क्या रोजगार के मामले में बिहारी युवाओं का गुस्सा नतीजों में दिखेगा?

Sherghati Chunav Result: राजद की मंजू अग्रवाल को सीट पर बढ़त मिली हुई है
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Bihar Election Result 2020: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार आधे से ज्यादा वोटर 18 से 40 साल की आयु के थे. तो क्या किसी भी मुद्दे पर रोजगार भारी पड़ सकता है? यहां समझिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 4:28 PM IST
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बिहार चुनाव 2020 (Bihar Election 2020) के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. इसके शुरुआती रुझान 15 सालों से लगातार मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के लिए उतने भी बुरे नहीं हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी. हालांकि नए-नए राजनेता तेजस्वी यादव का उनके साथ कांटे की टक्कर पर होना भी कोई बढ़िया संकेत नहीं. तेजस्वी ने बेरोजगारी के आसपास सारे पासे बिछाए, जिसका जादू चल निकला लगता है. समझिए, मंदिर-मस्जिद पर रोजगार का मुद्दा कैसे भारी पड़ सकता है.

देश के दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार और उत्तरप्रदेश उन राज्यों में हैं, जहां युवा आबादी आधे से भी ज्यादा है. हालांकि इसका दूसरा पहलू काफी चिंताजनक है. कामकाजी आयुवर्ग होने के बाद भी इस राज्य में बेरोजदारी दर सबसे ज्यादा मानी जाती रही. डाटा पर रिसर्च कर रही संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMIE) के अनुसार कोरोना काल में बंदी के कारण ये राज्य बेरोजगारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया. डाटा के मुताबिक अप्रैल-मई में देश में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी थी, जबकि केवल बिहार में ये दर 46 फीसदी रही.

कोरोना काल में बंदी के कारण ये राज्य बेरोजगारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया- सांकेतिक फोटो




CMIE के आंकड़ों की मानें तो कोरोना काल ही नहीं, बल्कि बीते दो सालों में देश और बिहार की बेरोजगारी दर में तेजी से अंतर बढ़ा. यानी कुल मिलाकर देश में जितनी बड़ी युवा आबादी है, उससे 10 फीसदी कम ही बेरोजगारी है. ऐसे में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने युवाओं को ही टारगेट किया और स्थायी नौकरियों का दांव खेला.
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ये दांव इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि बिहार में हो रहे चुनावों में पहली बार लगभग 40 लाख युवा वोटर अपना वोट देने जा रहे हैं, जिनके सामने आगे चलकर रोजगार बड़ी समस्या हो सकता है. साथ ही ये भी दिखता है कि वोटरों में आधे से ज्यादा वोटर 18 से 40 साल आयु से हैं. ये वो वर्ग है, जिसपर परिवार चलाने की जिम्मेदारी होती है और जिसमें करने की इच्छा और माद्दा दोनों होते हैं. सबसे ज्यादा उत्पादक होने के बाद भी बेरोजगारी के कारण यहां से लोग बड़ी संख्या में पलायन कर जाते हैं. अनस्किल्ड लेबर आसपास के राज्यों को जाता है तो काफी ब्रेन ड्रेन भी होता है.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने युवाओं को ही टारगेट किया और स्थायी नौकरियों का दांव खेला


इस पलायन को रोकने के लिए तेजस्वी ने एलान कर दिया कि वे 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देंगे. ये अपने-आप में दोहरा वादा है. इससे न केवल युवाओं को काम मिलेगा, बल्कि खाली पड़े सरकारी विभागों में भर्ती भी होगी और काम भी तेजी से चल निकलेगा. बता दें कि बिहार में स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा विभाग में रिक्त पड़े पदों के कारण सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होती आई हैं.

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ऐसे में युवा नेता का वादा दोहरे वादे की तरह देखा जा रहा है. इसपर एक्शन प्लान भी बना और अमलीकरण भी चालू हो चुका है. आरजेडी ने सितंबर में ‘बेरोजगारी हटाओ' पोर्टल लॉन्च किया. लोगों का दिल टटोलने के लिए इसके साथ एक टोल-फ्री नबंर भी जारी किया गया, जिसपर मिस्ड कॉल देना था. पार्टी का दावा है कि लगभग साढ़े 9 लाख युवाओं ने वेबसाइट पर खुद रजिस्टर किया और 12 लाख से ज्यादा लोगों ने मिस्ड कॉल दिया.

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कुल जमा ये माना जा रहा है कि बेरोजगारी का मुद्दा इस वक्त किसी भी जातीय समीकरण और मंदिर मुद्दे से बड़ा है. कम से युवा आबादी को सोच इस मामले में साफ है. यही वजह है कि तेजस्वी ने इसी मुद्दे के इर्दगिर्द सारी चुनावी योजना बनाए. अब देखना ये है कि क्या ये मुद्दा चुनाव परिणाम में भी झलकेगा. हालांकि शुरुआती रुझान आरजेडी और एनडीए में कांटे की टक्कर दिखा रहे हैं.
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