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जानिए, सूरज की किरणें कोरोना वायरस पर क्या असर डालती हैं

News18Hindi
Updated: April 5, 2020, 1:00 PM IST
जानिए, सूरज की किरणें कोरोना वायरस पर क्या असर डालती हैं
लाइट कोरोना वायरस को पूरी तरह से खत्म कर सकती है लेकिन इसमें एक बड़ा खतरा भी है

सूरज से निकलने वाली UV (अल्ट्रावायलेट) लाइट कोरोना वायरस (coronavirus) को पूरी तरह से खत्म कर सकती है लेकिन इसमें एक बड़ा खतरा भी है.

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दिसंबर में सामने आए कोविड-19 (Covid-19) से अब तक दुनियाभर में 12 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. दवाओं और टीके की लगातार खोज के बीच इंटरनेट पर तरह-तरह की जानकारियां आ रही हैं, जो बताती हैं कि कोरोना से कैसे बचा जा सकता है. अल्टरनेटिव मेडिसिन पर यकीन करने वाले बहुत से विशेषज्ञों का दावा है कि सूरज की रोशनी से ये वायरस मर जाता है. खासकर सूरज में पाई जाने वाली UV किरणें या फिर UV सैनेटाइजर इनपर काफी असर करते हैं. सोशल मीडिया पर भी इस तरह की बातें चल रही हैं कि रोज धूप में खड़े रहने पर वायरस से बचा जा सकता है. जानते हैं क्या है ऐसे दावों की हकीकत.

क्या हैं UV किरणें
सूरज से आने वाली इन किरणों को पैराबैंगनी किरणें भी कहते हैं. ये एक तरह की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें हैं. सूरज की रोशनी में पाई जाने वाली कई तरह की तरंगों में से एक पैराबैंगनी किरणों में काफी मात्रा में ऊर्जा होती है और ये त्वचा के लिए काफी खतरनाक मानी जाती हैं. World Health Organisation की मानें तो इनमें इतनी ज्यादा एनर्जी होती है कि ये शरीर में कोशिकाओं को मारने लगती हैं और यहां तक कि DNA की बनावट को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके कई दूसरे घातक असर भी हैं जैसे इनके ज्यादा एक्सपोजर से स्किन कैंसर होना और शरीर की इम्युनिटी कम हो जाना.

इसके कई दूसरे घातक असर भी हैं जैसे इनके ज्यादा एक्सपोजर से स्किन कैंसर होना




कितने तरह की होती हैं


सूरज से 3 तरह की UV किरणें निकलती हैं. पहली है UVA. ये सीधे धरती तक पहुंचती है और शरीर की झुर्रियों के लिए जिम्मेदार होती है. दूसरी किरण है UVB. ये सीधे हमारे DNA को प्रभावित करती है. यही स्किन कैंसर का भी एक कारण है. सन्सक्रीन क्रीम या लोशन से इनसे काफी हद तक बचा जा सकता है. लेकिन एक तीसरा प्रकार भी है. ये है UVC जो कि जेनेटिक मटेरियल को मार सकता है चाहे वह वायरस हों या फिर इंसानी जेनेटिक मटेरियल. यानी ये बहुत ज्यादा खतरनाक हैं लेकिन हम तक पहुंचने से पहले ओजोन की परत इसे रोक देती है.

वैज्ञानिकों के यह जानने के बाद कि UVC कैसे जेनेटिक मटेरियल को खत्म कर पाती हैं, इस रोशनी का इस्तेमाल अस्पतालों में उपकरणों, ओटी को संक्रमण मुक्त करने में किया जाने लगा. अब तक चूंकि कोरोना का इलाज नहीं आ सका है इसलिए वैज्ञानिक ये भी मान रहे हैं कि इस बीच UVC की मदद से भी वायरस खत्म हो सकते हैं.

ये देश कर रहे हैं इस्तेमाल
कोरोना का डर इतना ज्यादा है कि अल्ट्रावायलेट किरणों से इससे बचाव के बारे में बहुत से लोग सहमत हैं. यही वजह है कि चीन में सारी बसों को UVC लाइट की सुरंग से रोज रात में गुजारा जाने लगा है. अस्पतालों में रोबोट UVC की मदद से फ्लोर साफ कर रहे हैं और बैंकों में पैसों को ऐसे ही डिसइन्फेक्ट किया जा रहा है.

चीन में सारी बसों को UVC लाइट की सुरंग से रोज रात में गुजारा जाने लगा है


यहां तक कि थाइलैंड में एक सुरंगनुमा स्ट्रक्टचर भी बनाया गया है ताकि लोग इससे गुजरकर खुद को विषाणुमुक्त कर सकें. माना जा रहा है कि थाइलैंड के उत्तरपूर्वी शहर KhonKaen में ये तरीका अपनाया जा रहा है. Chum Phae Technical College में बनी इस टनल में 30 वाट के 3 यूवी लाइट बल्ब लगाए गए हैं. ये टनल 2 मीटर ऊंची और डेढ़ मीटर चौड़ी है. टनल में जाने से पहले लोग थर्मल स्कैनर से गुजरते हैं और हाथों को सैनेटाइज करते हैं. थाइलैंड में बनी इस टनल को डेढ़ मीटर का ही रखा गया है क्योंकि एक्सपर्ट मानते हैं कि यूवी रेज का ज्यादा एक्सपोजर काफी खतरनाक हो सकता है.

क्या कहता है WHO
WHO साफ कह रहा है कि UVC से बसों, अस्पतालों या उपकरणों को साफ किया जा सकता है लेकिन इंसानों के शरीर पर इसका एक्सपोजर बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है. COVID-19 के बारे में ये कहता है कि कोई चाहे कितनी ही तेज धूप में कितनी ही देर खड़ा रहे, अगर वो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए तो उसे कोरोना हो ही जाएगा. सूरज की रोशनी से वायरस नहीं मरते हैं.

ये किरणें सीधे-सीधे जेनेटिक संरचना में बदलाव ला सकती हैं


कोरोना से खुद को बचाना है तो हाथ धोना, मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है. पहले और दूसरे तरह की यूवी किरणों से कोरोना वायरस का कोई ताल्लुक नहीं है. वहीं तीसरे प्रकार के संपर्क में आने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है या सीधे-सीधे जेनेटिक संरचना में बदलाव आ सकता है, जिसके नतीजे जानलेवा होंगे. WHO ऐसे किसी भी तरीके से बचने के लिए लगातार एडवाइजरी जारी कर रहा है.

इन सबके बीच लगातार उन उपकरणों या रोबोट्स की मांग बढ़ी है, जो तीसरी तरह की किरण यानी UVC उत्सर्जित करते हैं. खासकर चूंकि अस्पताल कोरोना वायरस के लिए ग्राउंड जीरो हैं इसलिए वहां डिसइन्फेक्ट करने के लिए इसी तरह के रोबोट काम में आ रहे हैं. जॉन हॉपकिन्स से दो एपिडेमियोलॉजिस्ट ने सबसे पहले इन किरणों को निकाल सकने वाले रोबोट और दूसरे उपकरण बनाने का प्रस्ताव दिया था.

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First published: April 5, 2020, 12:58 PM IST
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