Covid-19 काबू होने तक UK में प्रकाशित नहीं होगी वैज्ञानिक सलाह, कई लोग नाराज

Covid-19 काबू होने तक UK में प्रकाशित नहीं होगी वैज्ञानिक सलाह, कई लोग नाराज
ब्रिटेन में कुछ प्रतिबंध पूरे साल जारी रह सकते हैं.

यूके सरकार (UK Government) ने फैसला किया है कि उसे कोविड 19 (Covid-19) पर सलाह देने वाली वैज्ञानिक कमेटी के दस्तावेज महामारी के काबू होने तक प्रकाशित नहीं किए जाएंगे. इस पर कई लोगों ने नाराजगी जताई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2020, 2:48 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया में खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. यह अब तक साढ़े 22 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है और डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के प्राण लील चुका है. अब यूके सरकार ने कोविड-19 के नियंत्रित होने तक उस सलाहकार समिति की जानाकारियां और अनुशंसाओं को प्रकाशित करने पर रोक लगा दी है जिसके आधार वह इस महामारी से निपटने संबंधी फैसले ले रह है.

किसकी सलाह मानती है यूके सरकार
यूके सरकार अब तक साइंटिफिक एडवाजरी ग्रुप ऑन इमर्जेंसी ( SAGE) की गाइडलाइन को मानती है. उसके वैज्ञानिक आंकड़े और सलाह के अनुसार वह भी कोविड 19 के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करती है. अब सरकार ने फैसला किया है कि जब तक कोविड-19 महामारी नियंत्रित नहीं हो जाती वह सेज (SEGE) के दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं करेगी.

कहा हुआ है फैसला



यूके की सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वैलेंस ने हाउस ऑफ कॉम्स की विज्ञान और तकनक कमेटी के प्रमुख ग्रेग क्लार्कको भेज खत में कहा है, “ जब सेज (SEGE) इस आपात स्थिति पर अपनी मीटिंग की जानकारी भेजना बंद कर देगी, उसके बाद ही संबंधित दस्तावेज और मीटिंग में भागी दारों के नाम प्रकाशित किए जाएंगे.”



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कोरना वायरस दुनिया में साढ़े 22 लाख लोगों को संक्रमित कर चुका है.


क्यों लिया गया ऐसा फैसला
सेज (SEGE) की सप्ताह में दो बार मीटिंग होती है और उसके बाद वह सरकार को अपनी सलाह देती है. कमेटी की कार्य तब सुर्खियों में आए थे जब सरकार ने उसकी सोशल डिस्टेंसिंग संबंधी सलाह को नहीं माना था. कमेटी ने संक्रमण को कम से कम बनाए रखने के लिए कड़े सोशल डिस्टेंसिंग के नियम अपनाने की सलाह दी थी, जिसे सरकार ने नहीं माना था.

क्या कहते हैं सरकार के आलोचक
सरकार के आलोचक यह भी जानना चाहते हैं कि सरकार ने शुरू में वायरस की जांच की महत्ता पर ध्यान क्यों नहीं दिया था. वहीं मंत्रीगण बार बार कहते रहे कि वे वैज्ञानिक सलाहों को मान रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि इस सलाह के आधार पर ही तय होगा कि सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियां कब तक रहेगी

क्यों है इस फैसले को लेकर असंतोष
इस फैसले को लेकर यूके में असंतोष कम नहीं है.  न्यूकासेल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ हेस्थ एंड सोसाइटी की निदेश ऐलीसन पोलाक कहती हैं कि यह अशोभनीय है. वे उन लोगों में से हैं जो यह मानते हैं  सरकारी सलाहकारों को ज्यादा पारदर्शी होना चाहिए.  उनका कहना है कि लोगो को पता होना चाहिए कि सरकार को कौन सलाह दे रहा है.  सरकार क्या छिपा रही है और किसे बचा रही है.ज्यादातर सेज सदस्य सरकारी नौकर या  सरकार के दिए अनुदान वाली यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक हैं  इसलिए वे करदाताओं के प्रति जवाबदेह हैं.

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कोरोना वायरस का अभी तक इलाज नहीं ढूंढा जा सका है.


सारी जानकारी नहीं दी जा रही है
सरकारी अधिकारियों ने सेज की कुछ अनुशंसाओं को प्रकाशित जरूरत किया था. लेकिन कई विस्तृत जानकारियां छिपा ली थीं. द लेसेंट के एडिटर रॉबर्ट हॉर्टन भी उन्ही लोगों में शामिल हैं जो यह मानते हैं कि सेज के निर्णय प्रक्रिया में लोक स्वास्थ्य सलाह की बड़ी भूमिका होनी चाहिए.

पूरी जानकारी साझा की जाए
मेडिकल जर्नल दे लेसेंट ने पिछले महीने ही एक पत्र प्रकाशित किया था कि सरकारी सलाहकारों को अधिक पारदर्शी होने की जरूरत है. इसमें दर्जनों विशेषज्ञों ने दस्तखत किए थे. पोलाक के अलावा एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के लोक स्वास्थय वैज्ञानिक देवी श्रीधर भी इसमें शामिल हैं. उनका भी मानना है कि उन्हें मिनट्स ऑफ मीटिंग और उसमें भाग लेने वालों के नाम साझा करना चाहिए.
खुद अपने नियमों के खिलाफ है यूके सरकार
यह फैसला खुद यूके सरकार के फैसले की अपनी गाइडेंस के खिलाफ है. 2011 के वैज्ञानिक सलाहकार समिति की कोड ऑफ प्रैक्टिस के मुताबिक मिनिट्स ऑफ मीटिंग जितनी जल्द हो सके लिखित रूप में प्रकाशित करनी चाहिए. फिर भी इसमें यह भी कहा गया था कि समिति के सदस्यों की जानकारी नहीं दी जाए. खास तौर पर किसने क्या सलाह दी.

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