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पुण्यतिथि: 17 फिल्मों में कृष्ण बन चुके एनटी रामाराव एक अपमान के चलते बने राजनेता

पुण्यतिथि: 17 फिल्मों में कृष्ण बन चुके एनटी रामाराव एक अपमान के चलते बने राजनेता

तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार एनटी रामाराव

तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार एनटी रामाराव

तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार रहे एनटी रामाराव (N T Rama Rao) ने तेलुगुदेशम नाम से अपनी एक पार्टी बनाई और एकदम से आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के करिश्माई नेता बन गए.

    एनटी रामाराव का पूरा नाम नन्दमूरि तारक रामाराव (Nandamuri Taraka Rama Rao) था. राजनीति में आने से पहले वे दक्षिण के दिग्गज अभिनेता थे. ग्लैमर की दुनिया से मुख्यधारा राजनीति में आकर छा जाने के पीछे एक घटना बताई जाती है, जिसका जिक्र पत्रकार प्रभाष जोशी ने अपने कई लेखों में किया था. दरअसल ये किस्सा अभिनेता रामाराव से अपमान से शुरू हुआ और पॉलिटिक्स के लिए प्रेरणा बना.

    बात साल 1982 की है. एक प्रोग्राम में शामिल होने के लिए रामाराव नेलोर पहुंचे थे और वहां सरकारी गेस्ट हाउस गए. गेस्ट हाउस में सिर्फ एक ही कमरा खाली था, जो वहां के एक मंत्री के लिए बुक हो चुका था. रामाराव ने गेस्टहाउस के स्टाफ से जिद करके कमरा अपने लिए खुलवा लिया. लेकिन इसी बीच मंत्री महोदय आ पहुंचे और रामाराव को कथित तौर पर अपमानित होकर कमरा छोड़ना पड़ा था.

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    एनटी रामाराव ने तेलुगुदेशम के नाम से अपनी ऩई राजनीतिक पार्टी बनाई


    अपने ठिकाने लौटने के रामाराव ने एलान कर दिया कि वे अब उम्रदराज हो चुके हैं और समाज हित में राजनीति में आ रहे हैं. उन्होंने तेलुगुदेशम के नाम से अपनी ऩई राजनीतिक पार्टी बनाई. फिर 1984 में भारी बहुमत से जीतकर आंध्र प्रदेश में अपनी सरकार बनाई. इसके बाद एक जमाना ये भी आया जब उन्हें देश के ऐसे नेताओं में गिना जाने लगा जो कांग्रेस के खिलाफ संयुक्त विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री की दावेदारी पेश कर सकता था. हालांकि रामाराव के कई किस्से भी हैं लेकिन आंध्र प्रदेश में बहुत से लोग उन्हें भगवान से कम नहीं मानते थे.

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    एनटी रामाराव 28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में पैदा हुए थे. तब ये मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा था. उनके अभिभावक किसान थे. बाद में उन्हें उनके मामा ने गोद ले लिया. जिस साल देश को आजादी मिली, उसी साल उन्हें मद्रास सर्विस कमीशन में सब रजिस्ट्रार की बढ़िया नौकरी मिली. लेकिन एक्टिंग में करियर बनाने के चलते उन्होंने केवल तीन हफ्ते में ये नौकरी छोड़ दी.

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    कहा जाता है कि एनटीआर का स्कूल के दिनों से ही एक्टिंग के प्रति झुकाव था. स्कूल में उन्होंने जो पहला प्ले किया, उसमें वो महिला बने थे. 1949 में माना देशम नाम की उनकी जो पहली फिल्म आई, उसमें वो पुलिस अफसर बने. NTR ने ज्यादातर धर्म आधारित फिल्मों में ही काम किया. इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्होंने 17 फिल्मों में कृष्ण का किरदार निभाया था.

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    कहा जाता है कि एनटीआर का स्कूल के दिनों से ही एक्टिंग के प्रति झुकाव था


    उनके बारे में एक घटना बाद में बहुत मशहूर हुई. 1984 में जब राज्यपाल रामलाल ने उनकी सरकार गिराकर एक अल्पमत सरकार बनवाई तो एनटीआर ने राष्ट्रपति जैल सिंह के साथ विधायकों को मिलाने का फैसला किया. जैल सिंह ने उन्हें समय दे दिया. तब आज की तरह अतिरिक्त जहाज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी.

    विधायकों का समूह ट्रेन से दिल्ली रवाना हुआ. इससे दिल्ली की हुकूमत विचलित हो गई. ट्रेन की स्पीड घटाकर 20 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई. ट्रेन 10 घंटे देर से दिल्ली पहुंची. राष्ट्रपति से मुलाकात का समय निकल चुका था. लेकिन प्रेस के दवाब में राष्ट्रपति को एनटीआर और उनके 150 से ज्यादा विधायकों से मिलना पड़ा. एनटीआर खुद राष्ट्रपति भवन गए. रामलाल को इस्तीफा देना पड़ा. एनटीआर फिर मुख्यमंत्री बने.

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    उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए पढ़ाई के दौरान रामाराव परिवार की मदद करने के लिए विजयवाड़ा के स्थानीय होटलों में दूध बेचने का काम भी करते थे. 1942 में उन्होंने अपने मामा की बेटी के साथ विवाह किया. उन्होंने दो विवाह किए थे. कुल मिलाकर उनकी 12 संतानें थीं. इसमें आठ बेटे और चार बेटियां थीं. सन 1993 में 70 साल की उम्र में रामा राव ने तेलुगु लेखक ‘लक्ष्मी पार्वती’ से फिर शादी की लेकिन एनटीआर के परिवार ने लक्ष्मी को कभी स्वीकार नहीं किया.

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    एनटीआर इतने पॉपुलर थे कि लोग उन्हें देवता ही मानते थे


    एनटीआर इतने पॉपुलर थे कि लोग उन्हें देवता ही मानते थे. इसका फायदा उनको राजनीतिक करियर में भी मिला. लोगों के बीच उनकी फिल्मों की तरह ही उनकी राजनीति भी पॉपुलर रही. 1983 से 1994 के बीच वह तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इस अभिनेता से राजनेता बने शख्स की लोकप्रियता का अंदाजा एक घटना से लग सकता है. साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी तब बस आंध्र-प्रदेश में कांग्रेस नहीं जीत पाई. इतना ही नहीं तेलुगु देशम लोक सभा में मुख्य विपक्षी दल भी बन गया.

    साल 1989 के चुनाव में सत्ता विरोधी लहर के कारण तेलुगु देशम पार्टी चुनाव हार गई. कांग्रेस फिर सत्ता में वापस आ गई. सन 1994 में एनटी रामा राव दोबारा सत्ता में लौटे. उनकी तेलुगु देशम पार्टी की 226 सीटों पर जीत हुई. इस बार एनटी रामा राव महज 9 महीने के लिए ही मुख्यमंत्री पद रह पाए क्योंकि उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी के अंदर भीतरघात कर रामा राव को पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद से हटा दिया.undefined

    Tags: Andhra Pradesh, Art and Culture, NT Rama Rao

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