जानिए, कौन हैं उद्भव ठाकरे, जिन्होंने भाजपा से हाईजैक कर लिया राम मंदिर मुद्दा

बाल ठाकरे, जिनकी गरज से सारा महाराष्ट्र थर्राता था, उन्हीं की मर्जी के खिलाफ उद्धव ने एक लड़की पसंद की और उसी से शादी की.

News18Hindi
Updated: November 25, 2018, 2:33 PM IST
जानिए, कौन हैं उद्भव ठाकरे, जिन्होंने भाजपा से हाईजैक कर लिया राम मंदिर मुद्दा
फाइल फोटो
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Updated: November 25, 2018, 2:33 PM IST
राम मंदिर निर्माण पर सत्तासीन पार्टी के ढीले रवैए पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ललकार देश के कोने-कोने में गूंज उठी है. अयोध्या में संत सम्मेलन से पहले राम लला के दर्शन के बाद बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए उद्धव ने कहा कि मंदिर नहीं बना सकती तो पार्ट हमसे कहे. उद्धव ठाकरे सिर्फ बाल ठाकरे के पुत्र नहीं, बल्कि राजनीति में उनकी एक अलग छवि बन चुकी है. वे अपने निर्भीक और अपने बेबाक तेवरों के लिए जाने जाते हैं. अपनी बेबाकी से सत्ता पक्ष को चुनौती देने की हिम्मत रखने वाले इस नेता की जिंदगी के कई अन्य दिलचस्प पहलू भी हैं, जो कम ही लोग जानते हैं.

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उद्धव, जिनका पूरा नाम उद्धव बाल केशव ठाकरे है की पैदाइश 27 जुलाई 1960 की है. वे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का ये पुत्र युवावस्था से ही अपने बागी और कुछ अलग किस्म के तेवरों के लिए जाना जाता रहा. घर के कट्टर राजनैतिक माहौल में पल-बढ़ रहे उद्धव को कला में खासी रुचि रही और उन्होंने बाकियों से अलग कला की पढ़ाई चुनी. मुंबई के जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट से पढ़ाई के दौरान उद्धव को फोटोग्राफी में दिलचस्पी जागी और यहीं से वे फोटोग्राफी करने लगे. ये सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उद्धव ने इसमें कई अवार्ड्स जीते. बाद में पिता को भी उद्धव फोटोग्राफी के हुनर सिखाया करते थे. फोटोग्राफी पर उनकी दो किताबें भी आ चुकी हैं जो महाराष्ट्र की कला और संस्कृति की कहानी कहती हैं.

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निजी रिश्तों को लेकर भी ये नेता अपनी जिद के लिए जाना जाता रहा. वो बाल ठाकरे, जिनकी एक गरज से सारा महाराष्ट्र थर्राता था, उसी की मर्जी के खिलाफ उद्धव ने एक लड़की पसंद की और उसी लड़की से शादी की. महज 21 साल की उम्र में जब उद्धव रश्मि को ब्याहकर घर लाए तो नए जोड़े को परिवार के गुस्से और ठंडेपन का सामना करना पड़ा, हालांकि वक्त के साथ उन्हें अपना लिया गया.


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शुरुआती दौर वे सक्रिय राजनीति से जुड़े हुए नहीं थे, बल्कि अपने संपादकीय कौशल की वजह से मराठी अखबार सामना का बखूबी संपादन कर रहे थे. इसी दौरान वे चुनावी गतिविधियों में भी अपना योगदान दिया करते लेकिन राजनीति में उनका दखल शुरू हुआ साल 2002 से, जब उन्होंने नगर निगम का चुनाव जीता. इसके अगले ही साल उद्धव को पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया. तब से लेकर उनका चुनावी सफर लगातार आगे बढ़ता ही गया. हालांकि उनकी राजनैतिक शख्सियत पर लगातार सवाल भी उठते रहे. मसलन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनेता नारायण राणे ने सार्वजनिक तौर पर उद्धव की राजनैतिक क्षमताओं पर सवाल उठाया था. ऐसी कई घटनाएं राजनैतिक पटल पर होती रहीं, जिनके बावजूद उद्धव की छवि एक मजबूत नेता की बनी.



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उद्धव अपने विवादित बोलों के लिए भी जाने जाते हैं, जैसे शिवाजी की प्रतिमा पर माला चढ़ाए जाने के दौरान योगी आदित्यनाथ के खड़ाऊ पहना होने को शिवाजी का अपमान बताते हुए उद्धव ने कहा कि योगी को चप्पलों से पीटा जाना चाहिए. कई और जगहों पर भी वे बीजेपी के प्रति तख्त बोल बोल चुके हैं और इसके पीछे इस नेता के पास साफ वजह है. वे मानते हैं कि शिवसेना ने हिंदुत्व के लिए ही बीजेपी का समर्थन किया और अगर बीजेपी इसमें जरा भी हील-हुज्जत करती है तो पार्टी ये नहीं सहेगी.
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