लोगों पर असर हो, जैसे भाषाविद, वैज्ञानिक, टीचर और प्रकाशक. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन का मानना है कि जब तक असरदार लोग रहेंगे, बाकी उइगरों का ब्रेन वॉश मुश्किल होता रहेगा. अगर प्रभावी लोगों को गायब कर दिया जाए तो री-एजुकेशन कैंप और टॉर्चर के जरिए उइगरों को चीनी संस्कृति की ट्रेनिंग दी जा सकती है. और यही हो भी रहा है.

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चीन ने किया इनकार
हालांकि खबर इंटरनेशनल मीडिया में आने पर चीन के विदेश मंत्रालय ने इससे इनकार किया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि उइगर मुस्लिम विद्वानों को बंद करने या गायब करने की बात सरासर अफवाह है. वहीं अपने री-एजुकेशन सेंटरों के बारे में उन्होंने कहा कि ये असल में ट्रेनिंग सेंटर हैं, जहां चीनी भाषा सिखाई जाती है ताकि ये लोग कटे हुए न रहें. साल 2019 के दिसंबर में स्थानीय प्रशासन ने कहा कि रखे गए सभी उइगर स्कॉलर ग्रेजुएट हो चुके हैं. ये बात ही उनका झूठ पकड़ पाती है क्योंकि इनमें से ज्यादातर लोग पहले से काफी पढ़े-लिखे थे. माना जा रहा है कि उन्हें किसी और ट्रेनिंग कैंप में भेज दिया गया है ताकि उनका कोई सुराग न मिले.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने साल 2017 की शुरुआत में इनपर कई प्रतिबंध लगाए थे


क्या है उइगर मुस्लिमों पर विवाद
ये समुदाय चीन के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में बसा हुआ है, शिनजियांग में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने साल 2017 की शुरुआत में इनपर कई प्रतिबंध लगाए थे. इनमें लंबी दाढ़ी रखना, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनना जैसी बातें शामिल थीं. तर्क था कि ये रोक आतंकवाद के खिलाफ चीन के अभियान के तहत लगाई गई है. नकाब या दाढ़ी वाले उइगर मुस्लिमों पर बसों या दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चढ़ने की मनाही की खबरें भी चर्चा में आईं.

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रिफॉर्म के नाम पर हिंसा
हालांकि ये तमाम हिंसाएं दूसरी कई हिंसाओं के आगे कुछ भी नहीं. रिफॉर्म के नाम पर लाखों लोगों को कैंपों में रखा गया. यहां उनके साथ तमाम तरह की हिंसाएं लगातार हो रही हैं. यूनाइटेड नेशन्स ने खुद माना कि ये चीन सरकार ने शिनजियांग को एक तरह से 'नजरबंदी शिविर' में तब्दील कर दिया है. यहां मुस्लिमों को चीनी भाषा और संस्कृति को मानना सिखाया जाता है. उनसे धर्म बदलने को कहा जाता है और न मानने वालों के साथ हिंसा होती है.
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