पृथ्वी को आवासीय बनाए रखने के लिए करने होंगे बहुत सारे बदलाव

पृथ्वी (Earth) को बचाने के लिए अब आर्थिक, राजनैतिक हर स्तर पर कार्य करना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) को बचाने के लिए अब आर्थिक, राजनैतिक हर स्तर पर कार्य करना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर हमें पृथ्वी (Earth) की आवासीयता (Haitability) को कायम रखना है तो समाज, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा उत्पादन में बहुत बड़े बदलाव लाने होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 7:51 PM IST
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इंसानों (Humans) ने पृथ्वी (Earth) के संसाधनों का अनुचित दोहन किया है. इसके नतीजे जलवायु परिवर्तन (Climate Change), जैवविविधता की हानि, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के रूप में सामने आए हैं. मानवजनित गतिविधियों के कारण ही इस ग्रह की आवासीयता (Habitability)  खत्म होती जा रही है. इसीलिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट का कहना है कि पृथ्वी को रहने लायक बनाए रखने के लिए दुनिया को समाज, अर्थशास्त्र और दैनिक जीवन में बहुत से नाटकीय बदलाव करने होंगे.

अलग है इस बार की रिपोर्ट

अब तक कि सयुंक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का ध्यान उन बातों पर ज्यादा था जो यह  बताती थीं कि मानव जाति कितने खतरे में हैं. इनमें यह नहीं बताया जाता था कि इन संकटों से निपटने लिए वैश्विक नेताओं को क्या करना चाहिए. लेकिन हाल ही में दी गई इस रिपोर्ट में पर्यावरण के संकटों के साथ यह भी बताया गया है कि दुनिया को आखिर क्या बदलना होगा.

प्रकृति के बिना जीना असंभव
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी कर कैसे होने चाहिए, कैसे देश अपनी आर्थिक उत्पादकता बढ़ाएं, ऊर्जा उत्पादन कैसा हो, लोग कैसे खेती करें और वे क्या खाएं. इस बात पर जोर दिया गया कि इन सभी पहलुओं में बदलाव लाना होगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव का एनतोनियो गुतरेस का कहना है कि प्रकृति के बिना हम जिंदा ही नहीं रह सकते हैं. उसके खिलाफ हम लंबे समय से एक युद्ध में उलझे हैं.

यह विरासत छोड़ेंगे हम

168 पेज की इस रिपोर्ट का शीर्षक ही है, ‘प्रकृति के साथ शांति स्थापित करना’ है. इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक सर रोबर्ट वाटसन का कहना है कि हमारे संतानें और उनकी संताने चरम मौसमी घटनाएं, बढ़े हुए समुद्री जलस्तर, पौधो और जानवरों की हानि, खाद्य और पानी की असुरक्षा और भविष्य में महामारी होने की अधिकाधिक संभावना विरासत में मिलने वाली हैं.



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मानवीय गतिविधियों ने पृथ्वी (Earth) की आवासीयता (Habitability) को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कितनी खतरनाक है स्थिति

वाटसन का कहना है कि आपातस्थिति जितना समझा जा रहा है उससे कहीं ज्यादा है. पृथ्वी इस समय अतिरिक्त 1.9 डिग्री गर्म होने की ओर है जो पेरिस समझौते के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है. हर साल 90 लाख लोग प्रदूषण से मरते हैं. पृथ्वी की 8 लाख पौधों और जानवरों की प्रजातियों में से दस लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है.

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और ये बेहाली भी

इतना ही नहीं चार करोड़ टन की भारी धातु, जहरीला कीचड़ और अन्य औद्योगिक कचरा दुनियाके पानी में फेंका जा रहा है.  तीन अरब से ज्यादा लोग भूमि निम्नीकरण से प्रभावित हैं और पृथ्वी की केवल 15 प्रतिशत जलमय भूमि अप्रभावित है. 60 प्रतिशत से अधिक मछली भंडार का अधिकतम दोहन हो चुका है. समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण 1980 से दस गुना ज्यादा बढ़ गया है.

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संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की यह पहली रिपोर्ट है जिसमें पर्यावरण (Envrionment) के लिए उठाने वाले कदमों को भी बताया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या करना होगा

इन सब के नतीजे अंततः इंसानों को ही झेलना होंगे. इसके लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि एक ही तरह से सोच कर इस समस्या का समाधान नहीं है. इस रिपोर्ट में समाधान के तौर पर उठाए जाने वाले कदमों का भी जिक्र है. रिपोर्ट में जीवाश्म उत्पादन बंद करने का कहा गया है और साथ ही सरकारों द्वारा इस ईंधन को दी जाने वाले 50 खरब की राशि की सब्सिडी और पर्यावरण खराब करने वाले उद्योंगो को भी बंद करने का कहा गया है.

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सरकार को श्रम या उत्पादन पर कर नहीं लगाना चाहिए, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले संसाधनों पर कर लगाना चाहिए. अर्थव्यवस्था की गणनाओं में जीडीपी के साथ प्रकृति के मूल्य भी शामिल किए जाने चाहिए. रिपोर्ट में माना गया कि समय कठिन है, लेकिन और भी नेतृत्व इसमें शामिल हो रहा है.
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