जब 'उइगर मुसलमानों' को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चीन की हुई फजीहत

उइगर समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 8.4 मिलियन यानी 84 लाख है.

News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 12:45 PM IST
जब 'उइगर मुसलमानों' को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चीन की हुई फजीहत
सांकेतिक तस्वीर, उइगर्स
News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 12:45 PM IST
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार काउंसिल में चीन से अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों को बंदी बनाकर रखे जाने पर सवाल उठाया गया. यूएस, फ्रांस और जर्मनी ने चीन से उइगर मुसलमानों के प्रति खराब बर्ताव पर जवाब मांगा. लेकिन चीन ने उनके सवाल का जवाब देने के बजाय पश्चिमी देशों के आरोप को नकार दिया. संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार काउंसिल में चीन के तरफ से जवाब उनके विदेश मंत्रालय के उप-मंत्री ने Le Yucheng ने दिया.

विस्तार से जानिए ,कौन हैं चीन के शिनजियांग में रहने वाले  'उइगर समुदाय के मुसलमान' और क्या है उनका मामला. 

साल 2000 की जनगणना में चीन में मुसलमानों की आबादी 20.3 मिलियन यानी (लगभग 2 करोड़ से ज्यादा) आंकी गई. जो वहां की कुल आबादी का लगभग 1.7 फीसदी है.

ये भी पढ़ें- दिल्ली तो ठीक, लेकिन इन शहरों की हवा क्यों हो रही है खराब

1- हुई (Hui) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 9.8 मिलियन यानी 98 लाख है.
2- उइगर (Uyghurs/Uighurs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 8.4 मिलियन यानी 84 लाख है.
3- कैज़ैख्स (Kazakhs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 1.25 मिलियन यानी 12.5 लाख है.
Loading...
चर्चा में हैं उइगर समुदाय के मुसलमान
उइगर समुदाय के मुसलमान चीन के उत्तर पश्चिमी हिस्से में रहते हैं, जिसमें शिनजियांग प्रांत भी शामिल है. शिनजियांग और यहां के मुसलमानों से जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं. शिनजियांग प्रांत अफगानिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर से सटा है. ये प्रांत पिछले कई सालों से अशांत है. तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की बहुलता वाले इस इलाके के लोग वहां पर हान चीनियों को बड़े पैमाने पर बसाने का विरोध भी कर रहे हैं.



उइगरों पर प्रतिबंध
-अप्रैल 2017 की शुरुआत में शिनजियांग के उइगर मुस्लिमों पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे. जिसमें लंबी दाढ़ी रखना, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनना, सरकारी टीवी चैनल देखने पर मनाही शामिल थी. कहा गया था कि ये बंदिशें आतंकवाद के खिलाफ अभियान के तहत लगी हैं.

-अक्टूबर 2017 में खबर आई थी कि उइगर समुदाय से नमाज़ के दौरान बिछाई जाने वाली चटाई और कुरान को जमा किया गया था. लेकिन चीन सरकार ने इसे अफवाह बताया था.

ये भी पढ़ें- Air Pollution: ये पांच फूड्स आपको बचाएंगे जहरीली हवा के असर से

-2014 में चीन ने अपने अशांत पश्चिम प्रांत शिनजियांग की शहरी बसों में बुर्का ओढ़ने वाली महिलाओं और दाढ़ी रखने वाले पुरुषों के चढ़ने पर रोक लगा दी थी. इस कदम के पीछे उसने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था, लेकिन इसे मुलसमानों के खिलाफ मानकर काफी आलोचना हुई थी.



- इसी साल 11 अक्टूबर चीन की सरकार ने देश में हलाल मांस पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया. इस्लाम की मान्यता के मुताबिक मुस्लिम सिर्फ़ हलाल मांस ही खा सकते हैं, ऐसे में शी जिनपिंग सरकार के इस फैसले को उइगर मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर हमले और उनके खान-पान के तरीके पर पाबंदी की कोशिश के रूप में देखा गया.

उइगरों पर जुल्म के लिए चीन की आलोचना
अब फिर से शिनजिंयाग सुर्खियों में हैं. यहां के मुसलमानों के प्रति रवैये के लिए चीन की दुनिया भर में खूब आलोचना हो रही है. कहा रहा है यहां लगभग दस लाख मुसलमानों 'दोबारा शिक्षा' देने के लिए हिरासत में रखा गया है. चीन से इसे 'व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों' में रखना करार दिया है. चीन सरकार ने अपने इस विवादास्पद कदम को यह कहते हुए जायज ठहराया कि इससे पिछले 21 महीने में वहां आतंकवादी हमले रुक गए हैं.

क्या कह रहा है संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार कमेटी
संयुक्त राष्ट्र की जिनेवा स्थित नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति भी उइगरों की हिरासत से चिंतित है. उसने भी उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है. अमेरिका के सांसद ब्रैड शर्मन ने 29 अक्टूबर को संसदीय सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि चीन उइगर मुस्लिमों का बड़े पैमाने पर दमन कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहा गया कि चीन सरकार ने शिनजियांग को एक तरह से 'नजरबंदी शिविर' में तब्दील कर दिया है.

बीबीसी की रिपोर्ट में भी संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार कमेटी को बताए जाने के हवाले से लिखा है कि 'पूरा उइगर स्वायत्त क्षेत्र नज़रबंदी में है.'



हिरासत में रखे लोगों का हाल
-मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, इन लोगों को चीनी भाषा सिखाई जाती है.
-चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए वफादारी की कसमें खिलाई जाती हैं.
-जानकार बताते हैं चीन की सरकार चाहती है कि वहां के मुस्लिम अपनी धार्मिक मान्यताओं को छोड़कर धीरे-धीरे चीन की संस्कृति को अपना लें.

चीनी सरकार की तरफ से उइगरों पर लगाई गईं तमाम पाबंदियों से वे सरकार से खफा रहते हैं.

नजरबंदी शिविरों का पता कैसे चला
शिनिजयांग के मुसलमानों नजरबंदी शिविरों में कैद करके रखे जाने की खबरें पिछले साल से आना शुरू हुईं. इसकी वजह शिनिजयांग प्रांत का दबानचेंग जिला रहा. इस जिले पर से जुलाई 2015 में एक सैटेलाइट गुजरी थी. जिसने वहां की एक तस्वीर ली. सैटेलाइट की तस्वीर को रिसर्चरों ने गूगल अर्थ से पाया. इस तस्वीर से ही अंदाजा लगाया गया कि ये शिविर दबानचेंग कस्बे के बाहर बने हैं.

गूगल अर्थ एक सर्विस है, जिसकी मदद से दुनिया की किसी भी जगह को सर्च कर वहां 3D इमेज भी देखी जा सकती है.

ये भी पढ़ें- जानिए उन गुरुमूर्ति को, जिनके चलते शुरू हुआ रिजर्व बैंक का विवाद
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर