जानिए उस ग्रह के बारे में जहां पत्थरों की होती है बारिश और लावा के हैं महासागर

यह ग्रह (Planet) अपने तारे (Star) के बहुत पास है और बहुत ही ज्यादा गर्म है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
यह ग्रह (Planet) अपने तारे (Star) के बहुत पास है और बहुत ही ज्यादा गर्म है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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  • Last Updated: November 6, 2020, 6:16 PM IST
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जब भी कहीं बहुत तकलीफदेह हालातों की बात होती है, तो हम ऐसी जगह को नर्क का नाम देते हैं. अब खगोलविदों को ब्रह्माण्ड (Universe) में ऐसा ग्रह दिखाई है जिसके हालातों को देखते हुए कई लोग उसे नर्क (Hellish) के जैसा मान रहे हैं. इस ग्रह में पिघले हुए लावा (Lava) के महासागर (Oceans) हैं और यहां पत्थरों (Rocks) की बारिश (Rain) होती है.

नर्क जैसे हालात
हमसे कुछ ही सैकड़ों प्रकाशवर्ष दूर स्थित यह ग्रह K2141B है. यह इतना ज्यादा गर्म है कि यहां लावा के महासागर हैं और हवा सुपरसॉनिक गति से बहती है. इसके अलावा यहां कि बारिश में पानी ओले या बर्फ नहीं बल्कि पत्थर गिरते हैं. वैज्ञानिकों ने इससे पहले इतने नर्क जैसे हालात कभी नहीं देखे हैं.

अपने सूर्य के बहुत नजदीक
हाल ही में मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित, मैक्गिल यूनिवर्सिटी, यॉर्क यूनिवर्सिटी र इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजूकेशन के इस अध्ययन में इस ग्रह के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. यह लावा ग्रह अपने तारे के बहुत नजदीक से चक्कर लगाता है. इसी वजह से इसके उच्च तापमान की वजह से यहां लावा के महासागर हैं.



वायुमंडल भी बहुत अजीब
इतना ही नहीं यहां का वायुमंडल भी कम अजीब नहीं है. यहां की सतह सागर और वायुमंडल सी कुछ पत्थर के बने हैं. इस सप्ताह इससे संबंधित खबर में इस शोध के प्रमुख लेखक जियांग एनग्येन ने कहा, “यह पहला अध्ययन है जिसने K2-141B के वायुमंडल और मौसम के बारे में इतने विस्तार से बताया है जो कुछ ही सैकड़ों प्रकाश वर्ष दूर है. हो सकता है कि इसकी खोज अगली पीढ़ी के उन्नत जेम्स वेब टेलीस्कोप के द्वारा खोजा जाता.”

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बाह्यग्रहों (Exoplanet) को खोजकर उनका अध्ययन करना सान काम नहीं होता है.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


महासागर के ऊपर चट्टानों की वाष्प
इसके बारे में जानकारी बहुत सीधे तरीके से नहीं मिली. इस ग्रह के बीच में जो चमकीला इलाका दिखा वह एक पिघली हुई चट्टानों को महासागर है जिसके ऊपर वायुमंडल में चट्टानों के वाष्प छाए हुए हैं.  यहां सुपरसॉनिक हवाएं ठंडी और वायुहीन रातों की ओर बहती हैं. जो पत्थरों की बारिश से होते हुए वापस मैग्मा सागर वाले गर्म इलाके में लौट आती हैं.

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एक हिस्सा हमेशा ही तारे के सामने
इस ग्रह की ओर से आने वाले प्रकाश के स्वरूप का अध्ययन करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि इस ग्रह का दो तिहाई हिस्सा हमेशा ही दिन की रोशनी का अनुभव लेता है. K2-141B के पास के तारे की दूरी ऐसी है कि एक हिस्सा हमेशा ही तारे के सामने रहता है. यह हिस्सा बहुत ही गर्म होता है जिसका तापमान 5,,400 डिग्री फेहरनहाइट तक पहुंच जाता है . यह इतना गर्म होता है कि यहां की चट्टाने ही नहीं पिघलतीं बल्कि उनकी भाप यहां का एक पतला वायुमंडल तक बना लेती है.

अब सागरों के तटों का अध्ययन
इस अध्ययन के सहलेखक निकोलस कोवान ने बताया, “हमारा शोध इसके वायुमंडल से थोड़ा आगे जाने वाला है. यहां के मैग्मा के सागरों के तटों का अध्ययन करेंगे जिन्हें टेलीस्कोप से आसानी से देखा जा सकता है. इस ग्रह का बचा हुआ हिस्सा अंधेरे से ढंका हुआ है. जिसका तापमा 328 डिग्री फेहरनहाइट तक पहुंच जाता है.

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यह ग्रह (Planet) का एक हिस्सा हमेशा ही अपने तारे (Star) के सामने रहता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)






पृथ्वी के जलचक्र से कितना मिलता जुलता
पृथ्वी में जल चक्र में पानी वाष्पीकृत होता है ऊपर वायुमंडल में पहुंच कर संघनित होता है और वर्षा के रूप में पृथ्वी पर वापस आ जाता है. अब अगर यही प्रक्रिया हो लेकिन में पानी की जगह चट्टानें हों तो K2-141B जैसे हालात हो जाएंगे.

कैसा होता है K2-141B का चक्र
K2-141B में सोडियम, सिलिकॉन मोनोऑक्साइट और सिलिकॉन डाइ ऑक्साइट खनिज वाष्प के तौर पर वायुमंडल में छा जाते हैं जिन्हें सुपरसॉनिक हवाएं इस ग्रह के पीछे वाले हिस्से तक 3100 मील प्रति घंटा की गति से चलते हुए ले जाती हैं. वहां से ये पत्थर 60 मील गहरे महासागरों में बारिश के पूरे में वापस आ जाते हैं इस तरह से यह चक्र पूरा हो जाता है.

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लेकिन यह चक्र पृथ्वी की तरह स्थायी नहीं है. मैग्मा का बहाव रात से दिन की ओर धीमा होने लगता है . शोधकर्ताओं का अनुमान है कि समय के साथ इनमें खनिजों की संरचना में बदलाव आ जाता है. कोवान का कहना है कि पृथ्वी सहित सभी पथरीले ग्रहों की शुरुआत पिघले हुए संसारों की तरह हुई थी. लावा ग्रह हमें ग्रहों के निर्माण के एक हल्की सी झलक देते हैं.
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