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  • UNIVERSITY OF TOKYO MAKES LIVE CELLS VISIBLE WITH 7 TIMES GREATER SENSITIVITY VIKS

जीवित कोशिका को 7 गुना ज्यादा संवेदनशीलता से दिखा सकेगी यह तकनीक

माइक्रोस्कोप कैमरा (Microscopic Camera) पद्धति में यह एक उल्लेखनीय बदलाव लाने वाली खोज होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

माइक्रोस्कोप कैमरा (Microscopic Camera) के लिए इमेजिंग (Imaging) की नई तकनीक से अब एक जीवित कोशिका (Live Cell) को बहुत बेहतर संवेदनशीलता के साथ देखा जा सकेगा.

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    प्रकाशीय विज्ञान (Optical Science)  में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए विशेषज्ञों ने कोशिकाओं (Cells) को ज्यादा बेहतर देखने का तरीका निकाला है. जापान (Japan) के विशेषज्ञों ने जीवित कोशिकाओं (Living Cells) के अंदर विस्तार से देखने के लिए माइक्रोस्कोप तकनीक (Microscopic Technique) में संवेदनशीलता (Sensitivity) को बढ़ाया है और वह भी बिना की डाई आदि को डालते हुए. टोक्यो यूनिवर्सटी (University of Tokyo) की इस तकनीक के बारे में बताया जा रहा है कि यह तकनीक तस्वीर की संवेदनशीलता सात गुना बढ़ा देती है.

    इस वजह से आती है सीमाएं
    चूंकि कोशिकाएं पूरी तरह से पारदर्शी नहीं होते माइक्रोस्कोपी कैमरा कोशिकाओं को पार करने वाले हिस्सों की स्पष्ट पहचान करने वाले होना चाहिए. कैमरों में यह क्षमता होनी चाहिए कि वह कोशिका के हिस्सों से गुजरने वाले अलग-अलग प्रकाश की पहचान कर सके जिन्हें प्रकाश की प्रावस्था (Phases) कहा जाता है. कैमरे के इमेज सेंसर कितनी मात्रा में प्रकाश की प्रावस्था में अंतर कर पाते हैं इसे डायनामिक रेंज कहते हैं और यही इन सेंसर की सीमा होती है.

    शोधकर्ताओं ने किया इसका विस्तार
    यह अध्ययन लाइट्स: साइंस एंड एप्लिकेशन में प्रकाशित हुआ है. टोक्यो इंस्टीट्यूय फॉर फोटोन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एसोसिएट फ्रोफेसर ताकुरो इदेगुची का कहना है कि किसी इमेज सेंसर का ही उपयोग कर हमें डायनामिक रेंज का विस्तार करना था जिससे हम प्रकाश के छोटे प्रावस्था (Phases)  बदलाव देख सकें.

    क्या तकनीक विकसित की?
    इसके लिए शोधकर्ताओं की टीम ने ऐसी तकनीक विकसित की जिसमें उन्होंने प्रकाश के बड़े और छोटे प्रावस्था के अलग अलग बदलाव देखे और उसके बाद उन्होंने उससे अंतिम विस्तृत तस्वीर बना डाली. उन्होंने अपनी पद्धति को एडाप्टिव डायनामिक रेंज शिफ्ट क्वांटिटेटिव फेज इमेजिंग (ADRIFT-QPI) नाम दिया है.

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    इस तस्वीर में कोशिकाओं (Live Cells) के हि्ससों को विस्तार से दर्शाया गया है. (तस्वीर:  Toda et al., CC-BY https://creativecommons.org/licenses/by/4.0/)


    क्या दिखता है नई तस्वीर में
    इस तकनीक में ऊपर से एक मानक (Standard) तस्वीर परंपरागत मात्रात्मक प्रावस्था इमेजिंग से ली और नीचे से एक साफ तस्वीर ADRIFT-QPI माइक्रोस्कोपी पद्धति का उपयोग कर ली गई. बाईं ओर की तस्वीरें प्राकशीय प्रावस्था (optical phase) की हैं और दाईं और की तस्वीरें उसमें बदालव को दर्शाती है. ये बदालव प्रोटीन की वजह से मिड इंफ्रारेड प्रकाश अवेशोषण के कारण होते हैं. नीले तीर केंद्रक की सीमाएं दर्शाते हं और सफेद तीर केंद्रक के अंदर के न्यूक्लोई को दर्शाते हैं, वहीं हरे तीर दूसरे अन्य विशाल कणों को दर्शाते हैं.

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    क्या फायदे हैं इस तकनीक के
    इदेगुची का कहना है कि उनकी पद्धति को किसी खास लेजर, खास माइक्रोस्कोप या इमेज सेंसर की जरूरत नहीं पड़ती है. जीवित कोशिकाओं के लिए किसी स्टेन या फ्लोरेसेंस की भी जरूरत नहीं होती है. इसलिए यहां फोटोटॉक्सिसिटी की संभावना भी बहुत ही कम होती है. फोटोटॉक्सिसिटी में प्रकाश वजह से कोशिकाएं मर जाती हैं जो दूसरी इमेजिंग तकनीकों के साथ समस्या होती है.

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    इस तरह की तकनीकों में चुनौती यह होती है कि जीवित कोशिकाओं(Living Cell) के कुछ हिस्से प्रकाश के प्रति संवेदनशील होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    इस खास इमेजिंग का महत्व
    इस तरह से कोशिकाओं के अवलोकन में मात्रात्मक प्रावस्था इमेजिंग (Quantitative phase imaging) एक बहुत अहम उपकरण होता है जिसमें कोशिका की ओर प्रकाश का पल्स भेजा जाता है और फिर फेज शिफ्ट को नापा जाता है. कम्प्यूटर विश्लेषण के जरिए कोशिका के अंदर की संरचनाओं की तस्वीर का फिर से निर्माण किया जाता है.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि इस ADRIFT-QPI तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बिना किसी स्टेन या लेबल के पूरे जीवित कोशिकाओं के महीन कणों की देखने की क्षमता है. इसमें नैनोस्केल कणों जैसे वायरल और कोशिका में घूमने वाले अन्य कणों से मिलने वाले संकेतों को भी देखा जा सकता है.